यूपी कैबिनेट की बैठक में 29 प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। इन प्रस्तावों में किसानों और कर्मचारियों के लिए अहम प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कैबिनेट बैठक में ट्रांसफर पॉलिसी पर मुहर लग गई है। सुरेश कुमार खन्ना के मुताबिक, यह स्थानान्तरण नीति केवल वर्ष 2026-27 के लिए है।
कर्मचारियों के लिए सरकार का बड़ा फैसला
संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि पॉलिसी के तहत कर्मचारियों का ट्रांसफर 31 मई 2026 तक किया जाएगा। समूह ‘क’ एवं समूह ‘ख’ के अधिकारी, जो अपने सेवाकाल में संबंधित जनपद में कुल 3 वर्ष पूर्ण कर चुके हैं। उन्हें दूसरे जिलों में ट्रांसफर किया जाएगा। इसके अलावा ‘क’ एवं समूह ‘ख’ के जो अधिकारी अपने सेवाकाल में एक मण्डल में 7 वर्ष पूरे कर चुके हों, उन्हें दूसरे मण्डल में ट्रांसफर किया जाएगा। सुरेश खन्ना ने स्पष्ट किया कि विभागाध्यक्ष/ मण्डलीय कार्यालयों में की गई तैनाती अवधि को स्थानान्तरण के लिए निर्धारित अवधि में नहीं गिना जाएगा।
क्या हैं ट्रांसफर पॉलिसी के नियम?
ट्रांसफर पॉलिसी के तहत मण्डलीय कार्यालयों में तैनाती की अधिकतम अवधि 03 वर्ष होगी तथा इसके लिए सर्वाधिक समय से कार्यरत अधिकारियों के स्थानान्तरण प्राथमिकता के आधार किए जाने की व्यवस्था की गई है। समूह ‘क’ एवं ‘ख’ के स्थानान्तरण संवर्गवार कार्यरत अधिकारियों की संख्या के अधिकतम 20 प्रतिशत एवं समूह ‘ग’ एवं समूह ‘घ’ के कार्मिकों के स्थानान्तरण संवर्गवार कुल कार्यरत कार्मिकों की संख्या के अधिकतम 10 प्रतिशत की सीमा तक किए जा सकेंगे।
समूह ‘ग’ और ‘ख’ के लिए नियम
समूह ‘ग’ के लिए पटल परिवर्तन/क्षेत्र परिवर्तन का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किये जाने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा समूह ‘ख’ एवं समूह ‘ग’ के कार्मिकों के स्थानान्तरण यथा संभव मेरिट बेस्ड आनलाइन ट्रांसफर सिस्टम के आधार पर किए जाने की व्यवस्था की गई है। मंदित बच्चों, चलन क्रिया से पूर्णतया प्रभावित दिव्यांग बच्चों के माता-पिता की तैनाती विकल्प प्राप्त करके ऐसे स्थान पर किए जाने की व्यवस्था की गई है, जहां उसकी उचित देखभालव चिकित्सा की समुचित व्यवस्था हो। भारत सरकार द्वारा घोषित प्रदेश के 8 जनपद व 34 जनपदों के 100 आकांक्षी विकास खण्डों में तैनाती संतृप्तीकरण किए जाने की व्यवस्था की गई है। स्थानान्तरण सत्र के पश्चात अब समूह ‘क’ के साथ ही साथ समूह ‘ख’ के संबंध में विभागीय मंत्री के माध्यम से मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त कर किए जा सकेंगे।
किसानों के लिए पॉलिसी
मंत्री ए.के. शर्मा ने बताया कि ऊर्जा मंत्रालय के 3 प्रस्ताव पास हुए हैं। इसके तहत हाईटेंशन लाइनों के बड़े-बड़े टॉवर से किसानों की भूमि प्रभावित होती है, उसके मुआवजे के लिए नई नीति बनाई गई है। पहले कोई मुआवजा नहीं मिलता था। साल 2018 में पहली बार यह नीति बनाई गई थी। जो टावर होते हैं, उनके नीचे की पूरी जमीन और उसके एक मीटर की जमीन का दोगुना मुआवजा दिया जाएगा, जबकि तार खींचने की जगह का 30 प्रतिशत मुआवजा दिया जाएगा।
जालौन में सोलर प्लांट लगाया जाएगा
मंत्री ए.के. शर्मा ने बताया कि दूसरा प्रस्ताव रिवीनिवेबल एनर्जी के लिए है। इसके तहत जालौन में 500 मेगा वाट का सोलर प्लांट लगाया जाएगा। UP उत्पादन लिमिटेड और कोल इंडिया मिलकर इसको विकसित करेंगे. 49 प्रतिशत राज्य का और 51 प्रतिशत कॉल इंडिया का है। इसकी शुरुआती लगात 10 करोड़ होगी। तीसरे प्रस्ताव के तहत, जिन क्षेत्रों में नए उद्योग लग रहे हैं, वहां बिजली वितरण की बेहतर व्यवस्था की जाएगी। 400/220 का नया पॉवर स्टेशन बनाया जाएगा, जिसमें 653 करोड़ की लागत आएगी।


