”दुधमुंही बच्ची घर पर अकेली, मां गंगा घाट पर फंसी”:पति बोला-नाव से नहीं जाने दिया; विक्रमशिला पुल टूटा, नवगछिया नहीं जा पा रहे 100 लोग

”दुधमुंही बच्ची घर पर अकेली, मां गंगा घाट पर फंसी”:पति बोला-नाव से नहीं जाने दिया; विक्रमशिला पुल टूटा, नवगछिया नहीं जा पा रहे 100 लोग

“पत्नी बीमार है, डॉक्टर को दिखाने के लिए भागलपुर आया था। सुबह शहर तक पहुंच गए, लेकिन शाम के 5 बजे से पहले हम गंगा किनारे आ गए। प्रशासन ने नाव के जरिए हमें घर जाने नहीं दिया। नाव वाले भी ले जाने को तैयार नहीं हैं। घर में एक छोटी बच्ची अकेली है, दोनों पति-पत्नी इधर ही फंस गए हैं। बच्ची भूखे होगी, उसकी मां यही है, दूध कौन पिलाएगा।” यह कहना संगीता के पति दिनेश कुमार का है। जो नवगछिया इलाके के रहने वाले है। मंगलवार को वह भागलपुर के बरारी गंगा घाट पर पहुंचे थे, लेकिन उन्हें नाव से नवगछिया की तरफ नहीं जाने दिया गया। भास्कर रिपोर्टर ने लोगों की परेशानी, प्रशासन के नियम और लोगों की मजबूरी को करीब से समझा। जानिए क्या है पूरा मामला… दरअसल, भागलपुर को सीमांचल को जोड़ने वाली विक्रमशिला सेतु का स्लैब टूट गया। इसके बाद सड़क रास्ता पूरी तरह बाधित हो गया है। जिला प्रशासन की तरफ से नाव की व्यवस्था की गई है। पहले दिन देर रात तक नाव नहीं चलाई गई, जिसके बाद कारगिल दियारा में 100 लोग लोग फंस गए। जिला प्रशासन ने नाव संचालन के लिए निर्धारित समय तय कर दिया है। सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक ही नाव चलाने की इजाजत दी जा रही है, जिसके कारण व्यापारियों से लेकर स्टूडेंट्स और मरीजों को नवगछिया की तरफ से भागलपुर आने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दूध वाले बोले- खाना तक नहीं खाया, यहां फंस गया हूं बरारी घाट से नवगछिया जाने के लिए पहुंचे पवन कुमार यादव ने बताया, गांव में हमारी 10 बीघा फसल तैयार है, जो हमारी रोजी-रोटी का साधन है। मैं यहां शाम 5 बजे से पहले यहां आ गया था। भीड़ के कारण नाव पर चढ़ नहीं पाया और अब यहीं फंस गया हूंं। मैंने खाना तक नहीं खाया है। यहां रहने की भी कोई व्यवस्था नहीं है। दूध बेचने के लिए रोज की तरह आज भी भागलपुर आया था। और नाव का ₹100 किराया दिया था, लेकिन कोई रसीद नहीं मिली। शाम में जब दूध बेचकर लौटा तो नाविक ने कहा, “5 बज गए, अब मैं नहीं जाऊंगा।” गोलू यादव ने बताया कि “मैं भी दूध बेचने के लिए भागलपुर आया था और नाव का ₹100 किराया दिया था। मैं शाम करीब 4:45 बजे यहां पहुंचा, लेकिन भीड़ के कारण आगे नहीं जा पाया। मेरा घर उस पार परबत्ता में है, यहां रुकने की कोई व्यवस्था नहीं है। मुझे काफी परेशानी हो रही है।” घर में बच्चे और पत्नी अकेली शंकर झा ने बताया कि “दिक्कत बहुत है, अब समझ नहीं आ रहा कि कहां और कैसे रहूंगा। घर पर पत्नी और दो बच्चे हैं। मैं यहां फंसा हू और उधर गाय-बछड़े भूखे हैं, उनकी चिंता अलग सता रही है। हम लोग दूध रोज बेचने के लिए भागलपुर आते हैं, लेकिन आज पांच बजे ही नाव बंद कर दी गई, जिसके कारण हम लोग घर नहीं जा पा रहे हैं।” उन्होंने कहा, “घर में बच्चे और पत्नी अकेले हैं, जानवर भूखे होंगे। हम लोगों के लिए कम से कम 6 बजे तक आने-जाने की व्यवस्था होनी चाहिए।” ललिता देवी ने बताया- “मेरा घर बनिया लालपुर, अगुवानी में है। बच्चे की तबीयत खराब है, डॉक्टर को दिखाने आई थी। टीका दिलवाने के लिए आई थी। अब घर जा रही हूं। मैं यहां 11:00 बजे आई थी। लेकिन चार बजे तक नाव बंद कर दी गई। अब कैसे जाऊंगी, सवारी की व्यवस्था होगी तब ही जाना संभव है।