Lungs Cancer Cause: फल, सब्जियां और साबुत अनाज को हेल्दी माना जाता है। क्या हो जब आपको ये कहा जाए कि ये ही आपको फेफड़ों के कैंसर का शिकार बना सकता है। अमेरिका के यूएससी नॉरिस कॉम्प्रिहेंसिव कैंसर सेंटर में हुई एक रिसर्च में ये बात सामने आई है कि जो लोग फल, सब्जियां और साबुत अनाज का सेवन करते हैं। उनमें फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इसमें सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये सामने आई है कि जिन लोगों की उम्र 50 साल से कम है और उन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया उनमें ये खतरा ज्यादा है।
आइए जानते हैं कि क्या है ये नई रिसर्च।
हेल्दी डाइट से कैसे बढ़ रहा है कैंसर का खतरा?
जो लोग अपनी सेहत को लेकर बहुत सजग हैं, वे आम लोगों के मुकाबले कहीं ज्यादा फल और सलाद खाते हैं। रिसर्च का कहना है कि फल, सब्जियां और साबुत अनाज (Whole Grains) उगाने के लिए आजकल बहुत ज्यादा पेस्टिसाइड्स (कीटनाशकों) का इस्तेमाल होता है।
मांस या डेयरी प्रोडक्ट्स के मुकाबले, ताजे फलों और अनाज पर इन रसायनों का असर ज्यादा होता है। यही रसायन हमारे शरीर में जाकर कोशिकाओं (cells) को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे कैंसर पनपने लगता है।
धूम्रपान नहीं करने वालों पर ज्यादा असर क्यों?
फेफड़ों का कैंसर आमतौर पर स्मोकिंग से जुड़ा होता है, लेकिन यह रिसर्च उन लोगों पर की गई जो नॉन-स्मोकर्स हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि हवा के प्रदूषण के साथ-साथ, खाने के जरिए शरीर में पहुंचने वाले ये केमिकल फेफड़ों की नसों और ऊतकों (tissues) को सीधा नुकसान पहुंचा रहे हैं।
50 साल से कम उम्र की महिलाओं में यह खतरा ज्यादा देखा जा रहा है क्योंकि उनकी डाइट में फल और अनाज की मात्रा अधिक होती है।
साबुत अनाज (Whole Grains) से कैसे जुड़ा है फेफड़ों का कैंसर?
साबुत अनाज को हम फाइबर के लिए अच्छा मानते हैं, लेकिन अनाज को कीड़ों से बचाने के लिए उन पर रसायनों का लेप किया जाता है। रिसर्च के मुताबिक, यह भी अर्ली ऑनसेट लंग कैंसर का एक बड़ा कारण हो सकता है।
अर्ली ऑनसेट लंग कैंसर से बचने के लिए क्या करें?
- फल और सब्जियों को धोकर खाएं।
- फलों का छिलका उतारकर खाएं।
- ऑर्गेनिक सब्जियां और अनाज खरीदने का प्रयास करें।
- सीने में दर्द हो या सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


