Mahasamund News: @जितेंद्र सत्तपार्थी। आधी रात के सन्नाटे में ओडिशा बॉर्डर से लगी सुनसान सड़क पर एक एम्बुलेंस तेज रफ्तार में दौड़ती है। सायरन लगातार बज रहा है, शीशों पर रेडक्रॉस का निशान है और अंदर स्ट्रेचर भी मौजूद है। पहली नजर में लगता है जैसे किसी मरीज की जान बचाने की जंग चल रही हो, लेकिन जैसे ही पुलिस नाकेबंदी कर इसे रोकती है, पूरी कहानी पलट जाती है। स्ट्रेचर हटते ही उसके नीचे बने गुप्त केबिन से करोड़ों रुपए के गांजे के पैकेट निकलने लगते हैं।
Mahasamund News: तस्करी ने नए-नए पैंतरे सामने आए
यह किसी थ्रिलर फिल्म का सीन नहीं, बल्कि महासमुंद जिले में हर हफ्ते सामने आ रही ‘ग्रीन ड्रग ट्रेल’ की हकीकत है। ‘पत्रिका ग्राउंड रिपोर्ट’ की विशेष पड़ताल में तस्करी के ऐसे हैरतअंगेज पैंतरे सामने आए हैं, जो साबित करते हैं कि यह काला कारोबार अब सिर्फ सीमावर्ती अपराध नहीं रहा, बल्कि एक संगठित और हाईटेक नार्को सप्लाई चेन का रूप ले चुका है। ओडिशा के जंगलों से निकलने वाला गांजा अब महासमुंद के रास्ते देश के कोने-कोने तक पहुंच रहा है। पत्रिका ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, इस सिंडिकेट ने सुरक्षा एजेंसियों को छकाने के लिए छत्तीसगढ़ से देश के अन्य राज्यों में माल भेजने के लिए 4 पक्के कॉरिडोर बना लिए हैं। देश में ड्रग्स नेटवर्क को लेकर अक्सर पंजाब, मुंबई या दिल्ली की चर्चा होती है, लेकिन छत्तीसगढ़ का महासमुंद अब देश के सबसे बड़े गांजा ट्रांजिट हब के रूप में उभरा है। पिछले साढ़े चार महीने की पुलिस कार्रवाई के आंकड़े इसकी गवाही देते हैं।
सिर्फ 4.5 महीने का लेखा-जोखा
कुल दर्ज प्रकरण: 89
जब्त गांजा: 6348.881 किलोग्राम
अनुमानित कीमत: 31.65 करोड़ रुपए लगभग
गिरफ्तार आरोपी: 12 राज्यों के 233 तस्कर
बाहरी राज्यों के आरोपी: 178 (लोकल अपराधियों से कई गुना अधिक)
4 प्रमुख नार्को कॉरिडोर
- महासमुंद-रायपुर-दुर्ग-राजनांदगांव कॉरिडोर
यह नेटवर्क का सबसे व्यस्त और बड़ा रूट है। हर दिन हजारों भारी वाहनों के मूवमेंट के बीच तस्कर भीड़ का फायदा उठाते हैं। तरबूज, केला, कटहल जैसी सब्जियों-फलों या फर्नीचर से भरे ट्रकों के नीचे गांजा छिपाकर नागपुर, मुंबई, पुणे, जयपुर और हरियाणा तक सप्लाई भेजी जाती है।
- सारंगढ़-रायगढ़-बिलासपुर-पेंड्रा-कटनी लाइन
यह रास्ता लंबा जरूर है, लेकिन पुलिस की निगरानी अपेक्षाकृत कम होने के कारण तस्करों को काफी पसंद आता है। कटनी पहुंचते ही यह नेटवर्क दो हिस्सों (मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश) में बंट जाता है। इस रूट पर सबसे ज्यादा निजी लग्जरी कारों का इस्तेमाल होता है।
- महासमुंद-बलौदाबाजार-बेमेतरा-कवर्धा बेल्ट