मैं आधा घंटा से इंतजार कर रही हूं। घर में बच्चे भूखे-प्यासे हैं। घर पर चार-पांच बच्चे हैं और उनके साथ सिर्फ बुजुर्ग पिता हैं।” यात्रियों के ठहरने के लिए शिविर की व्यवस्था जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि “भागलपुर के बरारी घाट, बाबूपुर घाट और नवगछिया के महादेवपुर घाट पर यात्रियों के आवागमन के लिए जिला प्रशासन की ओर से समुचित और व्यापक व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। घाटों को समतल कर नाव तक आसान पहुंचने का रास्ता बनाया गया है। यात्रियों के ठहरने के लिए शिविर की व्यवस्था की गई है, जहां चिकित्सा सुविधा, जिला नियंत्रण कक्ष और बिजली की समुचित व्यवस्था उपलब्ध है। मैं खुद लगातार स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ बना रहा हूं। यात्रियों की सुविधा के लिए लगभग 800 से 1000 क्षमता वाले दो बड़े स्टीमर का संचालन जल्द शुरू होने की संभावना है। फिलहाल, नाव और अन्य साधनों की पर्याप्त उपलब्धता है, जिससे किसी भी यात्री को प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ रही है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रत्येक नाव पर गोताखोरों की तैनाती की जा रही है। घाटों पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की गई है । साथ ही स्ट्रेचर और एंबुलेंस की भी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।” अब जानिए ग्राउंड पर क्या स्थिति है डीएम ने निर्देश दिया कि शाम 5 बजे तक ही नाव चलेगी। मजदूरों को छुट्टी शाम के 6 बजे मिलती है। सैकड़ों की संख्या में मजदूर 6 बजे बरारी गंगा घाट पर पहुंचे, वहां पर उन्हें नाव के जरिए नवगछिया की तरफ नहीं जाने दिया गया। 7:30 बजे तक नवगछिया की ओर से भागलपुर आने के लिए नाव का परिचालन होता रहा, जिस पर ओवरलोड लोग सवार थे। छोटी नाव पर जहां 20 लोगों की बैठने की जगह थी, वहां नाव में 50 लोगों को लेकर आवागमन करते नजर आए। मंगलवार को इसी को लेकर लोगों ने विरोध जताया। स्थानीय लोगों ने एक साथ कहा, नवगछिया की तरफ से नाव भागलपुर की ओर आ रही है, लेकिन भागलपुर की तरफ से नवगछिया की ओर नाव क्यों नहीं दी जा रही है। हम लोग मजदूर हैं, शाम में 6:00 बजे हमें छुट्टी मिलती है, तो हम लोग 5 बजे कैसे आएंगे। हम लोगों के लिए व्यवस्था करने की जरूरत है। दूध के डीलर के लिए सबसे ज्यादा परेशानी सैकड़ों लीटर दूध लेकर नवगछिया से व्यापारी भागलपुर आए, लेकिन शाम में उन्हें जाने की इजाजत नहीं दी गई। भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के हिस्से के गिरने के बाद लगातार जांच जारी है। दूसरी ओर जल्द मरम्मतीकरण को लेकर भी वार लेवल पर काम हो रहा है। पुल निर्माण निगम के अधिकारी हों या फिर GREF (जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स) के अधिकारी हो, वह सभी स्थल का निरीक्षण कर रहे हैं। इंडियन आर्मी ने मोर्चा संभाला इंडियन आर्मी ने पूरी तरह से मोर्चा संभाल लिया है। यहां तत्काल प्रभाव