बेटा, आज बाहर मत जाओ… मेरा मन बहुत घबरा रहा है। एक मां ने बेटे को घर से निकलते वक्त यही कहा था। आवाज में ममता भी थी, डर भी और अनहोनी की आशंका भी, लेकिन 22 साल का बेटा दोस्तों पर ज्यादा भरोसा करता था। उसने मां की बात अनसुनी की, दोस्तों के साथ घर से निकला और फिर कभी वापस नहीं लौटा। दो साल तक मां चौखट पर आंखें बिछाए इंतजार करती रही। कभी लगा बेटा लौट आएगा, कभी लगा कहीं फंसा होगा, कभी लगा किसी ने रोक लिया होगा। लेकिन दो साल बाद जो मिला, वह किसी मां के लिए सबसे बड़ा नाइटमेयर था, उसके बेटे का कंकाल। गोपालगंज के कुचायकोट थाना क्षेत्र के सिरिसिया गांव की यह कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं, बल्कि मां के अटूट विश्वास, पुलिस जांच की परतों, दोस्ती के नाम पर विश्वासघात और नशे की दुनिया के अंधेरे सच की कहानी है। घर से तिलक समारोह में जाने निकला था चंदन मृतक युवक की पहचान चंदन कुमार के रूप में हुई है। वह कुचायकोट थाना क्षेत्र के सासामुसा-सिरिसिया गांव का रहने वाला था। परिवार के अनुसार, 28 फरवरी 2024 की शाम करीब 6 बजे चंदन अपने तीन दोस्तों के साथ गांव से एक तिलक समारोह में शामिल होने के लिए निकला था। घर से निकलते वक्त उसकी मां ने उसे रोकने की कोशिश की थी। मां को किसी अनहोनी का आभास हो रहा था। उन्होंने कहा था कि आज बाहर मत जाओ, लेकिन जवान बेटे ने इसे सामान्य चिंता समझा और दोस्तों के साथ चला गया। रात गहराने लगी, लेकिन चंदन घर नहीं लौटा। परिवार ने पहले सोचा कि कार्यक्रम देर तक चला होगा। फिर फोन किया गया, लेकिन मोबाइल बंद मिला। इसके बाद बेचैनी शुरू हुई। दोस्तों ने दिया गोलमोल जवाब परिवार वालों ने उन दोस्तों से संपर्क किया, जिनके साथ चंदन घर से निकला था। लेकिन किसी ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। कोई कहता बीच रास्ते उतर गया, कोई कहता कहीं और चला गया, कोई कहता हमें नहीं पता। परिवार ने अपने स्तर पर रिश्तेदारों, परिचितों और आसपास के इलाकों में खोजबीन की। गांव-गांव पूछा गया। बाजारों में तलाश हुई। लेकिन चंदन का कोई सुराग नहीं मिला। धीरे-धीरे गांव में तरह-तरह की बातें होने लगीं। कुछ लोग बोले लड़का कहीं भाग गया होगा, कुछ बोले प्रेम प्रसंग होगा, कुछ बोले खुद चला गया होगा। लेकिन मां का दिल मानने को तैयार नहीं था। मां ने दर्ज कराया केस, आरोपी जेल भी गए जब कहीं से कोई जवाब नहीं मिला, तो चंदन की मां ने स्थानीय थाना में बेटे के साथ गए तीन दोस्तों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। पुलिस ने शुरुआती कार्रवाई में आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई और वे बाहर आ गए। मामला ठंडा पड़ने लगा। जांच की रफ्तार धीमी हो गई। फाइल चलती रही, लेकिन न तो चंदन मिला, न सच सामने आया। परिवार के लिए यह सबसे कठिन दौर था। एक तरफ बेटा गायब था, दूसरी तरफ आरोपी खुले घूम रहे थे। दो साल तक मां ने हार नहीं मानी चंदन की मां के लिए हर दिन एक नई परीक्षा जैसा था। घर की चौखट, दरवाजे की आहट, सड़क की आवाज, हर दस्तक पर उन्हें लगता बेटा लौट आया है। उन्होंने मजदूरी कर बेटे को पाला था। पाई-पाई जोड़कर बड़ा किया था। अब वही बेटा बिना कोई खबर गायब था। लेकिन मां ने हार नहीं मानी। वह बार-बार थाना गईं। अधिकारियों से मिलीं। लोगों से मदद मांगी। गांव वालों से पूछा। आरोपी पक्ष से सवाल किया। हर बार उन्हें या तो टाल दिया गया या सांत्वना देकर भेज दिया गया। लेकिन एक मां के मन में जो शक था, वह कभी खत्म नहीं हुआ। उन्हें भरोसा था कि बेटे के साथ कुछ गलत हुआ है। फिर पहुंचे SP तक, बदली जांच की दिशा कहा जाता है कि जब सिस्टम थक जाता है, तब एक