यह नया और तेजी से सक्रिय हुआ ग्रामीण कॉरिडोर है। तस्कर मुख्य हाईवे छोड़कर अंदरूनी ग्रामीण सड़कों और लिंक रोड का इस्तेमाल करते हैं, जहां पुलिस की परमानेंट चेकिंग नहीं होती।
- कांकेर-गरियाबंद-धमतरी जंगल कॉरिडोर
इसे सबसे खतरनाक रूट माना जा रहा है। यहां हाईवे से ज्यादा जंगलों और कच्चे रास्तों का सहारा लिया जाता है। तस्कर जरूरत पड़ने पर गाड़ियों को जंगलों में ही छोड़ भाग जाते हैं। यह रूट मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र नेटवर्क को जोड़ता है।
हर बार नया चेहरा, नया पैंतरा
पुलिस की सख्ती बढ़ने के साथ ही तस्करों का तरीका भी बेहद प्रोफेशनल हो चुका है। कारों की सीट, बोनट और दरवाजों के खाली स्पेस में विशेष गुप्त चैंबर होते हैं। चेकिंग के दौरान शक से बचने के लिए गाड़ियों में महिलाओं और बच्चों को साथ बैठाकर पारिवारिक यात्रा का ढोंग रचना जा रहा है। पैकर्स एंड मूवर्स की गाड़ियों में घरेलू सामान के नीचे या कोयले और मालवाहक कंटेनरों के भीतर गांजे की बड़ी खेप छिपाई जा रही है। स्थानीय स्तर पर छोटी खेपों के लिए बाइक, स्कूटी और लंबी दूरी के लिए ट्रेनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
महानगरों की मांग और मुनाफे का खेल
पुलिस जांच के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क की रीढ़ महानगरों में बढ़ती नशे की मांग है। ओडिशा के सोनपुर, कालाहांडी, पदमपुर और कंधमाल जैसे जंगली इलाकों में बेहद सस्ते दाम पर मिलने वाला गांजा दिल्ली, मुंबई, भोपाल और लखनऊ जैसे शहरों में पहुंचते ही कई गुना महंगी कीमत पर बिकता है। इसी भारी मुनाफे के चलते अब छोटे अपराधियों की जगह बड़े अंतर्राज्यीय सिंडिकेट और संगठित गिरोहों ने इस धंधे की कमान संभाल ली है। उनके पास अपने लोकल एजेंट और हाईवे नेटवर्क मौजूद हैं।
ओडिशा के मुख्य सोर्स पॉइंट (जब्त गांजा)
सोनपुर: 3489.340 किलो
कालाहांडी: 1468.580 किलो
पदमपुर: 570.214 किलो
कंधमाल: 428.900 किलो
नुवापाड़ा: 419.185 किलो
बालीगुड़ा: 383.600 किलो
सम्बलपुर: 235 किलो
बलांगीर: 204.299 किलो
गिरफ्तार तस्करों का राज्यवार नेटवर्क (कुल 233)
छत्तीसगढ़ (55), महाराष्ट्र (53), ओडिशा (50), मध्य प्रदेश (33), उत्तर प्रदेश (22), बिहार (5), राजस्थान (4), हरियाणा (4), गुजरात (3), झारखंड (2), कर्नाटक (1), दिल्ली (1)।
एएसपी का बयान
महासमुंद जिले में गांजा तस्करी के खिलाफ लगातार और सुनियोजित कार्रवाई की जा रही है। पुलिस केवल सप्लाई चेन पर ही प्रहार नहीं कर रही, बल्कि सोर्स पॉइंट से लेकर गांजा मंगाने वाले और इस पूरे नेटवर्क को फंड व संचालित करने वाले मुख्य सरगनाओं तक सख्ती से शिकंजा कस रही है। ओडिशा से जुड़ने वाले सभी शॉर्टकट और अंदरूनी रास्तों पर पुलिस की पैनी निगरानी है।
-प्रतिभा तिवारी, एएसपी, महासमुंद


