‘NDA सरकार जातिगत जनगणना पर कुंडली मारकर बैठी’:कांग्रेस नेता बोले- नरेंद्र मोदी ने ओबीसी-ईबीसी वर्ग की हिस्सेदारी को रोकने का कुचक्र रचा

‘NDA सरकार जातिगत जनगणना पर कुंडली मारकर बैठी’:कांग्रेस नेता बोले- नरेंद्र मोदी ने ओबीसी-ईबीसी वर्ग की हिस्सेदारी को रोकने का कुचक्र रचा

केंद्र की एनडीए सरकार जातिगत जनगणना पर कुंडली मारकर बैठी है। जातिगत जनगणना में जान बूझकर अड़ंगा डालकर ओबीसी वर्ग की वास्तविक भागीदारी सामने नहीं आने देना चाहती इसीलिए प्रश्नावली में त्रुटी कर जातिगत जनगणना के वास्तविक लक्ष्यों को भटकाने का प्रयास कर रही है। ओबीसी और इबीसी वर्गों के वाजिब हकों के लिए एनडीए सरकार गंभीर नहीं है। देश में जातिगत जनगणना पर पीएम नरेंद्र मोदी ने ओबीसी ईबीसी वर्ग की भागीदारी के अनुरूप हिस्सेदारी को रोकने का कुचक्र रचा है, जिसे कांग्रेस पार्टी ने संसद में उजागर करने का काम किया है। ये बातें बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के मुख्यालय सदाकत आश्रम में AICC के गोवा, दमन दीव और दादर नगर हवेली के प्रभारी और महाराष्ट्र के पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व गृह मंत्री रहें माणिकराव ठाकरे ने कही। ओबीसी-ईबीसी वर्ग की हिस्सेदारी को रोकने का कुचक्र रचा AICC के वरिष्ठ नेता माणिकराव ठाकरे ने कहा कि केंद्र की एनडीए सरकार लगातार जातिगत जनगणना की खिलाफत करते आएं हैं। बिहार में जब हमारी महागठबंधन की सरकार थी तो नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राज्य की अपनी ही सरकार पर दबाव देकर पिछड़ों को उनकी संख्या के आधार पर भागीदारी के लिए जातिगत जनगणना पर जोर दिया और बिहार में जातिगत जनगणना की शुरुआत हुई।
पिछड़ों के लिए इस सरकार में कोई हमदर्दी नहीं बिहार में महागठबंधन की तत्कालीन सरकार ने आरक्षण के दायरे को 65% तक बढ़ाने के लिए प्रयास किया, लेकिन केंद्र की एनडीए सरकार की उदासनीता के कारण यह मामला कोर्ट में चला गया, जबकि भाजपा नेतृत्व वाली सरकार इसे नौवीं अनुसूची में शामिल करवा सकती थी, लेकिन पिछड़ों के लिए इस सरकार में कोई हमदर्दी नहीं है। बिहार में एनडीए की सरकार बनते ही जातिगत जनगणना के अनुशंसा को भाजपा नितीश ने ठंडे बसते में डाल दिया और पिछड़ों को उनका वाजिब हक नहीं मिल सका, जिसके लिए हमारे नेता राहुल गांधी ने संघर्ष किया था। तेलंगाना में जातिगत जनगणना का मॉडल राष्ट्रीय नजीर है हमने वादा किया था कि हमारी सरकार जहां भी दो तिहाई बहुमत से बनेगी हम इसे आगे बढ़ाएंगे और आज तेलंगाना में हमारी सरकार का जातिगत जनगणना का मॉडल राष्ट्रीय नजीर है। आज देश में जब चारों ओर छात्र अपने हक़ की मांग कर रहे हैं, ऐसे में जातिगत जनगणना को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी इसे कराने की बात हमारे नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के दबाव में मान गए हैं, लेकिन कई विसंगतियां इस जनगणना के प्रश्नावली में पाई गई है। जो सरकार की मंशा को संदिग्ध साबित करती है।
बिहार-तेलंगाना के जाति सर्वेक्षण के मॉडल को अपनाया जाए माणिकराव ठाकरे ने मांग की कि राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों से चर्चा करके नई प्रश्नावली तैयार की जाए, जिसमें बिहार और तेलंगाना के जाति सर्वेक्षण के मॉडल को अपनाया जाए। साथ ही जातिगत जनगणना केवल संख्या का खेल नहीं, बल्कि देश की संपत्ति और व्यवस्था में हर वर्ग की भागीदारी करने का पैमाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी की स्पष्ट मांग है कि 40 सवालों की जो लिस्ट केंद्र सरकार की ओर से प्रश्नावली के रूप में जारी की गई है। उसमें एससी एसटी कॉलम में तो कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन ओबीसी वर्ग की भागीदारी को लेकर प्रश्नावली में केवल उनकी जाति का जिक्र किया गया है। वें ओबीसी हैं या नहीं यह लिखने की जगह नहीं दी गयी है, जो स्पष्ट करती