सहरसा में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और अभिभावक-हितैषी बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मंगलवार को जिलाधिकारी दीपेश कुमार की अध्यक्षता में निजी स्कूल संचालकों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिले के सभी निजी स्कूलों में कक्षा 6 और उससे ऊपर की कक्षाओं में केवल NCERT की पुस्तकें ही अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाएंगी। 1 से 5 तक हिंदी भाषा में ‘कॉन्सेप्ट बेस्ड’ पढ़ाई पर जोर इस कदम से अभिभावकों को महंगी निजी प्रकाशकों की किताबों से राहत मिलेगी और शिक्षा में एकरूपता आएगी। कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों के लिए हिंदी भाषा में ‘कॉन्सेप्ट बेस्ड’ पढ़ाई पर जोर दिया जाएगा, ताकि उनकी बुनियादी समझ मजबूत हो सके। जिलाधिकारी ने निजी स्कूलों द्वारा ड्रेस, किताब और कॉपी की खरीद में की जाने वाली मनमानी पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी विशेष दुकान या स्कूल से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार कहीं से भी ये वस्तुएं खरीद सकेंगे, जिससे कमीशनखोरी पर अंकुश लगने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, स्कूल समय के दौरान किसी भी प्रकार के कोचिंग संस्थान के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रशासन का मानना है कि यह कदम छात्रों की स्कूल में उपस्थिति बढ़ाने और शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार लाने में सहायक होगा। सुरक्षा के मुद्दे पर भी प्रशासन ने सख्ती बरती है। जिलाधिकारी ने स्कूल बसों और वैन के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द ही अधिकारियों की टीम द्वारा औचक निरीक्षण किया जाएगा और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैठक में नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा, अपर समाहर्ता निशांत, जिला शिक्षा पदाधिकारी हेमचंद्र सहित कई वरीय अधिकारी उपस्थित थे। जिले के कई प्रमुख निजी विद्यालयों के संचालक और प्रतिनिधियों ने भी इस बैठक में भाग लिया। सहरसा में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और अभिभावक-हितैषी बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मंगलवार को जिलाधिकारी दीपेश कुमार की अध्यक्षता में निजी स्कूल संचालकों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिले के सभी निजी स्कूलों में कक्षा 6 और उससे ऊपर की कक्षाओं में केवल NCERT की पुस्तकें ही अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाएंगी। 1 से 5 तक हिंदी भाषा में ‘कॉन्सेप्ट बेस्ड’ पढ़ाई पर जोर इस कदम से अभिभावकों को महंगी निजी प्रकाशकों की किताबों से राहत मिलेगी और शिक्षा में एकरूपता आएगी। कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों के लिए हिंदी भाषा में ‘कॉन्सेप्ट बेस्ड’ पढ़ाई पर जोर दिया जाएगा, ताकि उनकी बुनियादी समझ मजबूत हो सके। जिलाधिकारी ने निजी स्कूलों द्वारा ड्रेस, किताब और कॉपी की खरीद में की जाने वाली मनमानी पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी विशेष दुकान या स्कूल से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार कहीं से भी ये वस्तुएं खरीद सकेंगे, जिससे कमीशनखोरी पर अंकुश लगने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, स्कूल समय के दौरान किसी भी प्रकार के कोचिंग संस्थान के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रशासन का मानना है कि यह कदम छात्रों की स्कूल में उपस्थिति बढ़ाने और शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार लाने में सहायक होगा। सुरक्षा के मुद्दे पर भी प्रशासन ने सख्ती बरती है। जिलाधिकारी ने स्कूल बसों और वैन के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द ही अधिकारियों की टीम द्वारा औचक निरीक्षण किया जाएगा और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैठक में नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा, अपर समाहर्ता निशांत, जिला शिक्षा पदाधिकारी हेमचंद्र सहित कई वरीय अधिकारी उपस्थित थे। जिले के कई प्रमुख निजी विद्यालयों के संचालक और प्रतिनिधियों ने भी इस बैठक में भाग लिया।


