The Guardian Report Khamenei Assassination: ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की हत्या की कहानी एक लंबे इंतजार और सटीक खुफिया ऑपरेशन का नतीजा है। द गार्जियन की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, यह ऑपरेशन इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद की दशकों पुरानी मेहनत और अमेरिकी सीआईए की तकनीकी ताकत का संयोजन था। पूरा हमला महज 60 सेकंड में पूरा हो गया, जिसमें खामेनेई (86 वर्ष) के साथ ईरान की टॉप सिक्योरिटी लीडरशिप के सात सदस्य, उनके परिवार के करीब एक दर्जन लोग और 40 अन्य वरिष्ठ नेता मारे गए।
दशकों की तैयारी
इजरायल ने खामेनेई पर नजर रखने की शुरुआत दशकों पहले कर दी थी। मोसाद ने उनके दैनिक रूटीन, परिवार, सहयोगियों और सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत फाइलें तैयार कीं। लगभग 20 साल पहले मोसाद ने रणनीति बदली और ईरान के अंदर स्थानीय एजेंट्स की भर्ती शुरू की, जो रेजीम विरोधी थे। उन्हें एडवांस्ड उपकरण और ट्रेनिंग दी गई। 2021 से मोसाद के प्रमुख डेविड बार्निया ने ‘फॉरेन लीजन’ बनाया, जो मिडिल ईस्ट भर में ऑपरेशंस चलाता है।
पिछले साल इजरायल खामेनेई को मारने के करीब पहुंच गया था, लेकिन तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एस्केलेशन के डर से रोक दिया। पिछले छह महीनों में सीआईए और अन्य अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियों ने इजरायल को तकनीकी संसाधन, मैनपावर और इंटरसेप्टेड कम्युनिकेशंस इंटेलिजेंस मुहैया कराया।
निर्णायक 60 सेकंड
1 मार्च 2026 (शनिवार सुबह) को ईरान के टॉप अधिकारियों की एक मीटिंग तेहरान के लीडरशिप कंपाउंड में हो रही थी। सीआईए ने लोकेशन और टाइमिंग की पुष्टि की। मोसाद के ग्राउंड एजेंट्स की ह्यूमन इंटेलिजेंस को अमेरिकी इंटरसेप्टेड डेटा के साथ मर्ज किया गया। फिर एक साथ कई जगहों पर हमले हुए — मिसाइल और एयर स्ट्राइक्स से खामेनेई का रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स तबाह हो गया। सैटेलाइट इमेजेस में तबाही साफ दिख रही है। पूर्व मोसाद अधिकारी ओडेड ऐलम ने कहा, ‘सिर्फ 60 सेकंड। यही लगा ऑपरेशन में, लेकिन यह सालों की तैयारी का नतीजा है… आधुनिक युद्ध अब टैंकों और एयरक्राफ्ट से नहीं, डेटा, एक्सेस, ट्रस्ट और टाइमिंग से तय होता है। एक मिनट पूरे क्षेत्र को बदल सकता है।’
इजरायली ‘स्लाइट’ और अमेरिकी ‘माइट’
इजरायल की सफलता मोसाद की ‘स्लाइट ऑफ हैंड’ (खुफिया चालाकी) पर टिकी थी — जैसे 2021 में न्यूक्लियर साइंटिस्ट मोहसिन फखरीजादेह की रिमोट-कंट्रोल मशीन गन से हत्या, 2024 में हमास लीडर इस्माइल हनिया की तेहरान में बम से हत्या। ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर साइबर अटैक और डॉक्यूमेंट्स चोरी भी शामिल हैं।
अमेरिका ने ‘माइट’ (ताकत) दी — हाई-टेक ट्रैकिंग, कम्युनिकेशंस इंटरसेप्ट और मैनपावर। पूर्व सीआईए अधिकारी ने इसे ‘जाइंट जिगसॉ पजल’ बताया: हर कोई डेटा ट्रेल छोड़ता है, फोन, कॉल्स, यहां तक कि कचरा डिस्पोजल भी। ईरानी कम्युनिकेशंस में ‘स्लॉपी’ होने से फायदा हुआ।
मिडिल ईस्ट में नई अराजकता, लेबनान तक पहुंची हिंसा
यह हमला अमेरिका-इजरायल की ईरान पर युद्ध की शुरुआत था, जिसका लक्ष्य रेजीम चेंज था। मिडिल ईस्ट में नई अराजकता फैल गई, लेबनान तक हिंसा पहुंची। इजरायली एनालिस्ट योसी मेलमैन ने चेतावनी दी, ‘इजरायल को हत्याओं से प्यार है, लेकिन हम कभी नहीं सीखते कि यह समाधान नहीं। हमास और हिजबुल्लाह के लीडर्स मारे गए, फिर भी वे मौजूद हैं।’
पूर्व सीआईए वेटरन ने कहा, ‘यह गलत था… लंबे समय में रणनीतिक रूप से। किसी का लीडर मारने से समस्या हल नहीं होती, नई पैदा होती है।’