है कि केंद्र सरकार सर्वाधिक जनसंख्या वाले ओबीसी वर्ग की भागीदारी को ईमानदारी के साथ सामने लाने से कतरा रही है। केंद्र की एनडीए सरकार जातिगत जनगणना पर कुंडली मारकर बैठी है। जातिगत जनगणना में जान बूझकर अड़ंगा डालकर ओबीसी वर्ग की वास्तविक भागीदारी सामने नहीं आने देना चाहती इसीलिए प्रश्नावली में त्रुटी कर जातिगत जनगणना के वास्तविक लक्ष्यों को भटकाने का प्रयास कर रही है। ओबीसी और इबीसी वर्गों के वाजिब हकों के लिए एनडीए सरकार गंभीर नहीं है। देश में जातिगत जनगणना पर पीएम नरेंद्र मोदी ने ओबीसी ईबीसी वर्ग की भागीदारी के अनुरूप हिस्सेदारी को रोकने का कुचक्र रचा है, जिसे कांग्रेस पार्टी ने संसद में उजागर करने का काम किया है। ये बातें बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के मुख्यालय सदाकत आश्रम में AICC के गोवा, दमन दीव और दादर नगर हवेली के प्रभारी और महाराष्ट्र के पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व गृह मंत्री रहें माणिकराव ठाकरे ने कही। ओबीसी-ईबीसी वर्ग की हिस्सेदारी को रोकने का कुचक्र रचा AICC के वरिष्ठ नेता माणिकराव ठाकरे ने कहा कि केंद्र की एनडीए सरकार लगातार जातिगत जनगणना की खिलाफत करते आएं हैं। बिहार में जब हमारी महागठबंधन की सरकार थी तो नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राज्य की अपनी ही सरकार पर दबाव देकर पिछड़ों को उनकी संख्या के आधार पर भागीदारी के लिए जातिगत जनगणना पर जोर दिया और बिहार में जातिगत जनगणना की शुरुआत हुई।
पिछड़ों के लिए इस सरकार में कोई हमदर्दी नहीं बिहार में महागठबंधन की तत्कालीन सरकार ने आरक्षण के दायरे को 65% तक बढ़ाने के लिए प्रयास किया, लेकिन केंद्र की एनडीए सरकार की उदासनीता के कारण यह मामला कोर्ट में चला गया, जबकि भाजपा नेतृत्व वाली सरकार इसे नौवीं अनुसूची में शामिल करवा सकती थी, लेकिन पिछड़ों के लिए इस सरकार में कोई हमदर्दी नहीं है। बिहार में एनडीए की सरकार बनते ही जातिगत जनगणना के अनुशंसा को भाजपा नितीश ने ठंडे बसते में डाल दिया और पिछड़ों को उनका वाजिब हक नहीं मिल सका, जिसके लिए हमारे नेता राहुल गांधी ने संघर्ष किया था। तेलंगाना में जातिगत जनगणना का मॉडल राष्ट्रीय नजीर है हमने वादा किया था कि हमारी सरकार जहां भी दो तिहाई बहुमत से बनेगी हम इसे आगे बढ़ाएंगे और आज तेलंगाना में हमारी सरकार का जातिगत जनगणना का मॉडल राष्ट्रीय नजीर है। आज देश में जब चारों ओर छात्र अपने हक़ की मांग कर रहे हैं, ऐसे में जातिगत जनगणना को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी इसे कराने की बात हमारे नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के दबाव में मान गए हैं, लेकिन कई विसंगतियां इस जनगणना के प्रश्नावली में पाई गई है। जो सरकार की मंशा को संदिग्ध साबित करती है।
बिहार-तेलंगाना के जाति सर्वेक्षण के मॉडल को अपनाया जाए माणिकराव ठाकरे ने मांग की कि राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों से चर्चा करके नई प्रश्नावली तैयार की जाए, जिसमें बिहार और तेलंगाना के जाति सर्वेक्षण के मॉडल को अपनाया जाए। साथ ही जातिगत जनगणना केवल संख्या का खेल नहीं, बल्कि देश की संपत्ति और व्यवस्था में हर वर्ग की भागीदारी करने का पैमाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी की स्पष्ट मांग है कि 40 सवालों की जो लिस्ट केंद्र सरकार की ओर से प्रश्नावली के रूप में जारी की गई है। उसमें एससी एसटी कॉलम में तो कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन ओबीसी वर्ग की भागीदारी को लेकर प्रश्नावली में केवल उनकी जाति का जिक्र किया गया है। वें ओबीसी हैं या नहीं यह लिखने की जगह नहीं दी गयी है, जो स्पष्ट करती है कि केंद्र सरकार सर्वाधिक जनसंख्या वाले ओबीसी वर्ग की भागीदारी को ईमानदारी के साथ सामने लाने से कतरा रही है।  

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