Nirmala Sitharaman ने EU और दक्षिण कोरियाई समकक्षों संग द्विपक्षीय व्यापार पर की बात

Nirmala Sitharaman ने EU और दक्षिण कोरियाई समकक्षों संग द्विपक्षीय व्यापार पर की बात

सागर कुलकर्णी

वॉशिंगटन, दो सितंबर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूरोपीय आर्थिक आयुक्त वाल्दिस डोम्ब्रोव्स्किस से मुलाकात की और भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) आर्थिक एवं वित्तीय साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की।
सीतारमण ने मंगलवार को एशविल में जी20 सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नर (एफएमसीबीजी) की बैठक से इतर डोम्ब्रोव्स्किस से मुलाकात की।
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, ‘‘दोनों पक्षों ने भारत-ईयू व्यापक आर्थिक संवाद और व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) के माध्यम से भारत-ईयू आर्थिक तथा वित्तीय साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की।’’
सीतारमण और डोम्ब्रोव्स्किस ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और निवेश संरक्षण समझौते को लेकर जारी वार्ता पर भी चर्चा की तथा इन प्रयासों को आगे बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता जताई।
दोनों पक्षों ने महत्वपूर्ण कच्चे माल और प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग सहित मजबूत और विविध आपूर्ति श्रृंखलाएं तैयार करने पर विचार साझा किए।
सीतारमण ने कहा कि केवल महत्वपूर्ण खनिजों की खरीद पर ही ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए, बल्कि उनके प्रसंस्करण और देश में उत्पादन बढ़ाने की क्षमता भी विकसित की जानी चाहिए।
दोनों नेताओं ने वित्तीय प्रौद्योगिकी, कृत्रिम मेधा (एआई) और ‘जनरेटिव एआई’ के क्षेत्र में अधिक सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर भी जोर दिया। इसमें भारतीय और यूरोपीय स्टार्टअप के बीच अधिक संपर्क को बढ़ावा देना शामिल है।
वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने भारत-ईयू साझेदारी को और मजबूत करने तथा साझा प्राथमिकताओं पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
सीतारमण ने सोमवार को एशविल में दक्षिण कोरिया के उप प्रधानमंत्री कू यून-चियोल से भी मुलाकात की।
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत दक्षिण कोरिया को एक बेहद महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार मानता है और दोनों देशों के संबंधों से कई क्षेत्रों में पारस्परिक लाभ हुआ है।
दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग मजबूत करने पर चर्चा की। इसमें भारत-कोरिया वित्त मंत्रियों की बैठक को आगे बढ़ाने के लिए जल्द ही कार्यस्तर पर बातचीत शुरू करना भी शामिल है।
सीतारमण ने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच 2015 से विशेष रणनीतिक साझेदारी है। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2026 में राष्ट्रपति ली की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान घोषित 2026-2030 के लिए संयुक्त रणनीतिक दृष्टिकोण से इस संबंध को इस साल और मजबूती मिली है।
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत महत्वपूर्ण खनिजों तथा मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं जैसे उभरते एवं रणनीतिक क्षेत्रों सहित भारत-कोरिया सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों की जनता और उद्योगों के पारस्परिक लाभ के लिए इस साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता बनी हुई है।
सीतारमण ने उभरते क्षेत्रों में दक्षिण कोरिया से अधिक निवेश का स्वागत किया और कहा कि भारतीय कंपनियां भी दोनों देशों के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी निवेश प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए दक्षिण कोरिया में निवेश के अवसरों की तलाश करेंगी।
वित्त मंत्री ने राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) के जरिये निवेश सहयोग को मजबूत करने और भारत में बुनियादी ढांचे तथा हरित बदलाव से जुड़े निवेश के लिए कोरिया के आर्थिक विकास सहयोग कोष (ईडीसीएफ) के तहत प्रस्तावित रियायती ऋण सुविधा को आगे बढ़ाने का भी सुझाव दिया।
दोनों मंत्रियों ने भारत और दक्षिण कोरिया की क्यूआर-आधारित भुगतान प्रणालियों को एक-दूसरे के अनुकूल बनाने के लिए जारी प्रयासों पर भी चर्चा की। इससे दोनों देशों के बीच भुगतान में आसानी बढ़ेगी और आर्थिक तथा लोगों के बीच संपर्क मजबूत होंगे।
दक्षिण कोरिया के मंत्री ने भारत की वृद्धि क्षमता और भारतीय अर्थव्यवस्था के विशाल आकार का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों को द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करना चाहिए। इससे दोनों पक्षों के बीच व्यापार एवं निवेश को और बढ़ावा मिलेगा।

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