Israel Ceasefire : क्या नेतन्याहू की कुर्सी खतरे में है ? इजराइल में भारी विरोध प्रदर्शन और ट्रंप का बड़ा दांव!

Israel Ceasefire : क्या नेतन्याहू की कुर्सी खतरे में है ? इजराइल में भारी विरोध प्रदर्शन और ट्रंप का बड़ा दांव!

Protest: इजराइल में इन दिनों भारी सियासी उथलपुथल मची हुई है। लेबनान के साथ चल रहे तनाव और युद्धविराम की खबरों के बीच देश के अलग-अलग हिस्सों में भारी विरोध देखने को मिल रहे हैं। शनिवार रात को तेल अवीव की सड़कों पर हजारों लोग अपनी ही सरकार के खिलाफ उतर आए। जनता में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों को लेकर गहरा असंतोष है और यह विरोध अब राजधानी से बाहर भी फैल रहा है। लोगों का गुस्सा इस बात पर भी है कि लेबनान सीमा के पास स्थित किरयात शमोना जैसे इलाकों में सुरक्षा को लेकर सरकार का रवैया कमजोर नजर आ रहा है। इन सीमावर्ती इलाकों में भी बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। स्थानीय नेताओं और कई शहरों के मेयर का साफ तौर पर मानना है कि इजराइल को बाहरी दबाव में आकर युद्धविराम के लिए मजबूर होना पड़ा है। जनता के बीच यह भावना तेजी से फैल रही है कि इस समझौते के कारण देश के मूल सैन्य लक्ष्य अधूरे रह गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण देश को पीछे हटना पड़ रहा

इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दखल बहुत अहम हो गया है। कुछ समय पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी किया था, जिसमें उन्होंने इजराइल को लेबनान पर बमबारी रोकने की सलाह दी थी। उस बयान के बाद इजराइली जनता को लगने लगा कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण उनके देश को पीछे हटना पड़ रहा है। लेकिन अब ट्रंप ने एक नई रणनीति के तहत काम करना शुरू कर दिया है। उन्होंने अपने नए सोशल मीडिया पोस्ट में इजराइल और प्रधानमंत्री नेतन्याहू की जमकर तारीफ की है। कूटनीतिक जानकारों का साफ तौर पर मानना है कि ट्रंप का यह बदला हुआ रुख असल में नेतन्याहू के लिए समर्थन जुटाने का एक बड़ा प्रयास है। ट्रंप एक ऐसे सहयोगी के साथ खड़े दिखना चाहते हैं, जिसने बेमन से ही सही, लेकिन शांति प्रक्रिया में हिस्सा लिया है।

ट्रंप ने किया खुल कर मैदान में उतरने का फैसला

इजराइल में इस साल के अंत में चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में नेतन्याहू को अपनी सत्ता बचाने और गिरते ग्राफ को सुधारने के लिए भारी जनसमर्थन की सख्त जरूरत है। ट्रंप इस बात को भली-भांति समझते हैं कि युद्धविराम के बाद नेतन्याहू घर में ही घिर गए हैं। इसलिए, ट्रंप ने अपने पुराने दोस्त और राजनीतिक सहयोगी को इस बड़े सियासी संकट से बाहर निकालने के लिए खुलकर मैदान में उतरने का फैसला किया है।

घरेलू राजनीति में कुछ राहत मिल सकती है

इजराइल की आम जनता में सरकार के नरम रुख को लेकर भारी आक्रोश है। नागरिकों का मानना है कि लेबनान सीमा पर शांति समझौते से उनकी लंबी अवधि की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषक ट्रंप के ताजा बयान को नेतन्याहू के लिए एक ‘जीवनदान’ की तरह देख रहे हैं, जिससे उन्हें घरेलू राजनीति में कुछ राहत मिल सकती है। किरयात शमोना और तेल अवीव में हो रहे इन लगातार विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की अगली प्रतिक्रिया का इंतजार है। यह देखना अहम होगा कि नेतन्याहू अपने खिलाफ उठ रही आवाजों को शांत करने के लिए क्या नई नीतियां अपनाते हैं और क्या ट्रंप का यह सार्वजनिक समर्थन उन्हें चुनावों में फायदा पहुंचा पाएगा।

प्रो-इजराइल वोट बैंक को भी अपने पक्ष में करने की कोशिश

बहरहाल इस पूरे मामले का एक पहलू अमेरिकी राजनीति से भी जुड़ा हुआ है। डोनाल्ड ट्रंप का नेतन्याहू का खुल कर समर्थन करना सिर्फ इजराइल के लिए नहीं है, बल्कि इसके जरिये वह अमेरिका में मौजूद मजबूत यहूदी लॉबी और प्रो-इजराइल वोट बैंक को भी अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं।

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