जालना, नौ सितंबर मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे ने बुधवार को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह चाहते है कि मराठा समुदाय के लोग आपस में लड़ते रहें। जरांगे का आंदोलन बुधवार को 12वें दिन में प्रवेश कर गया है। उन्होंने राज्य मंत्री और मराठा आरक्षण उप-समिति के अध्यक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल पर मीठी बातें करके और सिर्फ़ आश्वासन देकर समुदाय को धोखा देने का आरोप लगाया।
साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 12 सितंबर तक उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो मुंबई में आंदोलन शुरू किया जाएगा। जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में जरांगे मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत आरक्षण की मांग को लेकर अनशन कर रहे हैं। वह हैदराबाद और सातारा गजट के अभिलेखों को लागू करने तथा पात्र मराठाओं को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने की भी मांग कर रहे हैं।
बुधवार को उनकी तबीयत बिगड़ने पर चिकित्सकों ने उन्हें नस के जरिए तरल पदार्थ दिया। इसी बीच छत्रपति संभाजीनगर में कुनबी प्रमाणपत्र और मराठा आरक्षण से जुड़े अभिलेखों को लेकर उच्चाधिकार समिति की बैठक हुई। मंत्री उदय सामंत ने दावा किया कि मराठवाड़ा में कुनबी प्रमाणपत्रों के आवेदन खारिज होने की दर केवल 0.3 प्रतिशत है।
विरोध-प्रदर्शन वाली जगह पर इलाज के दौरान जरांगे ने संवाददाताओं से कहा, एकनाथ शिंदे चाहते हैं कि मराठा समुदाय के लोग आपस में लड़ें… लेकिन उन्हें मराठों को मराठों के खिलाफ लड़ाने का पाप नहीं करना चाहिए। वरना, इन सबके लिए सिर्फ़ वही ज़िम्मेदार होंगे। उन्होंने पूछा, वे दंगा चाहते हैं और आप देखेंगे कि इस आंदोलन के दौरान ऐसा होगा।
अगर सामंत कहते हैं कि दंगा भड़काने का पाप नहीं किया जाएगा, तो फिर पहले यहां क्या हुआ था जब लोग खून से लथपथ हो गए थे? सामंत और भाजपा विधायक प्रसाद लाड की बैठक का ज़िक्र करते हुए जरांगे ने कहा कि सरकार सिर्फ़ बैठकें कर रही है और दावा कर रही है कि उनकी मांगें पूरी कर दी गई हैं। उन्होंने कहा, विखे पाटिल ने भी लगभग एक साल तक मीठी-मीठी बातें करके हमें धोखा दिया।
फिर ये लोग (सामंत और लाड) आए। अब वे ऐसे आश्वासन दे रहे हैं कि काम कल या परसों हो जाएगा। राजनीतिक नेताओं की कथित धमकियों को खारिज करते हुए, जरांगे ने कहा कि दबाव में आकर आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया, कुछ नेता ताकत के दम पर हमें धमका रहे हैं। हम मराठों के लिए जान देने को तैयार हैं। हम किसी के दबाव से नहीं डरेंगे।
आंदोलन से पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है… सरकार और मराठा समुदाय आमने-सामने हैं। शासक अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी, भले ही सभी मंत्री एकजुट हो जाएं, और उन्हें लगे कि उनके पास पैसे की ताकत और गुंडे हैं, फिर भी वे मराठा समुदाय का कुछ नहीं बिगाड़ सकते।
हर विधायक गुंडे रखता है, लेकिन मराठा समुदाय के युवा उन्हें सबक सिखाएंगे। जरांगे ने कहा कि दबाव में आकर आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि छत्रपति संभाजीनगर में हुई बैठक मराठा आंदोलन को पटरी से उतारने की एक साजिश का हिस्सा थी।
जरांगे ने कहा, संभाजीनगर बैठक में हमारे आंदोलन को कमजोर करने की योजनाएं और साजिशें ही रची गईं। आप पूरी तरह विफल रहे हैं। यह बात साफ कर लें कि यह सरकार न्याय नहीं दे सकती।
सामंत और लाड की अपील पर इलाज कराने के लिए सहमत होने की बात कहते हुए, कोटा आंदोलन के नेता ने कहा कि जब तक मराठा समुदाय की मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं हो जाता, तब तक वे अपनी भूख हड़ताल खत्म नहीं करेंगे। जरांगे ने कहा कि सरकार के पास 12 सितंबर तक का समय है। मांगें नहीं मानी गईं तो वे शांतिपूर्वक मुंबई जाएंगे और अपने अधिकार हासिल करेंगे।

