संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस फैसले को बाबरी मस्जिद के निर्णय से जोड़ा है। सांसद बर्क ने कहा कि हम लोकतांत्रिक व्यवस्था और अदालतों का सम्मान करते हैं, लेकिन हर नागरिक को कानूनी दायरे में रहकर न्याय के लिए आवाज उठाने का अधिकार है। सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर पोस्ट किया कि भोजशाला मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश ने कई संवैधानिक और कानूनी सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत का संविधान सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने और इबादत की आजादी का अधिकार देता है। ऐसे में बरसों से जारी धार्मिक रस्मों और नमाज पर रोक जैसे आदेशों की उच्च अदालत में न्यायिक समीक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। बर्क ने आगे कहा कि मस्जिद के बदले दूसरी जमीन देने संबंधी टिप्पणी ने बाबरी मस्जिद फैसले की याद ताजा कर दी है, जिसके कारण इस आदेश पर देश भर में कानूनी बहस जारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि माननीय सुप्रीम कोर्ट संविधान की भावना, धार्मिक आजादी, समानता और न्याय के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए उचित फैसला देगा। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार की भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है। शुक्रवार को दिए गए फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि उसने पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों, एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर विचार किया है। अदालत ने एएसआई एक्ट के प्रावधानों के साथ-साथ अयोध्या मामले को भी आधार माना। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह ऐतिहासिक और संरक्षित जगह देवी सरस्वती का मंदिर है। केंद्र सरकार और एएसआई को भोजशाला मंदिर के प्रबंधन का तरीका तय करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने एएसआई का 2003 का वह आदेश भी रद्द कर दिया, जिसमें एएसआई ने भोजशाला में हिंदुओं को पूजा का अधिकार नहीं दिया था। इसके साथ ही उस आदेश को भी खारिज कर दिया गया, जिसमें मुस्लिमों को नमाज पढ़ने का अधिकार दिया गया था। मुस्लिम पक्ष, जो भोजशाला को कमाल मौला मस्जिद बताते रहे हैं, को कोर्ट ने सरकार से मस्जिद के लिए अलग जमीन मांगने को कहा है।


