बुद्ध जयंती पर थाईलैंड, जापान, श्रीलंका से पहुंचे श्रद्धालु:गयाजी में प्रभात फेरी निकाली गई, दुनिया को शांति का संदेश; महाबोधी मंदिर तक मुफ्त बस सेवा

बुद्ध जयंती पर थाईलैंड, जापान, श्रीलंका से पहुंचे श्रद्धालु:गयाजी में प्रभात फेरी निकाली गई, दुनिया को शांति का संदेश; महाबोधी मंदिर तक मुफ्त बस सेवा

गयाजी में बुद्ध जयंती(बुद्ध पूर्णिमा) पर भव्य आयोजिन किया जा रहा है। 40 से अधिक देशों से श्रद्धालु पहुंचे हैं। महाबोधि मंदिर परिसर से सुबह में प्रभात फेरी और झांकी निकाली गई। मंत्रोच्चार और बौद्ध मठों से निकले श्रद्धालुओं ने पूरे शहर को बुद्धमय कर दिया। थाईलैंड, जापान, श्रीलंका, म्यांमार समेत कई देशों के भिक्षु और बौद्ध अनुयायी पारंपरिक वेशभूषा में सड़कों पर उतरे। हाथों में ध्वज, बुद्ध वंदना और शांति संदेश के साथ निकली शोभा यात्राओं ने बोधगया की फिजा बदल दी। महाबोधि मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण के इस त्रिस्मृति दिवस पर हर कोई खुद को इतिहास के सबसे बड़े आध्यात्मिक केंद्र से जुड़ा महसूस करता दिखा। श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त बस सेवा बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी (BTMC) ने इस बार आयोजन को सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि जनसेवा से भी जोड़ा है। जंक्शन से बोधगया तक तीन दिनों की मुफ्त बस सेवा शुरू की गई है। मंदिर परिसर के बाहर निशुल्क मेडिकल कैंप, शीतल पेयजल, चना-गुड़ और जूस की व्यवस्था की गई। भीषण गर्मी को देखते हुए बड़े जर्मन हैंगर, पंखे, कूलर और कालचक्र मैदान में ठहरने की विशेष व्यवस्था की गई है। महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से श्रद्धालुओं का जत्था पहुंच चुका है। सीएम के दौरे को लेकर सुरक्षा कड़ी संघदान कार्यक्रम और मुख्य समारोह को लेकर प्रशासनिक चौकसी बढ़ा दी गई है। करीब 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी, विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार और भारत में थाईलैंड की काउंसल जनरल सिरिपोर्न थान्यातेप के निर्धारित कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बोधगया आज सिर्फ बिहार का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का आध्यात्मिक संगम बना हुआ है। खास बात यह कि जहां दुनिया संघर्ष में उलझी है, वहां बुद्ध की धरती शांति, करुणा और सहअस्तित्व का नया अध्याय लिख रही है। बुद्ध पूर्णिमा के बहाने बोधगया से यह संदेश गूंज रहा है कि बिहार की यह पावन भूमि विश्व को राह दिखाने की ताकत रखती है। बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए बड़ा दिन बैद्ध भिक्षु आर्यपाल ने कहा कि हम सभी बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए यह दिन खास है। यह दिन विशेष इसलिए भी भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान और परिनिर्वाण तीनों इसी दिन हुए। यह एक अद्भुत संयोग है। थाईलैंड से आए बौद्ध भिक्षुओं में खास उत्साह है। बोधगया भगवान बुद्ध की भक्ति में लीन है। गयाजी में बुद्ध जयंती(बुद्ध पूर्णिमा) पर भव्य आयोजिन किया जा रहा है। 40 से अधिक देशों से श्रद्धालु पहुंचे हैं। महाबोधि मंदिर परिसर से सुबह में प्रभात फेरी और झांकी निकाली गई। मंत्रोच्चार और बौद्ध मठों से निकले श्रद्धालुओं ने पूरे शहर को बुद्धमय कर दिया। थाईलैंड, जापान, श्रीलंका, म्यांमार समेत कई देशों के भिक्षु और बौद्ध अनुयायी पारंपरिक वेशभूषा में सड़कों पर उतरे। हाथों में ध्वज, बुद्ध वंदना और शांति संदेश के साथ निकली शोभा यात्राओं ने बोधगया की फिजा बदल दी। महाबोधि मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण के इस त्रिस्मृति दिवस पर हर कोई खुद को इतिहास के सबसे बड़े आध्यात्मिक केंद्र से जुड़ा महसूस करता दिखा। श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त बस सेवा बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी (BTMC) ने इस बार आयोजन को सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि जनसेवा से भी जोड़ा है। जंक्शन से बोधगया तक तीन दिनों की मुफ्त बस सेवा शुरू की गई है। मंदिर परिसर के बाहर निशुल्क मेडिकल कैंप, शीतल पेयजल, चना-गुड़ और जूस की व्यवस्था की गई। भीषण गर्मी को देखते हुए बड़े जर्मन हैंगर, पंखे, कूलर और कालचक्र मैदान में ठहरने की विशेष व्यवस्था की गई है। महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से श्रद्धालुओं का जत्था पहुंच चुका है। सीएम के दौरे को लेकर सुरक्षा कड़ी संघदान कार्यक्रम और मुख्य समारोह को लेकर प्रशासनिक चौकसी बढ़ा दी गई है। करीब 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी, विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार और भारत में थाईलैंड की काउंसल जनरल सिरिपोर्न थान्यातेप के निर्धारित कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बोधगया आज सिर्फ बिहार का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का आध्यात्मिक संगम बना हुआ है। खास बात यह कि जहां दुनिया संघर्ष में उलझी है, वहां बुद्ध की धरती शांति, करुणा और सहअस्तित्व का नया अध्याय लिख रही है। बुद्ध पूर्णिमा के बहाने बोधगया से यह संदेश गूंज रहा है कि बिहार की यह पावन भूमि विश्व को राह दिखाने की ताकत रखती है। बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए बड़ा दिन बैद्ध भिक्षु आर्यपाल ने कहा कि हम सभी बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए यह दिन खास है। यह दिन विशेष इसलिए भी भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान और परिनिर्वाण तीनों इसी दिन हुए। यह एक अद्भुत संयोग है। थाईलैंड से आए बौद्ध भिक्षुओं में खास उत्साह है। बोधगया भगवान बुद्ध की भक्ति में लीन है।  

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