तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने शुक्रवार को मद्रास उच्च न्यायालय का रुख कर निर्वाचन आयोग द्वारा राज्य विधानसभा की खाली पांच सीट पर उपचुनाव कराने को लेकर कोई भी अधिसूचना जारी करने पर उसके द्वारा लगाई गई रोक को हटाने का अनुरोध किया। विधानसभा की ये सीट अप्रैल 2026 के निर्वाचित हुए सदस्यों के इस्तीफे से खाली हुई हैं। विजय ने वकील के. वेंकटाचलपति द्वारा दायर जनहित याचिका के जवाब में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में उपचुनाव कराने की वकालत की है।
इन निर्वाचन क्षेत्रों में तिरुचिरापल्ली (पूर्व) विधानसभा क्षेत्र भी शामिल है जहां से निर्वाचित होने के बाद विजय ने इस्तीफा दे दिया था क्योंकि उन्होंने दो सीट से चुनाव लड़ा था और दोनों पर विजयी हुए थे। मुख्य न्यायाधीश एस ए धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की पीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए 10 जुलाई को अंतरिम आदेश दिया था। इसमें विजय के अलावा ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के पूर्व विधायक एम आर विजयभास्कर (करूर), सी विजयभास्कर (विरालिमालई), एस जयकुमार (पेरुंदुरई) और अंबासमुद्रम के एसकी सुब्बैया को निर्देश दिया था कि वे सभी तथ्यात्मक और कानूनी दावों का जवाब देते हुए विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करें।
इन सभी ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। विजय ने अपने जवाबी हलफनामें में जनहित याचिका को भारी जुर्माने के साथ खारिज करने का अनुरोध किया। याचिका में अनुरोध किया गया है कि अदालत घोषित करे कि विधानसभा चुनावों में चुने गए अलग-अलग उम्मीदवारों के इस्तीफे से खाली हुई सीट, ‘ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 151-ए के तहत उपचुनाव कराने के उद्देश्य से ‘पूर्ण रूप से रिक्त’ या उपलब्ध सीटें नहीं मानी जाएंगी।
विजय ने दलील दी कि याचिकाकर्ता के पास याचिका दायर करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है, क्योंकि वह चुनाव याचिका दायर करने के योग्य नहीं है। ऐसे व्यक्ति या तीसरे पक्ष द्वारा दायर चुनाव याचिकाओं के आधार पर सुनवाई नहीं की जा सकती, जिनका याचिकाकर्ता से कोई लेना-देना नहीं है। मुख्यमंत्री ने दलील दी कि भले ही यह मान लिया जाए (बिना यह स्वीकार किए) कि खाली सीटों पर उपचुनाव टालने का अनुरोध करने का अधिकार किसी को भी हो सकता है, तो वह अधिकार चुनाव याचिकाकर्ताओं का ही होगा।
हालांकि, तिरुचिरापल्ली (पूर्व) विधानसभा क्षेत्र के मामले में चुनाव याचिकाकर्ता की ओर से कोई अर्जी दाखिल नहीं की गई है। इसलिए, याचिकाकर्ता एक ‘छद्म युद्ध’ लड़ रहा है और इस याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खारिज कर दिया जाना चाहिए।

