Navratri Special : मां सती के अधर गिरने से बना शक्तिपीठ, छठे दिन होती है मां अर्बुदा देवी की विशेष पूजा-अर्चना

Navratri Special : मां सती के अधर गिरने से बना शक्तिपीठ, छठे दिन होती है मां अर्बुदा देवी की विशेष पूजा-अर्चना

Navratri Special : माउंट आबू (सिरोही). पर्यटन स्थल माउंट आबू में दुर्गम पहाडिय़ों के बीच करीब 4200 फीट की ऊंचाई पर स्थित मां अधर देवी का प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है। देश के 51 शक्तिपीठों में शामिल इस मंदिर में दर्शन के लिए नवरात्र के दौरान राजस्थान और गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। प्राकृतिक गुफा में विराजित मां के दर्शन के लिए संकरे प्रवेश मार्ग से गुजरना पड़ता है।

मां अधर देवी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को करीब 370 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रजापति दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किए जाने से मां सती आहत हुईं और उन्होंने यज्ञ कुंड में अपनी आहुति दे दी। इससे क्रोधित भगवान शिव मां सती की देह को कंधे पर लेकर तांडव करने लगे। सृष्टि को विनाश से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से मां सती की देह के कई टुकड़े कर दिए।

मान्यता है कि मां सती के शरीर के अंग जहां-जहां गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए। अर्बुदांचल में मां सती के अधर यानी होंठ गिरने से यह स्थान अधर देवी शक्तिपीठ के रूप में विख्यात हुआ। मंदिर की प्राचीनता को लेकर इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के बीच अलग-अलग मत हैं। हालांकि, स्कंद पुराण में प्राप्त उल्लेखों के आधार पर कुछ इतिहासकार इसे हजारों वर्ष पुराना मानते हैं। धार्मिक मान्यताओं में मां अर्बुदा देवी को मां कात्यायनी के रूप में भी पूजा जाता है।

शुंभ राक्षस के वध से जुड़ी मान्यता

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां कात्यायनी ने इसी क्षेत्र में शुंभ नामक राक्षस का वध किया था। इसके बाद ऋषि-मुनियों की स्तुति से प्रसन्न होकर मां ने इस स्थान पर अर्बुदा नाम से निवास करने का वरदान दिया। तभी से यह शक्ति स्थल अधर देवी और अर्बुदा देवी के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

छठे नवरात्र पर विशेष पूजा-अर्चना

मंदिर के पुजारी भरत रावल के अनुसार, शारदीय नवरात्र का छठा दिन मां अर्बुदा देवी की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। मंदिर में वर्षभर धार्मिक महोत्सव आयोजित किए जाते हैं। परमार राजपूत समाज की कुलदेवी होने के कारण अक्षय तृतीया पर वार्षिक उत्सव मनाया जाता है।

दूध चढ़ाकर बनता है खीर प्रसादी

स्थानीय परंपरा के अनुसार पशुओं की सुरक्षा और देश की खुशहाली की कामना से आषाढ़ और सावन महीने में राजपूत समाज के लोग घर में उपलब्ध दूध मां के मंदिर में चढ़ाते हैं। इस दूध से खीर प्रसादी तैयार की जाती है।

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