MCD को Unipole विज्ञापनों से मिले 79 करोड़, खाली पड़े 485 साइटों के नुकसान का ब्योरा नहीं

MCD को Unipole विज्ञापनों से मिले 79 करोड़, खाली पड़े 485 साइटों के नुकसान का ब्योरा नहीं

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के पास अपने 12 क्षेत्रों में गैर-आवंटित या निष्क्रिय यूनिपोल विज्ञापन स्थलों से होने वाले अनुमानित राजस्व नुकसान का कोई रिकॉर्ड नहीं है और न ही निविदा प्रक्रिया, आवंटन या राजस्व निगरानी में कथित लापरवाही को लेकर अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का कोई विवरण उपलब्ध है। यह जानकारी निगम के एक आधिकारिक जवाब में दी गई है। यूनिपोल विज्ञापन ऐसे बड़े होर्डिंग/विज्ञापन बोर्ड होते हैं जिन्हें एक मजबूत लोहे या स्टील के एक ही खंभे के सहारे सड़क किनारे, चौराहों, राजमार्गों या व्यावसायिक क्षेत्रों में लगाया जाता है।

एमसीडी के विज्ञापन विभाग ने 24 सितंबर को समिति की एक बैठक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पार्षद और स्थायी समिति सदस्य हेमचंद गोयल द्वारा पूछे गए एक अल्पसूचना प्रश्न के जवाब में यह जानकारी दी। विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, निगम ने अपने 12 क्षेत्रों में 1,235 यूनिपोल स्थलों की पहचान की है, जिनमें से 750 चालू हैं जबकि 485 की बिक्री नहीं हुई है। इसने वित्त वर्ष 2026-27 में निविदा के माध्यम से आवंटित विज्ञापन माध्यमों से 79.16 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने की जानकारी दी।

करोल बाग क्षेत्र में सबसे अधिक 190 यूनिपोल स्थल चिन्हित किए गए हैं, जिनमें 102 चालू और 88 अनावंटित हैं। इसके बाद शाहदरा दक्षिण क्षेत्र में 180 स्थल हैं, जिनमें 118 चालू और 62 अनावंटित हैं। वहीं, केशवपुरम क्षेत्र में 159 स्थल हैं, जिनमें 83 चालू और 76 अनावंटित हैं।

विभाग ने अपने जवाब में कहा कि अनावंटित स्थलों के लिए समय-समय पर निविदाएं आमंत्रित की जाती हैं और समय के साथ उनका आवंटन किया जाता है। इसने कहा, सभी स्थलों का आवंटन एक साथ नहीं किया जा सकता, इसलिए इस संबंध में राजस्व नुकसान का कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता। विभाग ने यह भी कहा कि इस संबंध में कोई अन्य विवरण उसके पास उपलब्ध नहीं है।

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