मां की जिद इतिहास बदल देती है। चंदन की मां किसी तरह जिले के पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी तक पहुंचीं। उन्होंने बेटे की गुमशुदगी, दो साल की दौड़-धूप और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई न होने की बात रखी। एसपी ने मामले को गंभीरता से लिया और केस की दोबारा समीक्षा का आदेश दिया। मार्च 2026 से इस मामले पर पुलिस फिर सक्रिय हुई। एक विशेष टीम बनाई गई, जिसमें डीआईयू (जिला खुफिया इकाई) को भी लगाया गया। पुरानी जांच में प्रेम-प्रसंग का एंगल एसपी विनय तिवारी के अनुसार, शुरुआती जांच में मामला प्रेम प्रसंग की दिशा में देखा जा रहा था। लेकिन जब नई टीम ने फरवरी 2024 की घटनाओं की दोबारा समीक्षा की, तो कई बातें मेल नहीं खाईं। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य जुटाने शुरू किए। मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल, आपसी संपर्क, घटना के बाद आरोपियों की गतिविधियों का विश्लेषण किया गया। जांच में सामने आया कि चंदन के दो दोस्त दीपक और मन्नू घटना के बाद से अपने पुराने सामाजिक दायरे से दूरी बनाकर रह रहे थे। उनकी गतिविधियां भी संदिग्ध थीं। यहीं से पुलिस का शक गहरा गया। हिरासत में लेते ही टूटा झूठ का किला पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद दीपक और मन्नू को हिरासत में लिया। सख्ती से पूछताछ हुई। सवालों का दबाव बढ़ा तो दोनों टूट गए। उन्होंने स्वीकार किया कि चंदन की हत्या 28 फरवरी 2024 की रात ही कर दी गई थी। हत्या के बाद शव को राष्ट्रीय राजमार्ग-27 के किनारे सर्विस लेन के पास एक नाले में फेंक दिया गया था। दो साल से जिस युवक को लोग लापता मान रहे थे, वह उसी रात मारा जा चुका था। नाले से मिला नरकंकाल आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस टीम सासामुसा बाजार के पास एनएच-27 किनारे पहुंची। वहां सर्विस लेन के बगल नाले में खुदाई और तलाशी अभियान चलाया गया। कुछ देर की मशक्कत के बाद वहां से मानव अवशेष और नरकंकाल बरामद हुआ। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वह चंदन का ही कंकाल है। यह खबर जैसे ही गांव पहुंची, मातम पसर गया। मां बदहवास हो गईं। दो साल से जिस बेटे के लौटने की उम्मीद थी, अब उसकी हड्डियां घर लौट रही थीं। हत्या की वजह- नशा, इलाका और विवाद पूछताछ में जो कहानी सामने आई, वह चौंकाने वाली थी। एसपी के अनुसार, चंदन, दीपक और मन्नू तीनों नशे के आदी थे। वे स्मैक का सेवन करते थे। तीनों कूड़ा बीनने और कबाड़ से कमाई करने का काम भी करते थे। इस काम के लिए अलग-अलग इलाके बंटे हुए थे। आरोप है कि चंदन अक्सर दीपक और मन्नू के इलाके में जाकर काम करता था, जिससे विवाद होता था। नशे की हालत में यह विवाद बढ़ता गया। अंततः मन्नू ने चंदन को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। दीपक ने उसका साथ दिया। गला दबाकर हत्या, फिर खोजबीन का नाटक पुलिस के अनुसार, 28 फरवरी की रात दोनों ने मिलकर चंदन की गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद शव को करीब 100 मीटर दूर नाले तक ले जाकर फेंक दिया गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि हत्या के बाद आरोपी परिवार वालों के साथ खोजबीन में भी शामिल हुए। वे गांव में घूम-घूमकर पूछते रहे कि चंदन कहां गया। उन्होंने पुलिस को भी गुमराह करने की कोशिश की। यही वजह रही कि शुरुआती जांच निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी। तत्कालीन थानाध्यक्ष पर कार्रवाई की तैयारी एसपी विनय तिवारी ने कहा कि दो साल तक केस में ठोस प्रगति नहीं होना गंभीर लापरवाही है। प्रारंभिक स्तर पर तत्कालीन थानाध्यक्ष की भूमिका संदिग्ध और लापरवाहीपूर्ण दिख रही है। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजा जा रहा है। साथ ही केस का सफल खुलासा करने वाली टीम को 5-5 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की गई है। गांव में चर्चा- मां की जिद जीत गई सिरिसिया गांव में अब एक ही चर्चा है अगर मां हार मान जातीं, तो यह सच कभी सामने नहीं आता। गांव के लोग कहते हैं कि पुलिस फाइल बंद मान चुकी थी, लेकिन मां रोज दरवाजे खटखटाती रहीं। उन्होंने बेटे को जिंदा खोजा, पर आखिरकार उसके लिए न्याय लेकर रहीं। एक बुजुर्ग ने कहा, मां का दिल कभी गलत नहीं होता। सब कह रहे थे लड़का भाग गया, लेकिन मां कहती थी मेरे बेटे को कुछ हुआ है। दोस्ती के नाम पर सबसे बड़ा धोखा यह मामला समाज के लिए भी एक कड़ा संदेश है। जिस लड़के ने दोस्तों पर भरोसा किया, उन्हीं दोस्तों ने उसकी जान ले ली। दोस्ती, साथ, भरोसा ये शब्द अक्सर सुरक्षा का एहसास देते हैं। लेकिन जब लालच, नशा और विवाद इनके बीच आ जाएं, तो वही रिश्ता सबसे खतरनाक बन सकता है। मां का सवाल अब भी बाकी है चंदन की मां को न्याय की पहली सीढ़ी मिल गई है। आरोपी गिरफ्तार हैं। सच सामने आ गया है। लेकिन एक सवाल अब भी बाकी है। अगर जांच समय पर होती, तो क्या यह राज दो साल पहले खुल सकता था? क्या मां को दो साल तक चौखट पर बैठकर इंतजार करना पड़ता? क्या बेटा लापता नहीं, मृत घोषित होकर जल्दी न्याय पाता? यह सिर्फ हत्या नहीं, व्यवस्था की परीक्षा भी है गोपालगंज की यह घटना केवल एक युवक की हत्या का मामला नहीं है। यह बताती है कि लापता मामलों में शुरुआती जांच कितनी महत्वपूर्ण होती है। अगर परिवार की शिकायत को गंभीरता से लिया जाए, तकनीकी जांच समय पर हो, संदिग्धों से सही पूछताछ हो, तो कई मामलों का सच जल्दी सामने आ सकता है। बेटा, आज बाहर मत जाओ… मेरा मन बहुत घबरा रहा है। एक मां ने बेटे को घर से निकलते वक्त यही कहा था। आवाज में ममता भी थी, डर भी और अनहोनी की आशंका भी, लेकिन 22 साल का बेटा दोस्तों पर ज्यादा भरोसा करता था। उसने मां की बात अनसुनी की, दोस्तों के साथ घर से निकला और फिर कभी वापस नहीं लौटा। दो साल तक मां चौखट पर आंखें बिछाए इंतजार करती रही। कभी लगा बेटा लौट आएगा, कभी लगा कहीं फंसा होगा, कभी लगा किसी ने रोक लिया होगा। लेकिन दो साल बाद जो मिला, वह किसी मां के लिए सबसे बड़ा नाइटमेयर था, उसके बेटे का कंकाल। गोपालगंज के कुचायकोट थाना क्षेत्र के सिरिसिया गांव की यह कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं, बल्कि मां के अटूट विश्वास, पुलिस जांच की परतों, दोस्ती के नाम पर विश्वासघात और नशे की दुनिया के अंधेरे सच की कहानी है। घर से तिलक समारोह में जाने निकला था चंदन मृतक युवक की पहचान चंदन कुमार के रूप में हुई है। वह कुचायकोट थाना क्षेत्र के सासामुसा-सिरिसिया गांव का रहने वाला था। परिवार के अनुसार, 28 फरवरी 2024 की शाम करीब 6 बजे चंदन अपने तीन दोस्तों के साथ गांव से एक तिलक समारोह में शामिल होने के लिए निकला था। घर से निकलते वक्त उसकी मां ने उसे रोकने की कोशिश की थी। मां को किसी अनहोनी का आभास हो रहा था। उन्होंने कहा था कि आज बाहर मत जाओ, लेकिन जवान बेटे ने इसे सामान्य चिंता समझा और दोस्तों के साथ चला गया। रात गहराने लगी, लेकिन चंदन घर नहीं लौटा। परिवार ने पहले सोचा कि कार्यक्रम देर तक चला होगा। फिर फोन किया गया, लेकिन मोबाइल बंद मिला। इसके बाद बेचैनी शुरू हुई। दोस्तों ने दिया गोलमोल जवाब परिवार वालों ने उन दोस्तों से संपर्क किया, जिनके साथ चंदन घर से निकला था। लेकिन किसी ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। कोई