से टूटे हुए हिस्से के पास स्टील प्लेट के माध्यम से फैब्रिकेटेड रास्ता तैयार करने की प्लानिंग चल रही है, जिस पर कम भार वाले गाड़ी को चलाया जा सके। अधिकारियों पुल का लेवल नाप रहे है। अन्य तकनीकी खामियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारी बोले- 3 दिनों में पुल चालू करने की कोशिश मंगलवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी व उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने भागलपुर में टूटे हुए पुल का हवाई सर्वेक्षण किया। हवा में हेलीकॉप्टर से दो राउंड लगाकर बारीकी से स्थिति का जायजा लिया। पुल हादसे के बाद से ही लगातार सम्राट चौधरी इसको लेकर एक्टिव नजर आ रहे हैं। उन्होंने रक्षा मंत्री से मुलाकात कर इस पर चर्चा की और तत्काल प्रभाव से सेवा को सुचारू रूप से चालू करने के लिए अधिकारियों को निर्देश भी दिए।। टूटे हुए हिस्से के जांच के दौरान बिहार पुल निर्माण निगम के अधिकारी आलोक बोमिक ने बताया, एक सस्पेंड स्पैन गिर गया है। वार फूटिंग जोन में इसको रिस्टोर किया जाएगा,।कम समय में हम लोग एक रास्ता तैयार करेंगे, जिस पर लाइट कमर्शियल व्हीकल को हम लोग जाने की अनुमति देंगे। मॉड्यूलर फैब्रिकेटेड बेली स्टील ब्रिज तैयार करने की प्लानिंग है। उसके एक्सपर्ट जीआरईएफ की टीम भी मौजूद है। दो-चार दिनों के अंदर एक रास्ता तैयार करने की प्लानिंग है। अभी डिसीजन फाइनल नहीं लिया गया है। जल्द पब्लिक के लिए ब्रिज होगा चालू मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के GREF के अधिकारी विपिन कुमार चंद ने बताया कि बहुत जल्द इस ब्रिज को पब्लिक के लिए चालू किया जाएगा। इसको लेकर हम लोग प्लानिंग कर रहे हैं। सारी टेक्निकल बातें जल्द शेयर की जाएंगी। “पत्नी बीमार है, डॉक्टर को दिखाने के लिए भागलपुर आया था। सुबह शहर तक पहुंच गए, लेकिन शाम के 5 बजे से पहले हम गंगा किनारे आ गए। प्रशासन ने नाव के जरिए हमें घर जाने नहीं दिया। नाव वाले भी ले जाने को तैयार नहीं हैं। घर में एक छोटी बच्ची अकेली है, दोनों पति-पत्नी इधर ही फंस गए हैं। बच्ची भूखे होगी, उसकी मां यही है, दूध कौन पिलाएगा।” यह कहना संगीता के पति दिनेश कुमार का है। जो नवगछिया इलाके के रहने वाले है। मंगलवार को वह भागलपुर के बरारी गंगा घाट पर पहुंचे थे, लेकिन उन्हें नाव से नवगछिया की तरफ नहीं जाने दिया गया। भास्कर रिपोर्टर ने लोगों की परेशानी, प्रशासन के नियम और लोगों की मजबूरी को करीब से समझा। जानिए क्या है पूरा मामला… दरअसल, भागलपुर को सीमांचल को जोड़ने वाली विक्रमशिला सेतु का स्लैब टूट गया। इसके बाद सड़क रास्ता पूरी तरह बाधित हो गया है। जिला प्रशासन की तरफ से नाव की व्यवस्था की गई है। पहले दिन देर रात तक नाव नहीं चलाई गई, जिसके बाद कारगिल दियारा में 100 लोग लोग फंस गए। जिला प्रशासन ने नाव संचालन के लिए निर्धारित समय तय कर दिया है। सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक ही नाव चलाने की इजाजत दी जा रही है, जिसके कारण व्यापारियों से लेकर स्टूडेंट्स और मरीजों को नवगछिया की तरफ से भागलपुर आने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दूध वाले बोले- खाना तक नहीं खाया, यहां फंस गया हूं बरारी घाट से नवगछिया जाने के लिए पहुंचे