पंजाब कांग्रेस में ‘पोस्टर पॉलिटिक्स’ से फिर गरमाई गुटबाजी:पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान तेज, खन्ना बना नया अखाड़ा, 8 अगस्त कार्यक्रम पर नजर

पंजाब कांग्रेस में ‘पोस्टर पॉलिटिक्स’ से फिर गरमाई गुटबाजी:पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान तेज, खन्ना बना नया अखाड़ा, 8 अगस्त कार्यक्रम पर नजर

पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी कलह और गुटबाजी एक बार फिर सड़कों पर आ गई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के नौ दिवसीय संगठनात्मक दौरे के बीच राज्य के कई जिलों में अंतर्विरोध खुलकर सामने आ रहे हैं। अब इस सियासी मुकाबले का मुख्य केंद्र खन्ना शहर बन गया है, जहां नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई तेज हो गई है। होर्डिंग्स पॉलिटिक्स: चन्नी समर्थकों का बड़ा शक्ति प्रदर्शन खन्ना में 8 अगस्त को सत्कार पैलेस में होने वाले ‘हर बूथ, कांग्रेस मजबूत’ कार्यक्रम से ठीक पहले शहर भर में लगे नए होर्डिंग्स ने नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। यह होर्डिंग्स कांग्रेस द्वारा 15 अगस्त को ईसड़ू में आयोजित की जाने वाली राज्य स्तरीय शहीदी कांफ्रेंस के प्रचार के लिए लगाए गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन पोस्टरों में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की तस्वीर को सबसे बड़ा और प्रमुखता से दिखाया गया है, जबकि पंजाब कांग्रेस के अन्य शीर्ष नेताओं की तस्वीरें अपेक्षाकृत काफी छोटी रखी गई हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे सीधे तौर पर चन्नी समर्थकों के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग संगठनात्मक स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। दो धड़ों में बंटी खन्ना जिला कांग्रेस खन्ना जिला कांग्रेस लंबे समय से दो खेमों में बंटी हुई नजर आ रही है। कुछ समय पहले पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के आवास पर आयोजित एक बैठक में पूर्व मंत्री गुरकीरत सिंह कोटली और जिला कांग्रेस अध्यक्ष लखबीर सिंह लक्खा की मौजूदगी ने साफ संकेत दे दिए थे कि यह गुट चन्नी के साथ मजबूती से खड़ा है। दूलो और कोटली परिवार की पुरानी प्रतिद्वंद्विता: दूसरी ओर, पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और खन्ना के वरिष्ठ नेता शमशेर सिंह दूलो को अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का बेहद करीबी माना जाता है। हाल ही में दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक और फतेहगढ़ साहिब के कार्यक्रम में साझी की गई साख इस बात का प्रमाण है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शमशेर सिंह दूलो और कोटली परिवार के बीच की पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता ने खन्ना की इस जंग को और ज्यादा दिलचस्प बना दिया है। प्रभारी भूपेश बघेल के दौरे पर टिकीं निगाहें संग्रूर, पटियाला और मुक्तसर जैसे जिलों में कांग्रेस के कार्यक्रमों के दौरान हुई नारेबाजी और पोस्टरों के विवाद के बाद अब 8 अगस्त को खन्ना में होने वाले कार्यक्रम पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। प्रभारी भूपेश बघेल का यह खन्ना दौरा अब केवल एक सामान्य संगठनात्मक फीडबैक कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि इसे पंजाब कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन साधने और आलाकमान को एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।

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