Pakistan Human Rights: पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर सरदार अयाज सादिक ने 29 जुलाई, 2025 को जेनेवा में अति-राष्ट्रवाद के खिलाफ चेतावनी देते हुए अनेकतावाद और विविधता अपनाने का आह्वान किया। 14 महीने बाद, 25 सितंबर, 2026 को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने UN जनरल असेंबली के 81वें सत्र में बातचीत का रास्ता चुनने का दावा किया और सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने को भारत में इस्लामोफोबिया का सबूत बताया। शरीफ ने कूटनीति के लिए जगह बनाने में फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का शुक्रिया अदा किया। UN के मंच से चुने हुए प्रधानमंत्री का सेना प्रमुख को श्रेय देना बताता है कि पाकिस्तान में असली ताकत किसके हाथ में है।
अहमदियों पर सबसे गहरी चोट
समुदाय के रिकॉर्ड के मुताबिक 2025 में 21 मस्जिदों को अपवित्र किया गया, 381 कब्रें तोड़ी गईं और 250 अहमदियों पर धार्मिक मामलों में केस दर्ज हुए। ‘यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम’ की रिपोर्ट में फरवरी में 10 दिनों के भीतर पंजाब में तीन अहमदी मस्जिदें गिराने और अप्रैल में कराची में 400 से ज़्यादा लोगों की भीड़ द्वारा लईक चीमा की पीट-पीटकर हत्या का ज़िक्र है। जनवरी 2025 में ‘तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान’ के दबाव के बाद पुलिस ने डास्का में सर मुहम्मद जफरुल्लाह खान की देखरेख में बनी मस्जिद गिरा दी।
1,817 में से सिर्फ 37 मंदिर-गुरुद्वारे चालू
संसद को बताया गया कि 1,817 हिंदू मंदिरों और सिख गुरुद्वारों में से सिर्फ 37 चालू हालत में हैं। यह आंकड़ा 2025 के आखिर में माइनॉरिटी कॉकस के सामने रखा गया। हिंदू सांसद रमेश कुमार वंकवानी ने इसके लिए ‘इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड’ को जिम्मेदार ठहराया।
कानून की आड़ में आवाजें खामोश
HRCP ने 2025 में जबरन गायब किए जाने के 273 नए मामले दर्ज किए। 2 जनवरी 2026 को आतंकवाद-रोधी अदालत ने मोईद पीरजादा, शाहीन सहबाई और वजाहत सईद खान समेत पत्रकारों को गैर-मौजूदगी में दो-दो बार उम्रकैद सुनाई। कराची के दाऊदी बोहरा समुदाय पर 2012 और 2015 में बम हमले हुए। लगभग 14,500 बहाई, जिन्हें संविधान में गैर-मुस्लिम माना गया है, हिंसा के बजाय सामाजिक अलगाव झेलते हैं।
भारत को देखकर दिखी पाकिस्तान की बेचैनी
जुलाई 2026 में NEET पेपर लीक को लेकर युवाओं की अगुवाई वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ दिल्ली की सड़कों पर उतरी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया। इसे पाकिस्तानी कंटेंट क्रिएटर्स ने लगभग ईर्ष्या के भाव से देखा। यह प्रतिक्रिया भी पाकिस्तान की घरेलू वास्तविकताओं और उसकी अंतरराष्ट्रीय बयानबाजी के बीच के अंतर को उजागर करती है।



