Magnus Carlsen का दबदबा बरकरार, Esports World Cup में Denis Lazavik को हराकर बने लगातार दूसरी बार चैंपियन

Magnus Carlsen का दबदबा बरकरार, Esports World Cup में Denis Lazavik को हराकर बने लगातार दूसरी बार चैंपियन

पेरिस में शतरंज की दुनिया के सबसे बड़े नाम मैग्नस कार्लसन ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित कर दी है। दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी ने ई-स्पोर्ट्स विश्व कप का खिताब लगातार दूसरी बार अपने नाम कर लिया। टीम लिक्विड की ओर से खेल रहे 35 वर्षीय नॉर्वे के ग्रैंडमास्टर ने फाइनल में बेलारूस के ग्रैंडमास्टर डेनिस लाजाविक को 2-0 से हराकर ट्रॉफी जीती है।खास बात यह रही कि पूरे टूर्नामेंट में कार्लसन को एक भी हार नहीं मिली। उन्होंने शुरुआत से लेकर फाइनल तक लगातार शानदार प्रदर्शन किया और छोटे समय नियंत्रण वाले ऑनलाइन शतरंज में अपनी पकड़ का एक बार फिर प्रदर्शन किया। फाइनल में भी कार्लसन ने लाजाविक को कोई मौका नहीं दिया और दो मैचों में जरूरी बढ़त हासिल कर खिताब अपने नाम कर लिया।बता दें कि इस प्रतियोगिता का प्रारूप सामान्य शतरंज मुकाबलों से थोड़ा अलग था। खिलाड़ियों के बीच मुकाबले तीन चरणों की अधिकतम व्यवस्था के तहत खेले गए। शुरुआती दो चरणों में चार-चार बाजियां रखी गई थीं। अगर दोनों खिलाड़ियों के बीच बराबरी रहती तो अंतिम चरण में दो बाजियों के जरिए विजेता का फैसला होना था। हालांकि कार्लसन और लाजाविक के फाइनल में इसकी जरूरत नहीं पड़ी।फाइनल के दोनों मुकाबलों में कार्लसन ने पहली और चौथी बाजी जीतकर जरूरी बढ़त हासिल की। उन्होंने दोनों मुकाबलों में 2-0 की स्पष्ट जीत दर्ज की और कुल 2 मैच अंक हासिल करके खिताब पर कब्जा कर लिया। लाजाविक को कार्लसन की आक्रामक शैली और तेज फैसलों का लगातार सामना करना पड़ा।खिताब जीतने के बाद कार्लसन ने कहा कि इस प्रारूप में उनके विरोधियों के लिए उनके स्तर की बराबरी करना और उन्हें चुनौती देना मुश्किल रहता है। खासकर कम समय वाली ऑनलाइन बाजियों में कार्लसन की तेजी, अनुभव और दबाव में सही फैसला लेने की क्षमता उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है।गौरतलब है कि इस प्रतियोगिता में अमेरिका के ग्रैंडमास्टर हिकारू नाकामुरा ने तीसरा स्थान हासिल किया। उन्होंने कांस्य पदक के मुकाबले में फ्रांस के अलीरेजा फिरोजजा को 4-1 से हराया। हालांकि यह मुकाबला तकनीकी परेशानियों के कारण कई बार बाधित हुआ। इंटरनेट संपर्क टूटने और दूसरी तकनीकी दिक्कतों की वजह से खिलाड़ियों को कई बार खेल रोकना पड़ा।मौजूद जानकारी के अनुसार, कार्लसन के लिए यह जीत ऑनलाइन तेज शतरंज में उनकी निरंतरता को दिखाती है। वह लंबे समय से पारंपरिक शतरंज के साथ तेज और ऑनलाइन प्रारूपों में भी अपना दबदबा बनाए हुए हैं। ई-स्पोर्ट्स विश्व कप में लगातार दूसरी बार चैंपियन बनना इस बात का संकेत है कि समय का दबाव बढ़ने के बावजूद कार्लसन अपनी रणनीति और खेल की गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं करते है।कार्लसन की इस जीत के साथ टीम लिक्विड ने भी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन दर्ज किया है। वहीं डेनिस लाजाविक के लिए फाइनल तक पहुंचना बड़ी उपलब्धि रही। हिकारू नाकामुरा और अलीरेजा फिरोजजा के बीच कांस्य मुकाबले ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा। 

