Nepal Flood: नेपाल को विकराल बाढ़ से बचाने के लिए आगे आया चीन, 3 लाख क्यूबिक मीटर पानी को रोकने के लिए उठाया बड़ा कदम

Nepal Flood: नेपाल को विकराल बाढ़ से बचाने के लिए आगे आया चीन, 3 लाख क्यूबिक मीटर पानी को रोकने के लिए उठाया बड़ा कदम

चीन और नेपाल की सीमा पर भयानक बाढ़ ने सैकड़ों जानें ले लीं हैं। अब उसी इलाके में ग्लेशियर की वजह से झील फटने का खतरा मंडरा रहा है। इससे और ज्यादा बाढ़ आने का डर है।

अब विकराल बाढ़ से नेपाल और तिब्बत को बचाने के लिए चीन आगे आ गया है। चीन की तरफ से पानी को रोकने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य प्रसारक सीसीटीवी के मुताबिक, चीन में एक आठ सदस्यीय इंजीनियरों की टीम हवाई सर्वे और थ्रीडी मॉडलिंग कर रही है।

कैसे पानी को रोकेगा चीन?

चीन के इंजीनियर चेन हानशियाओ ने बताया कि बाढ़ तक पहुंच आसान नहीं है। ग्लेशियर गिरने के बाद कई खड़ी चट्टानें और ढलान बन गए हैं। झील का पानी निकालने के लिए निचले हिस्से में नाली खोदने की योजना है। लेकिन पानी कितनी तेजी से भरेगा और कितना बहेगा, इसके हिसाब से नाली की चौड़ाई और गहराई तय करनी होगी।

सर्वे से क्या पता चला?

सर्वे से पता चला कि झील करीब 150 मीटर लंबी और 40 से 50 मीटर गहरी है। इसमें 15 से 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका है। अगले तीन दिनों में और 30 लाख घन मीटर पानी आने का अनुमान है। यह करीब 1200 ओलंपिक स्विमिंग पूल जितना पानी है।

सबसे ज्यादा पानी का बहाव एक सितंबर के आसपास होने की आशंका है। बारिश हल्की से मध्यम चल रही है और अगले एक हफ्ते तक जारी रहने का पूर्वानुमान है। इससे आसपास की मिट्टी और चट्टानें और कमजोर हो रही हैं।

नेपाल-चीन दोनों जगह चेतावनी

नेपाल और चीन दोनों ने गुरुवार को चेतावनी दी थी कि सीमा के दोनों तरफ बनी झीलें खतरा बन सकती हैं। चीनी बचाव टीम के हवाई फुटेज में भूरा पानी पेड़-पौधों को डुबाते और मलबे की दीवार से टकराते दिखा। पानी का कोई निकास नहीं दिख रहा था।

आपदा को रोकने के लिए क्या कर रही चीन की टीम?

ग्यिरोंग बॉर्डर पोर्ट इलाका पहले ही बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है। वहां अब और नुकसान का डर है। टीम अब झील की निगरानी, तलछट का डाटा और मौसम पर नजर रखने का काम करेगी। दोनों देशों के अधिकारी लगातार संपर्क में हैं ताकि कोई बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके।

पहाड़ी इलाकों में ऐसी बाधित झीलें अक्सर ग्लेशियर या भूस्खलन से बनती हैं। पानी का दबाव बढ़ने पर वे अचानक फट जाती हैं और नीचे के गांवों को बहा ले जाती हैं। इस बार पहले से चल रही तबाही के बीच यह नया संकट आया है।

स्थानीय लोग और पर्यटक दोनों प्रभावित हैं। बचाव कार्य जारी है लेकिन मौसम और पहाड़ी रास्ते मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। अभी स्थिति नियंत्रण में लाने की कोशिशें तेज हैं। अगर नाली सफलतापूर्वक बन गई तो खतरा कम हो सकता है। वरना और जान-माल का नुकसान संभव है। सीमा क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

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