कहता बीच रास्ते उतर गया, कोई कहता कहीं और चला गया, कोई कहता हमें नहीं पता। परिवार ने अपने स्तर पर रिश्तेदारों, परिचितों और आसपास के इलाकों में खोजबीन की। गांव-गांव पूछा गया। बाजारों में तलाश हुई। लेकिन चंदन का कोई सुराग नहीं मिला। धीरे-धीरे गांव में तरह-तरह की बातें होने लगीं। कुछ लोग बोले लड़का कहीं भाग गया होगा, कुछ बोले प्रेम प्रसंग होगा, कुछ बोले खुद चला गया होगा। लेकिन मां का दिल मानने को तैयार नहीं था। मां ने दर्ज कराया केस, आरोपी जेल भी गए जब कहीं से कोई जवाब नहीं मिला, तो चंदन की मां ने स्थानीय थाना में बेटे के साथ गए तीन दोस्तों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। पुलिस ने शुरुआती कार्रवाई में आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई और वे बाहर आ गए। मामला ठंडा पड़ने लगा। जांच की रफ्तार धीमी हो गई। फाइल चलती रही, लेकिन न तो चंदन मिला, न सच सामने आया। परिवार के लिए यह सबसे कठिन दौर था। एक तरफ बेटा गायब था, दूसरी तरफ आरोपी खुले घूम रहे थे। दो साल तक मां ने हार नहीं मानी चंदन की मां के लिए हर दिन एक नई परीक्षा जैसा था। घर की चौखट, दरवाजे की आहट, सड़क की आवाज, हर दस्तक पर उन्हें लगता बेटा लौट आया है। उन्होंने मजदूरी कर बेटे को पाला था। पाई-पाई जोड़कर बड़ा किया था। अब वही बेटा बिना कोई खबर गायब था। लेकिन मां ने हार नहीं मानी। वह बार-बार थाना गईं। अधिकारियों से मिलीं। लोगों से मदद मांगी। गांव वालों से पूछा। आरोपी पक्ष से सवाल किया। हर बार उन्हें या तो टाल दिया गया या सांत्वना देकर भेज दिया गया। लेकिन एक मां के मन में जो शक था, वह कभी खत्म नहीं हुआ। उन्हें भरोसा था कि बेटे के साथ कुछ गलत हुआ है। फिर पहुंचे SP तक, बदली जांच की दिशा कहा जाता है कि जब सिस्टम थक जाता है, तब एक मां की जिद इतिहास बदल देती है। चंदन की मां किसी तरह जिले के पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी तक पहुंचीं। उन्होंने बेटे की गुमशुदगी, दो साल की दौड़-धूप और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई न होने की बात रखी। एसपी ने मामले को गंभीरता से लिया और केस की दोबारा समीक्षा का आदेश दिया। मार्च 2026 से इस मामले पर पुलिस फिर सक्रिय हुई। एक विशेष टीम बनाई गई, जिसमें डीआईयू (जिला खुफिया इकाई) को भी लगाया गया। पुरानी जांच में प्रेम-प्रसंग का एंगल एसपी विनय तिवारी के अनुसार, शुरुआती जांच में मामला प्रेम प्रसंग की दिशा में देखा जा रहा था। लेकिन जब नई टीम ने फरवरी 2024 की घटनाओं की दोबारा समीक्षा की, तो कई बातें मेल नहीं खाईं। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य जुटाने शुरू किए। मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल, आपसी संपर्क, घटना के बाद आरोपियों की गतिविधियों का विश्लेषण किया गया। जांच में सामने आया कि चंदन के दो दोस्त दीपक और मन्नू घटना के बाद से अपने पुराने सामाजिक दायरे से दूरी बनाकर रह रहे थे। उनकी गतिविधियां भी संदिग्ध थीं। यहीं से पुलिस का शक गहरा गया। हिरासत में लेते ही टूटा झूठ का किला पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद दीपक और मन्नू को हिरासत में लिया। सख्ती से पूछताछ हुई। सवालों का दबाव बढ़ा तो दोनों टूट गए। उन्होंने स्वीकार किया कि चंदन की हत्या 28 फरवरी 2024 की रात ही कर दी गई थी। हत्या के बाद शव को राष्ट्रीय राजमार्ग-27 के किनारे सर्विस लेन के पास एक नाले में फेंक दिया गया था। दो साल से जिस युवक को लोग लापता मान रहे थे, वह उसी रात मारा जा चुका था। नाले से मिला नरकंकाल आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस टीम सासामुसा बाजार के पास एनएच-27 किनारे पहुंची। वहां सर्विस लेन के बगल नाले में खुदाई और तलाशी अभियान चलाया गया। कुछ देर की मशक्कत के बाद वहां से मानव अवशेष और नरकंकाल बरामद हुआ। