मैं पौंड्रिक हवेली…उस सुबह की साक्षी हूं, जब नई राजधानी ले रही थी आकर
जयुपर। मैं जयपुर की उस सुबह की साक्षी हूं, जब सपनों की एक नई राजधानी आकार ले रही थी। जन्म के साथ ही मेरे आंगन में वैदिक मंत्रों की ध्वनि गूंजती थी और शाही रथों की आहट सुनाई देती थी। मुझे जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जय सिंह ने अपने राजकीय पुरोहित रत्नाकर भट्ट के…