पवन कुमार यादव ने बताया, गांव में हमारी 10 बीघा फसल तैयार है, जो हमारी रोजी-रोटी का साधन है। मैं यहां शाम 5 बजे से पहले यहां आ गया था। भीड़ के कारण नाव पर चढ़ नहीं पाया और अब यहीं फंस गया हूंं। मैंने खाना तक नहीं खाया है। यहां रहने की भी कोई व्यवस्था नहीं है। दूध बेचने के लिए रोज की तरह आज भी भागलपुर आया था। और नाव का ₹100 किराया दिया था, लेकिन कोई रसीद नहीं मिली। शाम में जब दूध बेचकर लौटा तो नाविक ने कहा, “5 बज गए, अब मैं नहीं जाऊंगा।” गोलू यादव ने बताया कि “मैं भी दूध बेचने के लिए भागलपुर आया था और नाव का ₹100 किराया दिया था। मैं शाम करीब 4:45 बजे यहां पहुंचा, लेकिन भीड़ के कारण आगे नहीं जा पाया। मेरा घर उस पार परबत्ता में है, यहां रुकने की कोई व्यवस्था नहीं है। मुझे काफी परेशानी हो रही है।” घर में बच्चे और पत्नी अकेली शंकर झा ने बताया कि “दिक्कत बहुत है, अब समझ नहीं आ रहा कि कहां और कैसे रहूंगा। घर पर पत्नी और दो बच्चे हैं। मैं यहां फंसा हू और उधर गाय-बछड़े भूखे हैं, उनकी चिंता अलग सता रही है। हम लोग दूध रोज बेचने के लिए भागलपुर आते हैं, लेकिन आज पांच बजे ही नाव बंद कर दी गई, जिसके कारण हम लोग घर नहीं जा पा रहे हैं।” उन्होंने कहा, “घर में बच्चे और पत्नी अकेले हैं, जानवर भूखे होंगे। हम लोगों के लिए कम से कम 6 बजे तक आने-जाने की व्यवस्था होनी चाहिए।” ललिता देवी ने बताया- “मेरा घर बनिया लालपुर, अगुवानी में है। बच्चे की तबीयत खराब है, डॉक्टर को दिखाने आई थी। टीका दिलवाने के लिए आई थी। अब घर जा रही हूं। मैं यहां 11:00 बजे आई थी। लेकिन चार बजे तक नाव बंद कर दी गई। अब कैसे जाऊंगी, सवारी की व्यवस्था होगी तब ही जाना संभव है।मैं आधा घंटा से इंतजार कर रही हूं। घर में बच्चे भूखे-प्यासे हैं। घर पर चार-पांच बच्चे हैं और उनके साथ सिर्फ बुजुर्ग पिता हैं।” यात्रियों के ठहरने के लिए शिविर की व्यवस्था जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि “भागलपुर के बरारी घाट, बाबूपुर घाट और नवगछिया के महादेवपुर घाट पर यात्रियों के आवागमन के लिए जिला प्रशासन की ओर से समुचित और व्यापक व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। घाटों को समतल कर नाव तक आसान पहुंचने का रास्ता बनाया गया है। यात्रियों के ठहरने के लिए शिविर की व्यवस्था की गई है, जहां चिकित्सा सुविधा, जिला नियंत्रण कक्ष और बिजली की समुचित व्यवस्था उपलब्ध है। मैं खुद लगातार स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ बना रहा हूं। यात्रियों की सुविधा के लिए लगभग 800 से 1000 क्षमता वाले दो बड़े स्टीमर का संचालन जल्द शुरू होने की संभावना है। फिलहाल, नाव और अन्य साधनों की पर्याप्त उपलब्धता है, जिससे किसी भी यात्री को प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ रही है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रत्येक नाव पर गोताखोरों की तैनाती की जा रही है। घाटों पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की गई है । साथ ही स्ट्रेचर और एंबुलेंस की भी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।” अब जानिए ग्राउंड पर क्या स्थिति है डीएम ने निर्देश दिया कि शाम 5 बजे तक ही नाव चलेगी। मजदूरों को छुट्टी शाम के 6 बजे मिलती है। सैकड़ों की संख्या में मजदूर 6 बजे बरारी गंगा घाट पर पहुंचे, वहां पर उन्हें नाव के जरिए नवगछिया की तरफ नहीं जाने दिया गया। 