एआई की दुनिया में साल 2023 में उस समय बड़ा भूचाल आया था, जब ओपनएआई के प्रमुख सैम ऑल्टमैन को अचानक कंपनी से बाहर कर दिया गया था। अब इस पूरे मामले में माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्या नडेला की अदालत में दी गई गवाही ने कई बड़े खुलासे किए हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार, सत्या नडेला ने बताया कि सैम ऑल्टमैन की बर्खास्तगी के बाद माइक्रोसॉफ्ट ने बेहद तेजी से वैकल्पिक योजना तैयार कर ली थी ताकि ओपनएआई की पूरी नेतृत्व टीम को अपने नियंत्रण में लाया जा सके।
बताया जा रहा है कि यह बयान कैलिफोर्निया के ओकलैंड स्थित संघीय अदालत में एलन मस्क और ओपनएआई के बीच चल रहे मुकदमे की सुनवाई के दौरान सामने आया हैं। सत्या नडेला ने अदालत में कहा कि सैम ऑल्टमैन को हटाए जाने के सिर्फ 24 घंटे के भीतर माइक्रोसॉफ्ट ने एक नई सहायक कंपनी बनाने से जुड़े कानूनी दस्तावेज तैयार कर लिए थे। इस नई इकाई के जरिए सैम ऑल्टमैन, ग्रेग ब्रॉकमैन और ओपनएआई के कई कर्मचारियों को माइक्रोसॉफ्ट में शामिल करने की तैयारी की जा रही थी।
गौरतलब है कि माइक्रोसॉफ्ट ओपनएआई में अरबों डॉलर का निवेश कर चुका है और कंपनी की एआई रणनीति में ओपनएआई की तकनीक बेहद अहम मानी जाती हैं। सत्या नडेला ने अदालत में यह भी खुलासा किया कि ओपनएआई की टीम को माइक्रोसॉफ्ट में शामिल करने के लिए कंपनी को करीब 25 अरब डॉलर तक खर्च करने पड़ सकते थे। इसमें वेतन, शेयर और अन्य सुविधाएं शामिल थीं, क्योंकि ओपनएआई के कर्मचारियों को पहले से ही बड़े स्तर पर इक्विटी और भविष्य के लाभ मिलने की उम्मीद थी।
हालांकि बाद में सैम ऑल्टमैन की ओपनएआई में वापसी हो गई, जिसके बाद माइक्रोसॉफ्ट को अपनी यह वैकल्पिक योजना लागू करने की जरूरत नहीं पड़ी।
सत्या नडेला ने अदालत में सैम ऑल्टमैन की बर्खास्तगी को “अव्यवस्थित” और “गैर-पेशेवर” तरीके से लिया गया फैसला बताया। उन्होंने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट, ओपनएआई का सबसे बड़ा निवेशक होने के बावजूद, कंपनी के बोर्ड ने उन्हें हटाने की असली वजह कभी साफ तौर पर नहीं बताई थीं।
नडेला के मुताबिक, उनकी पहली चिंता यह जानना थी कि क्या मामला किसी वित्तीय गड़बड़ी, धोखाधड़ी, सुरक्षा खतरे या नैतिक उल्लंघन से जुड़ा था। लेकिन ओपनएआई बोर्ड की तरफ से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। सार्वजनिक तौर पर केवल इतना कहा गया कि सैम ऑल्टमैन बोर्ड के साथ बातचीत में “लगातार पारदर्शी” नहीं थे, जिसे लेकर उस समय भी काफी सवाल उठे थे।
मामले की सुनवाई के दौरान माइक्रोसॉफ्ट और ओपनएआई के रिश्तों पर भी चर्चा हुई। सत्या नडेला ने माना कि ओपनएआई के बोर्ड पर माइक्रोसॉफ्ट का सीधा नियंत्रण नहीं था, लेकिन कंपनी बोर्ड के गठन को प्रभावित करने की कोशिश जरूर कर रही थी। उन्होंने बताया कि माइक्रोसॉफ्ट ने नए बोर्ड के लिए 13 से 14 नाम सुझाए थे, लेकिन उनमें से किसी को भी शुरुआती दौर में शामिल नहीं किया गया।
इसके अलावा नडेला ने कहा कि उन्होंने कुछ नामों का विरोध भी किया था। उन्होंने डायन ग्रीन का विरोध उनके गूगल से जुड़े संबंधों के कारण किया, जबकि बिंग गॉर्डन पर अमेजन से करीबी संबंध होने की वजह से आपत्ति जताई गई थीं। इससे यह संकेत मिलता है कि माइक्रोसॉफ्ट नहीं चाहता था कि उसके प्रतिस्पर्धियों का ओपनएआई के भीतर प्रभाव बढ़े हैं।
बता दें कि ओपनएआई के सह-संस्थापक और पूर्व मुख्य वैज्ञानिक इलिया सुत्सकेवर ने भी अदालत में गवाही दी। उन्होंने बताया कि संकट के दौरान ओपनएआई ने कई वैकल्पिक विकल्पों पर विचार किया था, जिसमें प्रतिद्वंद्वी कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंपनी एंथ्रोपिक के साथ संभावित साझेदारी या विलय की बातचीत भी शामिल थीं। हालांकि इलिया सुत्सकेवर ने कहा कि वह इस प्रस्ताव को लेकर उत्साहित नहीं थे।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इस मुकदमे में एलन मस्क की कानूनी टीम ने आरोप लगाया है कि माइक्रोसॉफ्ट ओपनएआई के संचालन और फैसलों पर प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रही थी ताकि उसके कारोबारी हित मजबूत हो सकें।


