सीमांचल और उत्तर-पूर्व भारत की कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलने जा रही है। मंत्री नितिन गडकरी ने पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में NH-327 के गलगलिया-पानीटंकी-खड़ीबाड़ी-बागडोगरा खंड को चार लेन में विकसित करने के लिए ₹2,077.18 करोड़ की प्रशासनिक मंजूरी प्रदान की है। 31.02 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी परियोजना से बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों, खासकर किशनगंज और अररिया जिले के लोगों को बड़ा लाभ मिलेगा। परियोजना के तहत सड़क को आधुनिक और सुरक्षित स्वरूप दिया जाएगा। इसमें 5 हाथी अंडरपास, 3 बड़े पुल, 1 रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) तथा दोनों ओर सर्विस रोड का निर्माण किया जाएगा। हाथी अंडरपास वन्यजीवों, विशेषकर हाथियों के सुरक्षित आवागमन को ध्यान में रखकर बनाए जाएंगे। यह परियोजना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि बिहार में अररिया से गलगलिया तक फोरलेन सड़क बनने के बाद इस मार्ग पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ा है। फोरलेन निर्माण के बाद जाम से मिलेगा छुटकारा वर्तमान में गलगलिया के बाद बंगाल सीमा में सड़क दो लेन होने के कारण पानीटंकी और खड़ीबाड़ी क्षेत्र में अक्सर जाम की स्थिति बनती है। फोरलेन निर्माण के बाद यह बाधा समाप्त होगी और सिलीगुड़ी व बागडोगरा तक यातायात सुगम हो जाएगा। सामरिक दृष्टि से भी यह परियोजना बेहद अहम है। नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के निकट स्थित सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) में आधारभूत संरचना मजबूत होने से सेना, व्यापारिक वाहनों और आम यात्रियों की आवाजाही अधिक सुरक्षित और तेज होगी। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। 7 अगस्त 2026 को भारत के राजपत्र में एनएच-327 के किलोमीटर 0 से 31.462 तक के हिस्से के लिए भूमि अधिग्रहण संबंधी अधिसूचना जारी की गई है, जिसमें नक्सलबाड़ी, फांसीदेवा और खड़ीबाड़ी क्षेत्र के कई गांव शामिल हैं। सीमांचल और उत्तर-पूर्व भारत की कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलने जा रही है। मंत्री नितिन गडकरी ने पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में NH-327 के गलगलिया-पानीटंकी-खड़ीबाड़ी-बागडोगरा खंड को चार लेन में विकसित करने के लिए ₹2,077.18 करोड़ की प्रशासनिक मंजूरी प्रदान की है। 31.02 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी परियोजना से बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों, खासकर किशनगंज और अररिया जिले के लोगों को बड़ा लाभ मिलेगा। परियोजना के तहत सड़क को आधुनिक और सुरक्षित स्वरूप दिया जाएगा। इसमें 5 हाथी अंडरपास, 3 बड़े पुल, 1 रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) तथा दोनों ओर सर्विस रोड का निर्माण किया जाएगा। हाथी अंडरपास वन्यजीवों, विशेषकर हाथियों के सुरक्षित आवागमन को ध्यान में रखकर बनाए जाएंगे। यह परियोजना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि बिहार में अररिया से गलगलिया तक फोरलेन सड़क बनने के बाद इस मार्ग पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ा है। फोरलेन निर्माण के बाद जाम से मिलेगा छुटकारा वर्तमान में गलगलिया के बाद बंगाल सीमा में सड़क दो लेन होने के कारण पानीटंकी और खड़ीबाड़ी क्षेत्र में अक्सर जाम की स्थिति बनती है। फोरलेन निर्माण के बाद यह बाधा समाप्त होगी और सिलीगुड़ी व बागडोगरा तक यातायात सुगम हो जाएगा। सामरिक दृष्टि से भी यह परियोजना बेहद अहम है। नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के निकट स्थित सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) में आधारभूत संरचना मजबूत होने से सेना, व्यापारिक वाहनों और आम यात्रियों की आवाजाही अधिक सुरक्षित और तेज होगी। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। 7 अगस्त 2026 को भारत के राजपत्र में एनएच-327 के किलोमीटर 0 से 31.462 तक के हिस्से के लिए भूमि अधिग्रहण संबंधी अधिसूचना जारी की गई है, जिसमें नक्सलबाड़ी, फांसीदेवा और खड़ीबाड़ी क्षेत्र के कई गांव शामिल हैं।