7:30 बजे तक नवगछिया की ओर से भागलपुर आने के लिए नाव का परिचालन होता रहा, जिस पर ओवरलोड लोग सवार थे। छोटी नाव पर जहां 20 लोगों की बैठने की जगह थी, वहां नाव में 50 लोगों को लेकर आवागमन करते नजर आए। मंगलवार को इसी को लेकर लोगों ने विरोध जताया। स्थानीय लोगों ने एक साथ कहा, नवगछिया की तरफ से नाव भागलपुर की ओर आ रही है, लेकिन भागलपुर की तरफ से नवगछिया की ओर नाव क्यों नहीं दी जा रही है। हम लोग मजदूर हैं, शाम में 6:00 बजे हमें छुट्टी मिलती है, तो हम लोग 5 बजे कैसे आएंगे। हम लोगों के लिए व्यवस्था करने की जरूरत है। दूध के डीलर के लिए सबसे ज्यादा परेशानी सैकड़ों लीटर दूध लेकर नवगछिया से व्यापारी भागलपुर आए, लेकिन शाम में उन्हें जाने की इजाजत नहीं दी गई। भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के हिस्से के गिरने के बाद लगातार जांच जारी है। दूसरी ओर जल्द मरम्मतीकरण को लेकर भी वार लेवल पर काम हो रहा है। पुल निर्माण निगम के अधिकारी हों या फिर GREF (जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स) के अधिकारी हो, वह सभी स्थल का निरीक्षण कर रहे हैं। इंडियन आर्मी ने मोर्चा संभाला इंडियन आर्मी ने पूरी तरह से मोर्चा संभाल लिया है। यहां तत्काल प्रभाव से टूटे हुए हिस्से के पास स्टील प्लेट के माध्यम से फैब्रिकेटेड रास्ता तैयार करने की प्लानिंग चल रही है, जिस पर कम भार वाले गाड़ी को चलाया जा सके। अधिकारियों पुल का लेवल नाप रहे है। अन्य तकनीकी खामियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारी बोले- 3 दिनों में पुल चालू करने की कोशिश मंगलवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी व उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने भागलपुर में टूटे हुए पुल का हवाई सर्वेक्षण किया। हवा में हेलीकॉप्टर से दो राउंड लगाकर बारीकी से स्थिति का जायजा लिया। पुल हादसे के बाद से ही लगातार सम्राट चौधरी इसको लेकर एक्टिव नजर आ रहे हैं। उन्होंने रक्षा मंत्री से मुलाकात कर इस पर चर्चा की और तत्काल प्रभाव से सेवा को सुचारू रूप से चालू करने के लिए अधिकारियों को निर्देश भी दिए।। टूटे हुए हिस्से के जांच के दौरान बिहार पुल निर्माण निगम के अधिकारी आलोक बोमिक ने बताया, एक सस्पेंड स्पैन गिर गया है। वार फूटिंग जोन में इसको रिस्टोर किया जाएगा,।कम समय में हम लोग एक रास्ता तैयार करेंगे, जिस पर लाइट कमर्शियल व्हीकल को हम लोग जाने की अनुमति देंगे। मॉड्यूलर फैब्रिकेटेड बेली स्टील ब्रिज तैयार करने की प्लानिंग है। उसके एक्सपर्ट जीआरईएफ की टीम भी मौजूद है। दो-चार दिनों के अंदर एक रास्ता तैयार करने की प्लानिंग है। अभी डिसीजन फाइनल नहीं लिया गया है। जल्द पब्लिक के लिए ब्रिज होगा चालू मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के GREF के अधिकारी विपिन कुमार चंद ने बताया कि बहुत जल्द इस ब्रिज को पब्लिक के लिए चालू किया जाएगा। इसको लेकर हम लोग प्लानिंग कर रहे हैं। सारी टेक्निकल बातें जल्द शेयर की जाएंगी।  

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