नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के IPO की लिस्टिंग शेयर बाजार यानी BSE पर आज, 24 सितंबर को होगी। लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में NSE का शेयर IPO प्राइस बैंड से 4.03% यानी ₹72 के प्रीमियम पर ट्रे़ड कर रहा है। इसके ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी GMP के हिसाब से देखा जाए तो शेयर की लिस्टिंग ₹1857 पर हो सकती है। IPO को ओवरऑल 5.71 गुना बोली मिली कंपनी ने इश्यू का प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर तय किया था। कंपनी इस इश्यू से करीब ₹22,562 करोड़ जुटा रही है। तीन दिन में ये IPO कुल 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन हुआ था। कुल 8.86 करोड़ शेयरों के मुकाबले निवेशकों ने 50.28 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां लगाईं। इसमें सबसे ज्यादा मांग बड़े विदेशी व घरेलू फंड्स यानी QIB की तरफ से आई और उनका कोटा 12.68 गुना भरा। वहीं अमीर निवेशकों यानी NII का हिस्सा 6.55 गुना और आम खुदरा यानी रिटेल निवेशकों का कोटा 1.39 गुना सब्सक्राइब हुआ था। अपर प्राइस बैंड पर कंपनी की कुल वैल्यूएशन ₹4.42 लाख करोड़ आंकी गई है। NSE का यह इनिशियल पब्लिक ऑफर 17 सितंबर से 21 सितंबर तक ओपन हुआ था। इसके बाद शेयर का अलॉटमेंट 22 सितंबर और डीमैट अकाउंट में शेयर क्रेडिट 23 सितंबर को हुआ। रिटेल इनवेस्टर्स मिनिमम और मैक्सिमम कितना पैसा लगा सकते थे? इस IPO के लिए रिटेल निवेशक मिनिमम एक लॉट यानी 8 शेयर्स के लिए अप्लाई कर सकते थे। यदि IPO के अपर प्राइज बैंड ₹1785 के हिसाब से 1 लॉट के लिए अप्लाय किया था, तो आपका ₹14,280 इन्वेस्टमेंट हुआ होगा। वहीं रिटेल इनवेस्टर्स IPO के मैक्सिमम 14 लॉट यानी 112 शेयर्स के लिए बिडिंग कर सकते थे। जिसके लिए इनवेस्टर्स को मैक्सिमम ₹1,99,920 का इन्वेस्टमेंट करना था। अब निवेशकों को अपने इन्वेस्टमेंट पर GMP के हिसाब से 4% तक का रिटर्न मिल सकता है। कंपनी के इश्यू का 35.35% हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व था कंपनी के इश्यू का करीब 50% हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए रिजर्व रखा गया था। इसके अलावा करीब 35% हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स और लगभग 15% हिस्सा नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) के लिए रिजर्व था। IPO पूरी तरह OFS, 12.64 करोड़ शेयर्स बेचे गए कंपनी के रेड हरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) के अनुसार, आईपीओ के तहत बेचे जाने वाले शेयरों की संख्या को 14.89 करोड़ से घटाकर 12.64 करोड़ कर दी गई थी। यह ऑफर पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) था, यानी इसके तहत कोई भी नया शेयर जारी नहीं किया गया। यह बिक्री कंपनी की कुल इक्विटी कैपिटल का लगभग 5.1% हिस्सा है, जिसे पहले 6% बेचने का प्रस्ताव था। सेबी ने 4 सितंबर को कंपनी के DRHP को मंजूरी दी थी नेट प्रोसीड्स यानी टैक्स व खर्चों के बाद बची रकम पूरी तरह से शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगी। इस IPO का मुख्य उद्देश्य केवल लिस्टिंग और OFS को आसान बनाना है। कंपनी के जून 2026 में फाइल किए गए ड्राफ्ट रेड हरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के मुकाबले इश्यू साइज को करीब 15% घटाया है। मार्केट रेगुलेटर सेबी ने 4 सितंबर 2026 को इस DRHP को मंजूरी दी थी। इश्यू में SBI सबसे बड़ा सेलिंग शेयरहोल्डर रहा MUFG इंटाइम इंडिया इश्यू का रजिस्ट्रार इस मेगा आईपीओ को संभालने के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल, जेएम फाइनेंशियल, मॉर्गन स्टेनली, सिटीग्रुप, एसबीआई कैपिटल और एचडीएफसी बैंक समेत कुल 20 मर्चेंट बैंकरों को नियुक्त किया गया। MUFG इंटाइम इंडिया इश्यू का रजिस्ट्रार है। वित्तीय प्रदर्शन: FY26 में NSE का मुनाफा 15.5% घटा क्या होता है ऑफर फॉर सेल (OFS)? IPO में ऑफर फॉर सेल का मतलब होता है कि कंपनी खुद नए शेयर जारी करके बाजार से नया फंड नहीं जुटा रही है, बल्कि कंपनी के पुराने या मौजूदा निवेशक जैसे- प्रमोटर्स या बड़े बैंक अपनी हिस्सेदारी का कुछ भाग आम जनता को बेच रहे हैं। इससे मिलने वाला सारा पैसा कंपनी के खाते में न जाकर सीधे उन शेयरधारकों के पास जाता है जो अपने शेयर बेच रहे होते हैं।
NSE के IPO की आज लिस्टिंग होगी:ग्रे मार्केट के हिसाब से ₹1857 पर हो सकता है लिस्ट, निवेशकों को 4% रिटर्न मिलने की संभावना

