लखीसराय के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थान सदर अस्पताल में पैथोलॉजी जांच सेवा पिछले तीन दिनों से पूरी तरह बाधित है। इस वजह से शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जांच सुविधा बंद रहने के कारण मरीज समय पर इलाज से वंचित हो रहे हैं, वहीं चिकित्सकों को भी बिना जांच रिपोर्ट के उपचार करने में कठिनाई हो रही है। मशीन खराब होने से 100 से ज्यादा जांच बंद जानकारी के अनुसार, अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में लगी फुली सेमी बायोकेमेस्ट्री मशीन और सीबीसी मशीन खराब हो गई है। इन दोनों मशीनों के ठप होने से करीब 100 से अधिक प्रकार की जांच पूरी तरह बंद हो गई है। वर्तमान में लैब में केवल केमिकल की मदद से होने वाली ब्लड ग्रुप जांच ही किसी तरह की जा रही है। अन्य सभी जरूरी जांच सेवाएं बंद हैं, जिससे मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। नोटिस लगाकर दी गई जानकारी लैब टेक्नीशियन की ओर से मशीन खराब होने की सूचना अस्पताल परिसर में नोटिस लगाकर दी गई है। इसमें साफ तौर पर बताया गया है कि तकनीकी खराबी के कारण जांच सेवाएं बाधित हैं। इस नोटिस का उद्देश्य मरीजों को बार-बार पूछताछ से बचाना है, लेकिन इससे उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। रोजाना 100 से ज्यादा मरीज पहुंचते हैं जांच के लिए सदर अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 100 से अधिक मरीज जांच कराने के लिए पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों की होती है, जो सरकारी अस्पताल में मुफ्त जांच सुविधा का लाभ लेने आते हैं। जांच सेवा ठप होने से इन मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। निजी लैब का सहारा लेने को मजबूर मरीज आपातकालीन स्थिति में मरीजों को मजबूरीवश निजी पैथोलॉजी लैब का रुख करना पड़ रहा है। वहां जांच कराने में अधिक खर्च आ रहा है, जो गरीब मरीजों के लिए भारी पड़ रहा है। कई मरीजों ने बताया कि सरकारी अस्पताल में सुविधा बंद होने से उन्हें जेब ढीली करनी पड़ रही है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ गया है। डॉक्टरों को भी इलाज में आ रही परेशानी जांच रिपोर्ट के अभाव में चिकित्सकों को भी इलाज करने में कठिनाई हो रही है। बिना सटीक जांच के सही बीमारी का पता लगाना मुश्किल हो जाता है, जिससे इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इससे मरीजों की रिकवरी में देरी होने की आशंका भी बढ़ गई है। मरीजों ने की जल्द बहाली की मांग मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से जल्द से जल्द जांच सेवा बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में जांच सुविधा बंद रहने से सबसे ज्यादा नुकसान गरीब और जरूरतमंद लोगों को हो रहा है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में ऐसी लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है। प्रशासन ने दिया आश्वासन अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. कुमार अमित ने बताया कि मशीन खराब होने की जानकारी वरीय अधिकारियों को दे दी गई है। मशीन की मरम्मत के लिए प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि एक से दो दिनों में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है, लेकिन सूत्रों की मानें तो सोमवार से पहले मशीन के पूरी तरह चालू होने की संभावना कम है। फिलहाल जारी रहेगी परेशानी ऐसे में मरीजों की परेशानी फिलहाल जारी रह सकती है। जब तक मशीन की मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक जांच सेवा बहाल होना मुश्किल है। यह स्थिति एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करती है, जहां तकनीकी खराबी के चलते पूरी सेवा व्यवस्था ठप हो जाती है। लखीसराय के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थान सदर अस्पताल में पैथोलॉजी जांच सेवा पिछले तीन दिनों से पूरी तरह बाधित है। इस वजह से शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जांच सुविधा बंद रहने के कारण मरीज समय पर इलाज से वंचित हो रहे हैं, वहीं चिकित्सकों को भी बिना जांच रिपोर्ट के उपचार करने में कठिनाई हो रही है। मशीन खराब होने से 100 से ज्यादा जांच बंद जानकारी के अनुसार, अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में लगी फुली सेमी बायोकेमेस्ट्री मशीन और सीबीसी मशीन खराब हो गई है। इन दोनों मशीनों के ठप होने से करीब 100 से अधिक प्रकार की जांच पूरी तरह बंद हो गई है। वर्तमान में लैब में केवल केमिकल की मदद से होने वाली ब्लड ग्रुप जांच ही किसी तरह की जा रही है। अन्य सभी जरूरी जांच सेवाएं बंद हैं, जिससे मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। नोटिस लगाकर दी गई जानकारी लैब टेक्नीशियन की ओर से मशीन खराब होने की सूचना अस्पताल परिसर में नोटिस लगाकर दी गई है। इसमें साफ तौर पर बताया गया है कि तकनीकी खराबी के कारण जांच सेवाएं बाधित हैं। इस नोटिस का उद्देश्य मरीजों को बार-बार पूछताछ से बचाना है, लेकिन इससे उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। रोजाना 100 से ज्यादा मरीज पहुंचते हैं जांच के लिए सदर अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 100 से अधिक मरीज जांच कराने के लिए पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों की होती है, जो सरकारी अस्पताल में मुफ्त जांच सुविधा का लाभ लेने आते हैं। जांच सेवा ठप होने से इन मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। निजी लैब का सहारा लेने को मजबूर मरीज आपातकालीन स्थिति में मरीजों को मजबूरीवश निजी पैथोलॉजी लैब का रुख करना पड़ रहा है। वहां जांच कराने में अधिक खर्च आ रहा है, जो गरीब मरीजों के लिए भारी पड़ रहा है। कई मरीजों ने बताया कि सरकारी अस्पताल में सुविधा बंद होने से उन्हें जेब ढीली करनी पड़ रही है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ गया है। डॉक्टरों को भी इलाज में आ रही परेशानी जांच रिपोर्ट के अभाव में चिकित्सकों को भी इलाज करने में कठिनाई हो रही है। बिना सटीक जांच के सही बीमारी का पता लगाना मुश्किल हो जाता है, जिससे इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इससे मरीजों की रिकवरी में देरी होने की आशंका भी बढ़ गई है। मरीजों ने की जल्द बहाली की मांग मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से जल्द से जल्द जांच सेवा बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में जांच सुविधा बंद रहने से सबसे ज्यादा नुकसान गरीब और जरूरतमंद लोगों को हो रहा है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में ऐसी लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है। प्रशासन ने दिया आश्वासन अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. कुमार अमित ने बताया कि मशीन खराब होने की जानकारी वरीय अधिकारियों को दे दी गई है। मशीन की मरम्मत के लिए प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि एक से दो दिनों में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है, लेकिन सूत्रों की मानें तो सोमवार से पहले मशीन के पूरी तरह चालू होने की संभावना कम है। फिलहाल जारी रहेगी परेशानी ऐसे में मरीजों की परेशानी फिलहाल जारी रह सकती है। जब तक मशीन की मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक जांच सेवा बहाल होना मुश्किल है। यह स्थिति एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करती है, जहां तकनीकी खराबी के चलते पूरी सेवा व्यवस्था ठप हो जाती है।


