झुंझुनूं में पार्षद के लिए एक नाम के कई दावेदार:सूरजगढ़ के एक वार्ड में तीन-तीन राकेश, वोटर्स को चुनाव चिह्न भी रखना होगा याद

झुंझुनूं में पार्षद के लिए एक नाम के कई दावेदार:सूरजगढ़ के एक वार्ड में तीन-तीन राकेश, वोटर्स को चुनाव चिह्न भी रखना होगा याद

झुंझुनूं जिले के निकाय चुनाव में कई वार्डों में एक जैसे नाम वाले प्रत्याशी आमने-सामने हैं। कहीं दो संजय, दो सोनिया और दो सुरेश चुनाव मैदान में हैं, तो सूरजगढ़ के एक वार्ड में तीन राकेश निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मुकाबला कर रहे हैं। नामांकन वापसी के बाद सामने आई अंतिम सूची के बाद इन वार्डों में मतदान के दौरान मतदाताओं को नाम के साथ प्रत्याशी के चुनाव चिह्न और पहचान पर भी ध्यान देना होगा। साथ ही प्रत्याशियों का समीकरण बिगड़ने की भी संभावना रहेगी। वार्ड 51 में ‘संजय बनाम संजय’ झुंझुनूं नगर परिषद के वार्ड संख्या 51 में मुकाबला दो संजय के बीच है। भाजपा ने यहां संजय पारीक को प्रत्याशी बनाया है, जबकि संजय कुमार सहल निर्दलीय मैदान में हैं। दोनों का नाम संजय होने से मतदान के समय मतदाताओं को प्रत्याशी की पहचान को लेकर सावधानी बरतनी होगी। सुल्ताना में ‘सोनिया बनाम सोनिया’ सुल्ताना नगरपालिका के वार्ड संख्या 5 में भी दिलचस्प मुकाबला है। यहां कांग्रेस की सोनिया और एक सोनिया निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रही हैं। एक ही नाम होने के कारण प्रचार के दौरान दोनों प्रत्याशी अपनी अलग पहचान मतदाताओं तक पहुंचाने में जुटी हैं। वार्ड 23 में दो सुरेश आमने-सामने सुल्ताना नगरपालिका के वार्ड संख्या 23 में भी दो सुरेश चुनाव मैदान में हैं। एक सुरेश कुमार कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार हैं, जबकि दूसरे सुरेश निर्दलीय प्रत्याशी हैं। यहां भी नाम की समानता मतदान के दौरान मतदाताओं के लिए भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती है। सूरजगढ़ में सबसे अनोखा मुकाबला, एक वार्ड में तीन राकेश सूरजगढ़ नगरपालिका में चुनाव का सबसे अनोखा मुकाबला देखने को मिल रहा है। यहां एक ही वार्ड में राकेश कुमार, राकेश सैनी और राकेश वर्मा चुनाव लड़ रहे हैं। खास बात यह है कि तीनों ही निर्दलीय प्रत्याशी हैं। ऐसे में मतदाताओं के लिए केवल नाम के आधार पर प्रत्याशी की पहचान करना आसान नहीं होगा। यहां चुनाव चिह्न ही प्रत्याशियों की सबसे बड़ी पहचान बनेगा। चुनाव चिह्न बनेगा सबसे बड़ी पहचान एक जैसे नाम वाले प्रत्याशियों के कारण इस बार चुनाव प्रचार में भी चुनाव चिह्न की अहमियत बढ़ गई है। प्रत्याशी अपने पोस्टर, पंपलेट और जनसंपर्क के दौरान नाम के साथ चुनाव चिह्न को प्रमुखता से प्रचारित कर रहे हैं, ताकि मतदाता भ्रमित न हों। मतदान के दिन भी मतदाताओं को प्रत्याशी का नाम, चुनाव चिह्न और उसकी पार्टी या निर्दलीय पहचान का मिलान करने के बाद ही वोट देना होगा।

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