जयपुर। निकाय चुनाव खत्म हो गए। नतीजे आ गए। अब बारी काम की है। प्रदेश के 309 नगरीय निकायों में चुने गए 10,245 पार्षद अपनी-अपनी जिम्मेदारी संभालने की शुरुआत कर चुके हैं। 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगरपालिकाओं में बड़ी संख्या ऐसे पार्षदों की है, जो पहली बार चुने गए हैं। उनके सामने अगले पांच साल में अपने वार्ड को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी है। सड़क, सफाई, कचरा, नाली, सीवर, स्ट्रीट लाइट, पार्क और पेयजल जैसी रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर जनता सबसे पहले उनके पास ही पहुंचेगी।
अब सवाल यह है…
उसके अधिकार क्या हैं?
कौन-सा काम उसके अधिकार क्षेत्र में आता है और किस काम के लिए दूसरे विभाग जिम्मेदार हैं?
वार्ड के काम बजट में कैसे शामिल होते हैं?
खराब काम होने पर पार्षद क्या कर सकता है?
जनता अपने पार्षद से किस आधार पर सवाल पूछ सकती है?
इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए राजस्थान पत्रिका शुरू कर रहा है विशेष अभियान -‘सेवा का संकल्प’
इस अभियान में हम बताएंगे-पार्षद के अधिकार, जिम्मेदारियां और सीमाएं। साथ ही यह भी समझेंगे कि वार्ड की समस्याएं कैसे दर्ज हों, काम की निगरानी कैसे हो, किस स्तर पर शिकायत की जाए और जनता अपने चुने हुए प्रतिनिधि से जवाब कैसे मांगे। नए बने निगम, परिषद व पालिकाएं काम शुरू कर रही हैं। इसलिए यह अभियान उनकी भूमिका और व्यवस्था को समझने का प्रयास है, क्योंकि पांच साल की शुरुआत हो रही है तो हिसाब भी शुरुआत से लिखा जाएगा।

