एमपी में नया कानून, अब गांवों में भी बनेंगी कॉलोनियां:गरीबों के लिए रिजर्व होंगे 15% मकान,अवैध कॉलोनी बनी तो अफसर को 3 महीने की सजा

एमपी में नया कानून, अब गांवों में भी बनेंगी कॉलोनियां:गरीबों के लिए रिजर्व होंगे 15% मकान,अवैध कॉलोनी बनी तो अफसर को 3 महीने की सजा

शहरों की बढ़ती आबादी और संसाधनों पर दबाव को देखते हुए सरकार ने शहरों से सटे गांवों में कॉलोनियां बनाने की मंजूरी देने का फैसला किया है। सरकार जल्द मप्र कॉलोनी एक्ट 2026 लाएगी। इसका ड्राफ्ट तैयार है। नियम बन चुके हैं। इसे कैबिनेट में पेश किया जाएगा। प्रस्तावित एक्ट के मुताबिक कॉलोनाइजर्स का रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा। अवैध कॉलोनी बनाने पर 10 साल की सजा और 1 करोड़ तक जुर्माना होगा। लापरवाही बरतने वाले अफसर को 3 महीने की सजा होगी। निम्न वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 15% मकान या जमीन आरक्षित करना जरूरी होगा। 2021 से पहले बनी अवैध कॉलोनियां नियमित की जाएंगी। ऐसी कॉलोनियां करीब 7 हजार हैं। सरकार का दावा है कि इससे बुनियादी सुविधाएं बेहतर होंगी और रियल एस्टेट में पारदर्शिता आएगी। नए कानून के कौन से प्रावधान हैं.. पढ़िए रिपोर्ट 4 पॉइंट्स में जानिए नए कानून की जरूरत 1. शहरी और ग्रामीण इलाकों में अलग-अलग नियम
शहर में कॉलोनी डेवलप करने के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग अनुमति, रेरा पंजीयन और अन्य विभागों की एनओसी जरूरी होती है। गांवों में सिर्फ जमीन बंटवारा और रजिस्ट्री के आधार पर प्लानिंग हो जाती है। 2. अव्यवस्थित विकास
मध्य प्रदेश नगर पालिका (कालोनी विकास) नियम 2021 के मुताबिक कॉलोनी में भू-उपयोग, सड़क, सीवरेज, पानी, पार्क और EWS आवास के लिए जगह जरूरी है। ग्रामीण इलाकों में ये नियम लागू नहीं होता, इसलिए यहां संकरी सड़कें, जलभराव और बुनियादी सुविधाओं की कमी वाली कॉलोनियां डेवलप हो रही हैं। 3. मेट्रोपॉलिटन रीजन को मंजूरी
सरकार ने मेट्रोपॉलिटन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट 2025 को मंजूरी दी है। 5 शहरों में मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलप होंगे। पहले चरण में इंदौर-भोपाल शामिल होंगे। भोपाल रीजन में 9600 वर्ग किमी और इंदौर में करीब 10 हजार वर्ग किमी क्षेत्र शामिल होगा। 4. अवैध कॉलोनियों का निर्माण
जमीन महंगी होने से ग्रामीण इलाकों में अवैध कॉलोनियां डेवलप हो रही हैं। सरकार इनके खिलाफ ठोस कदम नहीं उठा पा रही है। यहां लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। 7 पॉइंट्स में समझिए नए एक्ट के प्रावधान 1. पूरे प्रदेश में लागू, कुछ क्षेत्रों को छूट
एक्ट पूरे मध्य प्रदेश में लागू होगा। इसमें नगर निगम, नगर पालिका, नगर परिषद और चिन्हित ग्राम पंचायत क्षेत्र शामिल होंगे। कैंटोनमेंट क्षेत्र, केंद्र सरकार की भूमि और विशेष निवेश क्षेत्र इससे बाहर रहेंगे। 2. कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रेशन जरूरी
नए कानून में बिना रजिस्ट्रेशन कोई व्यक्ति या संस्था कॉलोनी डेवलप नहीं कर सकेंगे। कॉलोनाइजर को राज्य या जिला स्तर पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। जिले में कलेक्टर और राज्य स्तर पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त अथॉरिटी होंगे। रजिस्ट्रेशन 5 साल के लिए वैलिड होगा और बाद में रिन्यू कराया जा सकेगा। 3. कॉलोनी विकास के लिए अनुमति जरूरी
जमीन खुद की हो या दूसरे की, विकास के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति जरूरी होगी। विकास कार्य शुरू करने से कम से कम 60 दिन पहले आवेदन करना होगा। प्राधिकारी को 60 दिन में निर्णय करना होगा। समय सीमा में फैसला नहीं होने पर सूचना के 15 दिन बाद अनुमति मानी जाएगी। 500 वर्ग मीटर तक क्षेत्र या 8 अपार्टमेंट तक अनुमति जरूरी नहीं होगी। जमीन पर कलेक्टर गाइडलाइन का 0.5% शुल्क देना होगा। 4. कॉलोनी में पाथ-वे का निर्माण जरूरी
कॉलोनाइजर को सड़क, पार्क, खेल मैदान, बिजली, पानी, सीवेज और ड्रेनेज जैसी सुविधाएं देनी होंगी। पाथ-वे बनाना जरूरी होगा। आंतरिक विकास की गारंटी के लिए भूखंड, अपार्टमेंट या बैंक गारंटी गिरवी रखनी होगी। 5. निम्न आय वर्ग और गरीबों को सस्ते मकान
नए कानून में LIG और EWS वर्ग के लिए सस्ते मकान के नियम हैं। हर कॉलोनी में 15% क्षेत्र आरक्षित होगा। भूखंड या अपार्टमेंट का अनुपात 3:2 रहेगा। इन्हें कलेक्टर द्वार तय बाजार मूल्य के 90% से अधिक पर नहीं बेचा जा सकेगा। खरीदार 15 साल तक इन्हें बेच या ट्रांसफर नहीं कर सकेगा। 6. अवैध कॉलोनी बनाने पर 10 साल की सजा
कॉलोनाइजर को शर्तें तोड़ने पर 3 से 7 साल की जेल और 10 से 50 लाख रुपए जुर्माना हो सकता है। बिना अनुमति कॉलोनी बनाने पर 7 से 10 साल की जेल और 50 लाख से 1 करोड़ जुर्माना होगा। अवैध कॉलोनी पर एक्शन न लेने और लापरवाही करने वाले अधिकारी को 3 महीने की जेल हो सकती है। विकास कार्य पूरा न करने पर कॉलोनाइजर ब्लैकलिस्ट होगा। दोषियों की संपत्ति और बैंक खाते कुर्क कर लागत वसूली जाएगी। 7. अनाधिकृत कॉलोनियों का प्रबंधन और सुधार
सरकार पुरानी अनधिकृत कॉलोनियों को चिन्हित कर उनका प्रबंधन अपने हाथ में ले सकती है, ताकि बुनियादी सुविधाएं दी जा सकें। इन कॉलोनियों में ढांचे के लिए निवासियों से विकास शुल्क लिया जा सकता है, EWS और LIG को छूट मिल सकती है। ले-आउट पास होने के बाद भूखंड धारक वैध स्वामी माने जाएंगे और निर्माण की अनुमति ले सकेंगे।

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