गोपालगंज के मॉडल सदर अस्पताल में लिफ्ट खराब होने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर गर्भवती महिलाओं और किडनी के मरीजों को इलाज के लिए तीसरी मंजिल तक सीढ़ियों से जाना पड़ रहा है, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। अस्पताल में पिछले कुछ दिनों से लिफ्ट बंद पड़ी है। प्रसव पीड़ा या नियमित जांच के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को सीढ़ियां चढ़नी पड़ रही हैं, जो उनके और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा है। इसी तरह, डायलिसिस के लिए आने वाले किडनी के मरीजों की शारीरिक स्थिति कमजोर होती है, उनके लिए तीसरी मंजिल तक पहुंचना बेहद कठिन हो गया है। दिव्यांग और बुजुर्ग मरीजों को उनके परिजन गोद में उठाकर ले जाने को मजबूर हैं। नियमों के बावजूद, कंपनी की उदासीनता स्पष्ट सदर अस्पताल को ‘मॉडल’ अस्पताल का दर्जा तो दिया गया है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में यह नाम बेमानी साबित हो रहा है। नए भवन का निर्माण करने वाली कंपनी के साथ हुए करार के अनुसार, अगले तीन सालों तक लिफ्ट के रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी उसी कंपनी की है। नियमों के बावजूद, कंपनी की उदासीनता स्पष्ट दिख रही है। संबंधित एजेंसी को लिफ्ट खराब होने की सूचना दे दी – अस्पताल प्रशासन अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उन्होंने संबंधित एजेंसी को लिफ्ट खराब होने की सूचना दे दी है। हालांकि, सवाल यह उठता है कि जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य केंद्र में वैकल्पिक व्यवस्था या आपातकालीन मरम्मत की प्रक्रिया इतनी धीमी क्यों है। जब तक स्वास्थ्य सुविधाएं जरूरतमंदों के काम न आएं, तब तक उनका भव्य ढांचा निरर्थक है। गोपालगंज के मॉडल सदर अस्पताल में लिफ्ट खराब होने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर गर्भवती महिलाओं और किडनी के मरीजों को इलाज के लिए तीसरी मंजिल तक सीढ़ियों से जाना पड़ रहा है, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। अस्पताल में पिछले कुछ दिनों से लिफ्ट बंद पड़ी है। प्रसव पीड़ा या नियमित जांच के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को सीढ़ियां चढ़नी पड़ रही हैं, जो उनके और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा है। इसी तरह, डायलिसिस के लिए आने वाले किडनी के मरीजों की शारीरिक स्थिति कमजोर होती है, उनके लिए तीसरी मंजिल तक पहुंचना बेहद कठिन हो गया है। दिव्यांग और बुजुर्ग मरीजों को उनके परिजन गोद में उठाकर ले जाने को मजबूर हैं। नियमों के बावजूद, कंपनी की उदासीनता स्पष्ट सदर अस्पताल को ‘मॉडल’ अस्पताल का दर्जा तो दिया गया है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में यह नाम बेमानी साबित हो रहा है। नए भवन का निर्माण करने वाली कंपनी के साथ हुए करार के अनुसार, अगले तीन सालों तक लिफ्ट के रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी उसी कंपनी की है। नियमों के बावजूद, कंपनी की उदासीनता स्पष्ट दिख रही है। संबंधित एजेंसी को लिफ्ट खराब होने की सूचना दे दी – अस्पताल प्रशासन अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उन्होंने संबंधित एजेंसी को लिफ्ट खराब होने की सूचना दे दी है। हालांकि, सवाल यह उठता है कि जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य केंद्र में वैकल्पिक व्यवस्था या आपातकालीन मरम्मत की प्रक्रिया इतनी धीमी क्यों है। जब तक स्वास्थ्य सुविधाएं जरूरतमंदों के काम न आएं, तब तक उनका भव्य ढांचा निरर्थक है।


