Nepal Tourism Sector: भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने न सिर्फ लोगों की जान ली है, बल्कि नेपाल की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा झटका दिया है। संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री खड़क राज पौडेल के मुताबिक, शुरुआती अनुमान में नेपाल के पर्यटन क्षेत्र को करीब 5 हजार करोड़ नेपाली रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। यह नुकसान सिर्फ रुपयों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नेपाल के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े 142 होटल, 57 रेस्टोरेंट और 141 वाहनों को भी हुआ है। इसके अलावा धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को भी नुकसान पहुंचा है। नेपाल पुलिस के मुताबिक, बाढ़ में मरने वालों का आंकड़ा लागातर बढ़ रहा है। बाढ़ से मरने वालों की संख्या अब तक 1,127 हो गई है। जबकि 3,916 लोग अभी भी लापता है।
कई प्रमुख ट्रेकिंग रूट हुए तबाह
मंत्री ने बताया कि बाढ़ से लांगटांग, गोसाइंकुंड, पर्वतीकुंड और नाथली जैसे ट्रेकिंग रूट भी तबाह हो गए। इन रास्तों के नष्ट होने के बाद अब पर्यटकों के लिए वैकल्पिक ट्रेकिंग रूट तलाशने की जरूरत है। सरकार इस दिशा में काम करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए नेपाल सरकार बाढ़ से प्रभावित कुछ इलाकों को ‘क्लाइमेट हेरिटेज’ साइट के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है। इसके तहत आपदा और उसके प्रभाव को दर्ज करने के लिए संग्रहालय, पार्क, स्मारक और दूसरी संरचनाएं बनाने के लिए कई संगठनों के साथ चर्चा कर रही है।
जलवायु बदलाव से नेपाल पर बड़ा असर
मंत्री पौडेल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियर पिघलने की समस्या पैदा करने में नेपाल का योगदान बहुत कम है, लेकिन इसका गंभीर असर देश को झेलना पड़ रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से नेपाल को आर्थिक मदद और आधुनिक तकनीक देने की अपील की। विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर झील फटने से आने वाली बाढ़ और अन्य खतरों के लिए अर्ली-वार्निंग सिस्टम प्रदान करने का आग्रह किया।
रेस्क्यू में एयरलाइंस और होटल कारोबारियों का योगदान
मंत्री ने बचाव और राहत अभियान में नेपाली एयरलाइंस और हेलीकॉप्टर संचालकों के योगदान की सराहना की। होटल कारोबारियों को भी धन्यवाद दिया गया, जिन्होंने पोखरा, चितवन, काठमांडू और दूसरे इलाकों में बाढ़ प्रभावित लोगों को मुफ्त रहने और खाने की सुविधा दी। सरकार ने प्रभावित पर्यटकों और उनके परिवारों की मदद के लिए त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे समेत प्रमुख जगहों पर हेल्प डेस्क शुरू करने का फैसला किया है।




Location: Nepal, particularly Rasuwa District and portions of the Bhote Koshi and Trishuli river corridors