(आर. सत्यनारायण)
श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), चार सितंबर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को इतिहास रचते हुए भू-तुल्यकालिक कक्षा में स्थापित होने वाले देश के पहले ‘इमेजिंग’ उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया। भू-तुल्यकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) के जरिए 2,300 किलोग्राम से अधिक वजनी उपग्रह को निर्धारित कक्षा में स्थापित किया गया। इसरो ने बताया कि उपग्रह ईओएस-05 प्रक्षेपण के करीब 18 मिनट बाद निर्धारित उप-भूतुल्यकालिक अंतरण कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंच गया।
जहां कई पृथ्वी अवलोकन उपग्रह पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) में संचालित होते हैं, वहीं ईओएस-05 करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर भू-तूल्यकालिक कक्षा में स्थापित होगा। इस कक्षा में उपग्रह पृथ्वी की घूर्णन गति के साथ तालमेल बैठाएगा। जीएसएलवी द्वारा ले जाया गया 2,300 किलोग्राम से अधिक वजन वाला यह उपग्रह अब तक का सबसे भारी उपग्रह है।
इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार, उपग्रह को बेहद सटीक तरीके से उसकी निर्धारित दिशा में आगे बढ़ाया गया। मिशन से जुड़े एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने उपग्रह को ‘‘आसमान से नजर रखने वाली आंख’’ करार दिया और कहा कि यह उपग्रह वास्तविक समय में तस्वीरें उपलब्ध कराएगा और कृषि एवं आपदा प्रबंधन समेत कई क्षेत्रों में देश की मदद करेगा। इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने सफल प्रक्षेपण की घोषणा करते हुए कहा, “मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि जीएसएलवी एफ-17 यान ने उन्नत ईओएस-05 भू-इमेजिंग उपग्रह को सफलतापूर्वक और सटीक तरीके से निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया है।”
उन्होंने कहा, “यह श्रीहरिकोटा से 107वां प्रक्षेपण और जीएसएलवी का 19वां मिशन है।” अंतरिक्ष विभाग के सचिव ने मिशन से जुड़े प्रमुख वैज्ञानिकों के साथ प्रक्षेपण के तुरंत बाद यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि जीएसएलवी का पहला प्रक्षेपण (डी1) 1,536 किलोग्राम वजन वाले उपग्रह के साथ किया गया था और इसके बाद इसरो ने संरचनात्मक भार को अनुकूलित करने और प्रणोदन प्रणालियों में सुधार के जरिये जीएसएलवी के प्रदर्शन को धीरे-धीरे बेहतर किया। उन्होंने कहा, “आज हमने इस प्रक्षेपण यान के जरिये 2,367 किलोग्राम वजनी सबसे भारी उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया है।”
उन्होंने कहा कि ईओएस-05 को कक्षा में सक्रिय कर दिए जाने के बाद यह भू-तुल्यकालिक कक्षा से देश के लिए “अहम आंकड़े” उपलब्ध कराने वाला भारत का पहला निर्दिष्ट ‘इमेजिंग’ उपग्रह बन जाएगा। उन्होंने उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों का हवाला देते हुए पुष्टि की कि सभी प्रणालियां पूरी तरह ठीक काम कर रही हैं और सौर पैनल सफलतापूर्वक खोल दिया गया है।
उन्होंने कहा, “उपग्रह बिल्कुल ठीक है।”
उन्होंने कहा, “यह हमारे देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह पहला ईओएस है जिसे राष्ट्रीय गतिविधियों के लिए भू-तुल्यकालिक कक्षा पर स्थापित किया जाएगा।”
मिशन निदेशक थॉमस कुरियन ने कहा कि इस मिशन में विशेष रूप से तैयार किया गया ईओएस उपग्रह भेजा गया है, जो लगभग वास्तविक समय में तस्वीरें लेने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि यह जीएसएलवी द्वारा भू-तुल्यकालिक अंतरण कक्षा (जीटीओ) या उप जीटीओ कक्षा में भेजा गया अब तक का सबसे भारी उपग्रह है। परियोजना निदेशक (उपग्रह) इम्तियाज अहमद ने ईओएस-05 को अपनी तरह का अनूठा उपग्रह बताया, जिसमें कई बैंड में काम करने की क्षमता है।
उन्होंने कहा, “संरचना, सामग्री और क्षमता के लिहाज से यह एक जटिल उपग्रह है।”
इससे पहले बुधवार रात 11 बजकर 30 मिनट पर शुरू हुई 27 घंटे की उलटी गिनती सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद रॉकेट ने शुक्रवार तड़के दो बजकर 55 मिनट पर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे प्रक्षेपण स्थल से निर्धारित समय पर उड़ान भरी। सुबह का समय और बारिश भी लोगों के उत्साह को कम नहीं कर सकी। बड़ी संख्या में लोग छाते लेकर प्रक्षेपण देखने पहुंचे और वैज्ञानिकों का उत्साह बढ़ाया।

