जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पिछले साल 22 अप्रैल को आतंकियों ने 25 पर्यटकों और एक स्थानीय व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पहलगाम हमले की बरसी पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आतंकी हमले में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हमारी सरकार अब पाकिस्तान को ऐसे हमले दोबारा नहीं करने देगी।
उमर अब्दुल्ला की पाकिस्तान को चेतावनी
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बताया कि पिछले साल आतंकियों ने 25 पर्यटकों और एक स्थानीय टट्टू वाले की हत्या कर दी थी। उन्होंने कहा- हम उन शहीदों को याद करते हैं। वे बेगुनाह थे, लेकिन आतंकवादियों ने उन्हें गोली मार दी। हम पक्का इरादा रखते हैं कि ऐसे हमले दोबारा न हों। चाहे केंद्र सरकार हो, जम्मू-कश्मीर सरकार हो या कानून-व्यवस्था की मशीनरी हो, हमारी कोशिश होनी चाहिए कि ऐसे हमले दोबारा न हों। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अगर पाकिस्तान ऐसे हमले करने की कोशिश भी करता है तो हम उन्हें कामयाब नहीं होने देंगे। हम पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देंगे।
पहलगाम हमले के बाद पर्यटन प्रभावित
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हमारी सरकार की कोशिश हालात को बेहतर बनाने और जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों की ज्यादा से ज्यादा आमद सुनिश्चित करने की है। उन्होंने कहा- पहलगाम हमले ने पिछले साल से पर्यटन पर असर डाला है, फिर भी हमें उम्मीद है कि पर्यटन फिर से बढ़ेगा। माता वैष्णो देवी यात्री और अमरनाथ यात्रा भी टूरिज्म को बढ़ावा देने में मदद करेंगी।
मीरवाइज उमर फारूक ने पीड़ितों को किया याद
कश्मीर के मुख्य मौलवी मीरवाइज उमर फारूक ने पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर मृतकों को श्रद्धांजलि दी। उमर फारूक ने कहा कि हम उन लोगों को बहुत दुख के साथ याद करते हैं, जिन्होंने अपनी जान गंवाई। हम उनके परिवारों के साथ खड़े हैं, जो आज भी इस दुखद घटना का दर्द सह रहे हैं। दुर्भाग्य से पहलगाम हमले में जान गंवाने वालों के परिजन हमेशा अपनों का दर्द सहते रहेंगे।
मौलवी मीरवाइज उमर फारूक ने आगे कहा कि हर साल हमारे कैलेंडर में ये तारीखें पिछले तीन दशकों में गांव कदल, जकूरा, हवाल, सोपोर, वंधामा, चिट्टीसिंहपुरा जैसी जगहों पर हुई ऐसी ही त्रासदियों के हमारे जख्मों को फिर से ताजा कर देती हैं। इसमें हजारों कीमती जानें गईं। जम्मू कश्मीर के लोगों का अहिंसा और बातचीत के जरिए सम्मान के साथ स्थायी शांति में विश्वास और इच्छा अटूट है। हम उम्मीद और दुआ करते हैं कि ऐसी भयानक घटनाएं हमेशा के लिए अतीत की बात बन जाएं।