पेरिस में शतरंज की दुनिया के सबसे बड़े नाम मैग्नस कार्लसन ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित कर दी है। दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी ने ई-स्पोर्ट्स विश्व कप का खिताब लगातार दूसरी बार अपने नाम कर लिया। टीम लिक्विड की ओर से खेल रहे 35 वर्षीय नॉर्वे के ग्रैंडमास्टर ने फाइनल में बेलारूस के ग्रैंडमास्टर डेनिस लाजाविक को 2-0 से हराकर ट्रॉफी जीती है।
खास बात यह रही कि पूरे टूर्नामेंट में कार्लसन को एक भी हार नहीं मिली। उन्होंने शुरुआत से लेकर फाइनल तक लगातार शानदार प्रदर्शन किया और छोटे समय नियंत्रण वाले ऑनलाइन शतरंज में अपनी पकड़ का एक बार फिर प्रदर्शन किया। फाइनल में भी कार्लसन ने लाजाविक को कोई मौका नहीं दिया और दो मैचों में जरूरी बढ़त हासिल कर खिताब अपने नाम कर लिया।
बता दें कि इस प्रतियोगिता का प्रारूप सामान्य शतरंज मुकाबलों से थोड़ा अलग था। खिलाड़ियों के बीच मुकाबले तीन चरणों की अधिकतम व्यवस्था के तहत खेले गए। शुरुआती दो चरणों में चार-चार बाजियां रखी गई थीं। अगर दोनों खिलाड़ियों के बीच बराबरी रहती तो अंतिम चरण में दो बाजियों के जरिए विजेता का फैसला होना था। हालांकि कार्लसन और लाजाविक के फाइनल में इसकी जरूरत नहीं पड़ी।
फाइनल के दोनों मुकाबलों में कार्लसन ने पहली और चौथी बाजी जीतकर जरूरी बढ़त हासिल की। उन्होंने दोनों मुकाबलों में 2-0 की स्पष्ट जीत दर्ज की और कुल 2 मैच अंक हासिल करके खिताब पर कब्जा कर लिया। लाजाविक को कार्लसन की आक्रामक शैली और तेज फैसलों का लगातार सामना करना पड़ा।
खिताब जीतने के बाद कार्लसन ने कहा कि इस प्रारूप में उनके विरोधियों के लिए उनके स्तर की बराबरी करना और उन्हें चुनौती देना मुश्किल रहता है। खासकर कम समय वाली ऑनलाइन बाजियों में कार्लसन की तेजी, अनुभव और दबाव में सही फैसला लेने की क्षमता उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है।
गौरतलब है कि इस प्रतियोगिता में अमेरिका के ग्रैंडमास्टर हिकारू नाकामुरा ने तीसरा स्थान हासिल किया। उन्होंने कांस्य पदक के मुकाबले में फ्रांस के अलीरेजा फिरोजजा को 4-1 से हराया। हालांकि यह मुकाबला तकनीकी परेशानियों के कारण कई बार बाधित हुआ। इंटरनेट संपर्क टूटने और दूसरी तकनीकी दिक्कतों की वजह से खिलाड़ियों को कई बार खेल रोकना पड़ा।
मौजूद जानकारी के अनुसार, कार्लसन के लिए यह जीत ऑनलाइन तेज शतरंज में उनकी निरंतरता को दिखाती है। वह लंबे समय से पारंपरिक शतरंज के साथ तेज और ऑनलाइन प्रारूपों में भी अपना दबदबा बनाए हुए हैं। ई-स्पोर्ट्स विश्व कप में लगातार दूसरी बार चैंपियन बनना इस बात का संकेत है कि समय का दबाव बढ़ने के बावजूद कार्लसन अपनी रणनीति और खेल की गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं करते है।
कार्लसन की इस जीत के साथ टीम लिक्विड ने भी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन दर्ज किया है। वहीं डेनिस लाजाविक के लिए फाइनल तक पहुंचना बड़ी उपलब्धि रही। हिकारू नाकामुरा और अलीरेजा फिरोजजा के बीच कांस्य मुकाबले ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा।

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