जोधपुर एम्स ने पहली बार 10×10 सेंटीमीटर के रेक्टल ट्यूमर को बिना सर्जरी के हटाया है। इस ऑपरेशन को 8 घंटे में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की टीम ने पूरा किया। इस ऑपरेशन को एंडोस्कोपिक सबम्यूकोसल डिसेक्शन (ESD) के जरिए किया गया। इस ट्यूमर को लेटरली स्प्रेडिंग ट्यूमर (LST) के रूप में पहचाना गया। जो रेक्टल की दीवार के बड़े हिस्से में फैला हुआ था। इससे यह सर्जरी मुश्किल हो गई थी। इसके लिए पारंपरिक रूप से पेट की सर्जरी की आवश्यकता होती। पेशेंट की रिकवरी भी तेज डॉक्टर्स ने पेट की सर्जरी से हटकर, ESD तकनीक से ऑपरेशन किया। इससे ओपन सर्जरी नहीं करनी पड़ी। साथ ही शरीर का वो हिस्सा भी सुरक्षित रहा। पेशेंट की रिकवरी भी तेज रही। पेशेंट ने ऑपरेशन के बाद अच्छा सुधार दिखा। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आशीष अग्रवाल ने बताया- यह उपलब्धि एम्स की एंडोस्कोपी में बढ़ती विशेषज्ञता को दिखाती है। उन्होंने संस्थान प्रशासन के निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और कार्यकारी निदेशक डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी के नेतृत्व की सराहना की।