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वह चंदन का ही कंकाल है। यह खबर जैसे ही गांव पहुंची, मातम पसर गया। मां बदहवास हो गईं। दो साल से जिस बेटे के लौटने की उम्मीद थी, अब उसकी हड्डियां घर लौट रही थीं। हत्या की वजह- नशा, इलाका और विवाद पूछताछ में जो कहानी सामने आई, वह चौंकाने वाली थी। एसपी के अनुसार, चंदन, दीपक और मन्नू तीनों नशे के आदी थे। वे स्मैक का सेवन करते थे। तीनों कूड़ा बीनने और कबाड़ से कमाई करने का काम भी करते थे। इस काम के लिए अलग-अलग इलाके बंटे हुए थे। आरोप है कि चंदन अक्सर दीपक और मन्नू के इलाके में जाकर काम करता था, जिससे विवाद होता था। नशे की हालत में यह विवाद बढ़ता गया। अंततः मन्नू ने चंदन को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। दीपक ने उसका साथ दिया। गला दबाकर हत्या, फिर खोजबीन का नाटक पुलिस के अनुसार, 28 फरवरी की रात दोनों ने मिलकर चंदन की गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद शव को करीब 100 मीटर दूर नाले तक ले जाकर फेंक दिया गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि हत्या के बाद आरोपी परिवार वालों के साथ खोजबीन में भी शामिल हुए। वे गांव में घूम-घूमकर पूछते रहे कि चंदन कहां गया। उन्होंने पुलिस को भी गुमराह करने की कोशिश की। यही वजह रही कि शुरुआती जांच निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी। तत्कालीन थानाध्यक्ष पर कार्रवाई की तैयारी एसपी विनय तिवारी ने कहा कि दो साल तक केस में ठोस प्रगति नहीं होना गंभीर लापरवाही है। प्रारंभिक स्तर पर तत्कालीन थानाध्यक्ष की भूमिका संदिग्ध और लापरवाहीपूर्ण दिख रही है। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजा जा रहा है। साथ ही केस का सफल खुलासा करने वाली टीम को 5-5 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की गई है। गांव में चर्चा- मां की जिद जीत गई सिरिसिया गांव में अब एक ही चर्चा है अगर मां हार मान जातीं, तो यह सच कभी सामने नहीं आता। गांव के लोग कहते हैं कि पुलिस फाइल बंद मान चुकी थी, लेकिन मां रोज दरवाजे खटखटाती रहीं। उन्होंने बेटे को जिंदा खोजा, पर आखिरकार उसके लिए न्याय लेकर रहीं। एक बुजुर्ग ने कहा, मां का दिल कभी गलत नहीं होता। सब कह रहे थे लड़का भाग गया, लेकिन मां कहती थी मेरे बेटे को कुछ हुआ है। दोस्ती के नाम पर सबसे बड़ा धोखा यह मामला समाज के लिए भी एक कड़ा संदेश है। जिस लड़के ने दोस्तों पर भरोसा किया, उन्हीं दोस्तों ने उसकी जान ले ली। दोस्ती, साथ, भरोसा ये शब्द अक्सर सुरक्षा का एहसास देते हैं। लेकिन जब लालच, नशा और विवाद इनके बीच आ जाएं, तो वही रिश्ता सबसे खतरनाक बन सकता है। मां का सवाल अब भी बाकी है चंदन की मां को न्याय की पहली सीढ़ी मिल गई है। आरोपी गिरफ्तार हैं। सच सामने आ गया है। लेकिन एक सवाल अब भी बाकी है। अगर जांच समय पर होती, तो क्या यह राज दो साल पहले खुल सकता था? क्या मां को दो साल तक चौखट पर बैठकर इंतजार करना पड़ता? क्या बेटा लापता नहीं, मृत घोषित होकर जल्दी न्याय पाता? यह सिर्फ हत्या नहीं, व्यवस्था की परीक्षा भी है गोपालगंज की यह घटना केवल एक युवक की हत्या का मामला नहीं है। यह बताती है कि लापता मामलों में शुरुआती जांच कितनी महत्वपूर्ण होती है। अगर परिवार की शिकायत को गंभीरता से लिया जाए, तकनीकी जांच समय पर हो, संदिग्धों से सही पूछताछ हो, तो कई मामलों का सच जल्दी सामने आ सकता है।


