जयपुर में मेट्रो फेज-2 का काम रफ्तार पकड़ते ही हरे कृष्णा मार्ग पर बढ़ेगा ट्रैफिक, यू-टर्न बनाकर जेडीए संकरी कर रहा सड़क

जयपुर में मेट्रो फेज-2 का काम रफ्तार पकड़ते ही हरे कृष्णा मार्ग पर बढ़ेगा ट्रैफिक, यू-टर्न बनाकर जेडीए संकरी कर रहा सड़क

जयपुर। टोंक रोड पर मेट्रो फेज-2 का काम शुरू हो गया है। आने वाले कुछ महीनों में काम गति पकड़ेगा। ऐसे में जब हजारों वाहनों को वैकल्पिक रास्ते की जरूरत पड़ेगी तो सर्वाधिक वाहनों का दबाव हरे कृष्णा मार्ग (महल रोड) पर होगा। लेकिन, जेडीए के ट्रैफिक प्लानिंग का विरोधाभास देखिए…जिस सड़क को आने वाले समय में अतिरिक्त यातायात संभालना होगा, उसी की मुख्य कैरिज-वे में अभी यू-टर्न के नाम पर स्थायी बैरियर खड़े किए जा रहे हैं। यानी कल जिस सड़क की क्षमता बढ़ानी होगी, आज उसी की जगह घटाई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, जिस कंसल्टेंसी फर्म को डिजायन करने का काम दिया है, उसने अब तक रिपोर्ट ही तैयार नहीं करवाई है। वहीं, जेडीए के जिम्मेदार अभियंताओं ने कंसल्टेंसी फर्म के मौखिक आदेशों और आधी-अधूरी डिजायन के आधार पर काम शुरू कर दिया। मौके पर एक यू-टर्न तैयार भी हो चुका है। जेडीए ने मुख्य सड़क पर एक यू-टर्न में मुख्य कैरिज-वे का हिस्सा घेरकर बीच में संरचना बनाई गई है। इससे सीधे जाने वाले वाहनों के लिए उपलब्ध जगह कम हो रही है। सवाल यह है कि यू-टर्न की यह डिजाइन आज के ट्रैफिक को देखकर बनाई गई है या उस भविष्य को ध्यान में रखकर, जब टोंक रोड पर मेट्रो निर्माण के कारण यातायात का बड़ा हिस्सा वैकल्पिक मार्गों पर आएगा।

जेडीए को यह बताना होगा

-टोंक रोड पर मेट्रो निर्माण के दौरान कितने वाहनों के डायवर्जन का अनुमान है?
-इनमें से कितने वाहन महल रोड पर आने की संभावना है?
-क्या महल रोड का पीक ऑवर ट्रैफिक सर्वे कराया गया?
-क्या मेट्रो निर्माण के लिए अलग ट्रैफिक डायवर्जन प्लान तैयार किया गया है?
-क्या उसी प्लान के आधार पर महल रोड की क्षमता तय की गई?

मौके पर ये हाल

-मौके की स्थिति बताती है कि अभी यह कॉरिडोर कई हिस्सों में तेज गति से यातायात संभाल रहा है। जगतपुरा आरओबी से गोनेर रोड तक का हिस्सा पीक ऑवर्स में भी अपेक्षाकृत तेजी से पार हो जाता है।
-ऐसे में बीच सडक़ यू-टर्न और बैरियर से कैरिज-वे को प्रभावित करने का फैसला तभी तार्किक माना जा सकता है, जब जेडीए के पास ट्रैफिक डाटा से यह साबित हो कि इससे कुल यात्रा समय और ट्रैफिक फ्लो बेहतर होगा।

चार तरफ से आएगा दबाव

1. टोंक रोड पर मेट्रो निर्माण के दौरान टोंक रोड की उपलब्ध चौड़ाई प्रभावित होगी और ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्गों पर भेजना पड़ेगा।
2. सालिगरामपुरा आरओबी से जुडऩे वाली बड़ी संख्या में कॉलोनियों का यातायात इस नेटवर्क को प्रभावित करेगा।
3. जगतपुरा-सांगानेर बेल्ट में लगातार नए आवासीय और व्यावसायिक विकास से वाहनों की संख्या बढ़ रही है।
4. रिंग रोड कनेक्टिविटी से दक्षिणी रिंग रोड तक पहुंचने वाले महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है।

आज बनाओ, कल फिर तोड़ो?

-यू-टर्न स्थायी ढांचे के तौर पर विकसित किया जा रहा है। सवाल यह है कि यदि मेट्रो निर्माण के बाद हरे कृष्णा मार्ग पर ट्रैफिक इतना बढ़ता है कि मौजूदा कैरिज-वे और यू-टर्न व्यवस्था बाधा बनने लगे तो क्या इसे फिर से बदला जाएगा?

मेट्रो के साथ तालमेल भी सवालों में

हरे कृष्णा मार्ग पर यू-टर्न का काम शुरू करने से पहले जेडीए और मेट्रो परियोजना से जुड़े विभागों के बीच ट्रैफिक प्रबंधन का समन्वय भी अहम है। टोंक रोड पर निर्माण के दौरान किस मार्ग से कितना ट्रैफिक डायवर्ट होगा, इसका असर हरे कृष्णा मार्ग पर कितना पड़ेगा और उस समय यहां यातायात कैसे नियंत्रित किया जाएगा…इन सवालों का जवाब अभी सामने नहीं आया है।

टॉपिक एक्सपर्ट …

हरे कृष्णा मार्ग पर आने वाले समय में और अधिक ट्रैफिक बढ़ेगा। टोंक रोड पर मेट्रो निर्माण के दौरान डायवर्जन के साथ सालिगरामपुरा आरओबी और जगतपुरा क्षेत्र से आने वाला यातायात भी इस कॉरिडोर पर दबाव बढ़ाएगा। ऐसे में यू-टर्न विकसित करने से पहले भविष्य के ट्रैफिक लोड का वैज्ञानिक आकलन जरूरी है। किसी भी बड़े ट्रैफिक सुधार कार्य से पहले ट्रैफिक वॉल्यूम, टर्निंग मूवमेंट, ओरिजिन-डेस्टिनेशन, सडक़ की क्षमता और रोड सेफ्टी का अध्ययन किया जाना चाहिए। इसके बाद ही यू-टर्न की स्थिति और डिजाइन तय होनी चाहिए। यदि बिना भविष्य के ट्रैफिक को ध्यान में रखे मुख्य कैरिज-वे में स्थायी बैरियर बनाए जाते हैं तो आगे चलकर यही संरचना यातायात के लिए बाधा बन सकती है। मौजूदा काम का भविष्य के ट्रैफिक लोड के आधार पर तकनीकी पुनरीक्षण किया जाना चाहिए।
-राजकुमार शर्मा, पूर्व अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जेडीए

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