भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के अध्यक्ष विवेक भीमनवार का बचाव करते हुए कहा कि प्रश्नपत्र लीक विवाद से उनका किसी भी तरह का संबंध नहीं है। हालांकि, पार्टी ने उनके ‘‘नैतिक आधार’’ पर छुट्टी पर जाने के फैसले का स्वागत किया। भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने आरोप लगाया कि एमपीएससी अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित था, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहले ही दिन से उनकी सभी मांगें स्वीकार कर ली थीं।
एमपीएससी अभ्यर्थियों ने रविवार देर रात अपना 10 दिवसीय आंदोलन समाप्त कर दिया। राज्य सरकार ने भर्ती आयोग में प्रश्नपत्र लीक समेत कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक समिति गठित की है और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी तुकाराम मुंढे को इस समिति का सचिव बनाया गया है, जिसके बाद अभ्यर्थियों ने आंदोलन समाप्त किया। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार भी अभ्यर्थियों के साथ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।
इसके बाद एमपीएससी के अध्यक्ष भीमनवार ने घोषणा की कि वह जांच पूरी होने तक छुट्टी पर रहेंगे। पत्रकारों से बातचीत में नवनाथ बन ने कहा, ‘‘इस पूरे मामले का भीमनवार से कोई लेना-देना नहीं है। उनके अध्यक्ष रहते हुए कोई प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था।
इसके बावजूद उन्होंने नैतिक आधार पर छुट्टी पर जाने का फैसला किया। मैं उनके निर्णय का तहे दिल से स्वागत करता हूं और उन्हें धन्यवाद देता हूं।’’
उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने शुरुआत से ही विद्यार्थियों का समर्थन किया और उनकी सभी मांगें स्वीकार कर ली थीं। इसके बावजूद पुणे में आंदोलन जारी रहा और दुर्भाग्यवश उसने राजनीतिक रूप ले लिया।
बन ने कहा कि फडणवीस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार विद्यार्थियों के साथ खड़ी रहेगी और उनके हित में काम करती रहेगी।

