मुंबई, छह सितंबर नॉर्थईस्ट यूनाइटेड के मालिक जॉन अब्राहम को उम्मीद है कि 10 अक्टूबर से शुरू होने वाला आगामी इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) सत्र भारतीय फुटबॉल के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होगा। यह पहली बार देश की घरेलू फुटबॉल व्यवस्था में क्लबों के नेतृत्व वाली नयी संरचना की ओर बदलाव का संकेत देगा। आईएसएल का 2026-27 सत्र अगले साल मई तक चलेगा जो अपने पारंपरिक ‘होम-अवे’ (अपने मैदान और प्रतिद्वंद्वी टीम के मैदान) प्रारूप में लौटेगा।इसमें आठ महीने के दौरान कुल 163 मुकाबले खेले जाएंगे। पिछले सत्र में प्रशासनिक और व्यावसायिक अनिश्चितताओं के कारण देरी हुई थी जिसके बाद आईएसएल को सीमित अवधि में एक चरण वाले छोटे प्रारूप में आयोजित किया गया था। इस सत्र की प्रतियोगिता में शामिल 13 क्लबों में से प्रभावी रूप से किसी भी टीम को रेलीगेशन का सामना नहीं करना पड़ेगा।डायमंड हार्बर एफसी द्वारा अनिवार्य भागीदारी शुल्क का भुगतान करने में विफल रहने के कारण उसे स्वतः रेलिगेट माना जाएगा। फ्रेंचाइजी मालिकों के लीग की दिशा तय करने में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की चर्चा के बीच अब्राहम ने दोहराया कि उनका मानना है कि आईएसएल एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है जिसमें क्लब खुद लीग को आगे बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाएंगे। नॉर्थईस्ट यूनाइटेड की नयी आधिकारिक जर्सी के अनावरण समारोह में अब्राहम ने कहा, ‘‘इस साल से फुटबॉल भारत में ‘नया क्रिकेट’ बनेगा क्योंकि क्लब मालिकों ने लीग की कमान संभाल ली है।इस सत्र से आप भारतीय फुटबॉल में बहुत बड़ा बदलाव देखेंगे और एक मालिक के तौर पर मैं इस बदलाव को देखने के लिए उत्साहित हूं। ’’
उन्होंने कहा, “इंडियन सुपर लीग के सभी मालिक चाहते हैं कि देश में फुटबॉल बेहतर हो। हम सभी एकजुट हैं और चाहते हैं कि यह व्यवस्था सफल हो।इसलिए हमें अच्छे परिणाम की उम्मीद है।”
अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) और आईएसएल से जुड़े पक्षों के बीच आठ जुलाई को एक ऐतिहासिक समझौता हुआ। इसके तहत क्लबों को कम से कम दो वर्षों तक देश की शीर्ष स्तर की फुटबॉल प्रतियोगिता को पूरी तरह संचालित करने की अनुमति दी गई। एआईएफएफ ने चार वर्षों के लिए आईएसएल के व्यावसायिक अधिकार क्लबों को सौंप दिए हैं।हालांकि क्लबों के पास दो साल बाद इस व्यवस्था से एकतरफा बाहर निकलने का विकल्प भी होगा। राष्ट्रीय महासंघ ने आईएसएल को क्लबों के नेतृत्व वाले मॉडल के तहत संचालित करने को स्वीकार कर लिया है जबकि इसके प्रशासनिक और नियामक कार्य एआईएफएफ के पास ही रहेंगे।
मुंबई, छह सितंबर नॉर्थईस्ट यूनाइटेड के मालिक जॉन अब्राहम को उम्मीद है कि 10 अक्टूबर से शुरू होने वाला आगामी इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) सत्र भारतीय फुटबॉल के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होगा। यह पहली बार देश की घरेलू फुटबॉल व्यवस्था में क्लबों के नेतृत्व वाली नयी संरचना की ओर बदलाव का संकेत देगा। आईएसएल का 2026-27 सत्र अगले साल मई तक चलेगा जो अपने पारंपरिक ‘होम-अवे’ (अपने मैदान और प्रतिद्वंद्वी टीम के मैदान) प्रारूप में लौटेगा।
इसमें आठ महीने के दौरान कुल 163 मुकाबले खेले जाएंगे। पिछले सत्र में प्रशासनिक और व्यावसायिक अनिश्चितताओं के कारण देरी हुई थी जिसके बाद आईएसएल को सीमित अवधि में एक चरण वाले छोटे प्रारूप में आयोजित किया गया था। इस सत्र की प्रतियोगिता में शामिल 13 क्लबों में से प्रभावी रूप से किसी भी टीम को रेलीगेशन का सामना नहीं करना पड़ेगा।
डायमंड हार्बर एफसी द्वारा अनिवार्य भागीदारी शुल्क का भुगतान करने में विफल रहने के कारण उसे स्वतः रेलिगेट माना जाएगा। फ्रेंचाइजी मालिकों के लीग की दिशा तय करने में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की चर्चा के बीच अब्राहम ने दोहराया कि उनका मानना है कि आईएसएल एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है जिसमें क्लब खुद लीग को आगे बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाएंगे। नॉर्थईस्ट यूनाइटेड की नयी आधिकारिक जर्सी के अनावरण समारोह में अब्राहम ने कहा, ‘‘इस साल से फुटबॉल भारत में ‘नया क्रिकेट’ बनेगा क्योंकि क्लब मालिकों ने लीग की कमान संभाल ली है।
इस सत्र से आप भारतीय फुटबॉल में बहुत बड़ा बदलाव देखेंगे और एक मालिक के तौर पर मैं इस बदलाव को देखने के लिए उत्साहित हूं। ’’
उन्होंने कहा, “इंडियन सुपर लीग के सभी मालिक चाहते हैं कि देश में फुटबॉल बेहतर हो। हम सभी एकजुट हैं और चाहते हैं कि यह व्यवस्था सफल हो।
इसलिए हमें अच्छे परिणाम की उम्मीद है।”
अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) और आईएसएल से जुड़े पक्षों के बीच आठ जुलाई को एक ऐतिहासिक समझौता हुआ। इसके तहत क्लबों को कम से कम दो वर्षों तक देश की शीर्ष स्तर की फुटबॉल प्रतियोगिता को पूरी तरह संचालित करने की अनुमति दी गई। एआईएफएफ ने चार वर्षों के लिए आईएसएल के व्यावसायिक अधिकार क्लबों को सौंप दिए हैं।
हालांकि क्लबों के पास दो साल बाद इस व्यवस्था से एकतरफा बाहर निकलने का विकल्प भी होगा। राष्ट्रीय महासंघ ने आईएसएल को क्लबों के नेतृत्व वाले मॉडल के तहत संचालित करने को स्वीकार कर लिया है जबकि इसके प्रशासनिक और नियामक कार्य एआईएफएफ के पास ही रहेंगे।
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