(तस्वीर के साथ)
नयी दिल्ली, दो नवंबर दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को छह हजार करोड़ रुपये के महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामले के कथित सरगना सौरभ चंद्राकर को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर सीबीआई को सौंप दिया। अदालत ने महादेव बुक ऐप के प्रवर्तक सौरभ चंद्राकर को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर सौंपने का अनुरोध करने वाली याचिका स्वीकार कर ली। चंद्राकर को हाल ही में ओमान से भारत लाया गया था।
अदालत ने एजेंसी को उसे चार नवंबर या उससे पहले रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश करने की अनुमति दे दी। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-विशेष न्यायाधीश निखिल चोपड़ा ने बचाव पक्ष की इस दलील को खारिज कर दिया कि गिरफ्तारी अवैध है और सीबीआई उसे हिरासत में नहीं ले सकती। अदालत ने कहा कि ऐसे सवालों पर रायपुर की अदालत को फैसला करना होगा।
सीबीआई ने यह मामला 18 दिसंबर 2024 को दर्ज किया था। छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र द्वारा अधिसूचनाएं जारी किए जाने के बाद रायपुर के राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दर्ज प्राथमिकी की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। आरोप है कि चंद्राकर और सह-आरोपी रवि उप्पल ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर महादेव बुक ऐप का प्रचार किया और पैनल तथा शाखा संचालकों के माध्यम से ऑनलाइन सट्टेबाजी का संचालन किया।
आरोपों के अनुसार, कमीशन के आधार पर सैकड़ों बैंक खाते खुलवाए गए और अवैध सट्टेबाजी से प्राप्त धनराशि विभिन्न खातों के जरिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भेजी गई। आरोप है कि आरोपियों ने दुबई से इस सिंडिकेट का संचालन किया, जिसे उसका ‘मुख्यालय’ कहा जाता था। उन्होंने बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ के युवाओं को प्रबंधक के तौर पर नियुक्त किया था।
सीबीआई ने सोमवार को अदालत को बताया कि चंद्राकर के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है और रायपुर के विशेष सीबीआई न्यायाधीश द्वारा नौ सितंबर 2026 को जारी गैर-जमानती वारंट अब भी लंबित है। यह वारंट किसी निश्चित अवधि तक सीमित नहीं है। सीबीआई ने कहा कि आरोपी को जाली यात्रा दस्तावेजों के आधार पर अवैध रूप से प्रवेश करने के आरोप में ओमान में हिरासत में लिया गया था और बाद में उसे भारत प्रत्यर्पित किया गया।
सीबीआई ने कहा कि उसे वैधानिक समय-सीमा के भीतर आरोपी को रायपुर की अदालत में पेश करने के लिए ट्रांजिट रिमांड की आवश्यकता थी। हालांकि, बचाव पक्ष ने दलील दी कि ओमान की सर्वोच्च न्यायिक परिषद के मस्कट स्थित अपील न्यायालय ने केवल प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस प्रत्यर्पण याचिका पर विचार किया था, जो रायपुर के विशेष न्यायाधीश की अदालत में लंबित धनशोधन मामले के संबंध में दायर की गई थी। अदालत ने सीबीआई की किसी प्रत्यर्पण याचिका पर विचार नहीं किया था।
चंद्राकर के वकील ने एजेंसी की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के मामले में ओमान से प्रत्यर्पित किया गया है, न कि सीबीआई के मामले में। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कहा कि धनशोधन मामले में चंद्राकर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किया गया था और इसलिए वह भी उसे गिरफ्तार करना चाहता था। चंद्राकर सीबीआई के दो और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक मामले में वांछित है।
इन सभी मामलों में आरोपपत्र पहले ही दाखिल किए जा चुके हैं। सीबीआई की ओर से पेश हुए वरिष्ठ लोक अभियोजक वी. के. पाठक ने कहा कि बचाव पक्ष द्वारा पेश ओमान की अदालत के आदेश की प्रति न तो प्रमाणित थी और न ही उस पर प्रामाणिकता की मुहर लगी थी। यह भी स्पष्ट नहीं था कि वह उसका अनुवाद था या नहीं।
उन्होंने कहा कि सीबीआई ने भी प्रत्यर्पण का अनुरोध किया था और उसे ओमान सरकार से आरोपी को वापस भेजे जाने की सूचना मिली थी। पाठक ने कहा कि ईडी का मामला सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे अनुसूचित अपराध से जुड़ा है और रायपुर के उसी विशेष न्यायाधीश के समक्ष दोनों मामले विचाराधीन हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी आधार पर ट्रांजिट रिमांड देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कहा कि उसके समक्ष पेश ओमान की अदालत के आदेश की प्रति न तो प्रमाणित थी और न ही उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि की गई थी। अदालत ने कहा कि दस्तावेज से ही पता चलता है कि भारत द्वारा शुरू की गई प्रत्यर्पण कार्यवाही के दौरान 29 जुलाई 2022 के एक आरोपपत्र की प्रति ओमान की अदालत के समक्ष पेश की गई थी। याचिका स्वीकार करते हुए अदालत ने आरोपी को चार नवंबर या उससे पहले रायपुर में सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश के समक्ष पेश करने की अनुमति दी।

