भारत आज नई दिल्ली में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक की मेजबानी करेगा। बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी शामिल होंगे। भारत फिलहाल क्वाड समूह की अध्यक्षता कर रहा है। बैठक में इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका और चीन के रिश्तों में बदलाव देखा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प हाल ही में चीन दौरे से लौटे हैं। इसी के साथ क्वाड की रणनीतिक अहमियत को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि नई दिल्ली की बैठक का मकसद यह संदेश देना है कि क्वाड अब भी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग का अहम मंच बना हुआ है। लोवी इंस्टीट्यूट की इंडिया चेयर श्रुति पंडालई ने कहा कि बैठक बदलते अमेरिका-चीन समीकरणों के बावजूद क्वाड की प्रासंगिकता बनाए रखने का संकेत देगी। भारत में 2025 में होनी थी क्वाड समिट पिछले कुछ समय में क्वाड के अंदर तनाव बढ़ा है। 2024 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने डेलावेयर में क्वाड नेताओं की बैठक की मेजबानी की थी। इसके बाद अगली बैठक 2025 में भारत में होनी थी, लेकिन वह नहीं हो सकी। रिपोर्ट के अनुसार इसकी एक बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बढ़ा तनाव रहा। ट्रम्प ने भारतीय सामानों पर टैरिफ और अतिरिक्त शुल्क लगाए, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आया। इसके अलावा ट्रम्प ने यह दावा भी किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा संघर्ष को शांत कराने में मध्यस्थता की थी। भारत इस तरह के दावे को हमेशा संवेदनशील मानता है। ट्रम्प ने भारत द्वारा रूस से हथियार खरीदने की भी आलोचना की थी। इन सब वजहों से नई दिल्ली और वॉशिंगटन के रिश्तों में असहजता बढ़ी। अब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत आए हैं और उन्हें दोनों देशों के रिश्तों को संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक यह उनके लिए आसान काम नहीं होगा, क्योंकि ट्रम्प का ध्यान फिलहाल पश्चिम एशिया और दूसरे वैश्विक संकटों पर हैं। भारत की अहमियत नहीं समझ पाई अमेरिकी सरकार जर्मन वेबसाइट DW के मुताबिक अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया पहले से सुरक्षा सहयोगी थे, लेकिन क्वाड का असली मकसद भारत को साथ जोड़ना था ताकि ग्रुप का प्रभाव बढ़े। लेकिन अमेरिकी सरकार भारत की अहमियत को पूरी तरह नहीं समझ पाई जिससे मोदी सरकार नाराज हुई है। जापान और ऑस्ट्रेलिया लगातार कोशिश कर रहे हैं कि क्वाड टूटने न पाए। कुछ एक्स्पर्ट्स का मानना है कि भारत में ट्रम्प की जगह रुबियो का आना क्वाड के लिए बेहतर हो सकता है। अमेरिकी विशेषज्ञ डेरेक ग्रॉसमैन ने चेतावनी दी कि अगर ट्रम्प अगले क्वाड नेताओं के सम्मेलन में शामिल नहीं होते, तो यह समूह धीरे-धीरे महत्व खो सकता है। अगली नेताओं की बैठक 2026 के अंत में ऑस्ट्रेलिया में होने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर क्वाड कमजोर पड़ता है तो सबसे बड़ा फायदा चीन को होगा। ——————– यह खबर भी पढ़ें… भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणी पर अमेरिकी विदेश मंत्री निराश:कहा- हर देश में कुछ बेवकूफ लोग होते हैं, वे अमेरिका के नुमाइंदे नहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने रविवार को अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों और भेदभाव के सवाल पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान पूरे अमेरिकी समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करते। पढ़ें पूरी खबर…
भारत में आज क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक:अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के नेता दिल्ली पहुंचे, जयशंकर अध्यक्षता करेंगे


