Israel में आम चुनाव आज: बेंजामिन नेतन्याहू को आइजनोट से मिल रही कड़ी टक्कर, सरकार का गठन कैसे होता है?

Israel में आम चुनाव आज: बेंजामिन नेतन्याहू को आइजनोट से मिल रही कड़ी टक्कर, सरकार का गठन कैसे होता है?

Israel Elections 2026: इजरायल में आज चुनाव हो रहा है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद गाजा, ईरान, लेबनान, सीरिया और यमन में हुई लड़ाइयों के बाद यह पहला चुनाव है। इस चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को पूर्व IDF प्रमुख गादी आइजनकोट से कड़ी टक्कर मिलती हुई दिखाई दे रही है। कई सर्वे में यह साफ तौर पर सामने आया है कि 120 सीटों वाली संसद में किसी भी पक्ष को बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। माना जा रहा है कि नतीजे साफ होने में हफ्ते या महीने भी लग सकते हैं।

इजरायल में सरकार का गठन कैसे होता है?

इजरायल की संसद (नेसेट) में 120 सीटे हैं। बहुमत के लिए आधे से एक अधिक 61 सीटें चाहिए। इजरायल में आनुपातिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था है, यानी पार्टियों को वोट के अनुपात में सीटें मिलती हैं। इसी वजह से वहां गठबंधन की सरकार बनते आई है। अगर कोई गुट 61 सीटों तक नहीं पहुंचता तो अल्पमत की सरकार बन सकती है। वह भी न बने तो चुनाव कराए जा सकते हैं। तब तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में बने रहेंगे।

इजरायल के आम चुनाव में कौन-कौन से चेहरे हैं मैदान में?

इनमें सबसे पहला नाम वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का है। नेतन्याहू इजरायल की राजनीति में बीते ढाई दशक से सक्रिय हैं। वह इस समय में इजरायल के इतिहास की सबसे दक्षिणपंथी सरकार चला रहे हैं। वह सत्ता में बने रहने के लिए अन्य दक्षिणपंथी नेताओं की मदद ले सकते हैं। ये दक्षिण पंथी नेता वेस्ट बैंक को इजरायल में मिलाने की मांग कर रहे हैं। वह गाजा से फिलिस्तीनियों को हटाने की मांग कर रहे हैं। इस चुनाव में नेतन्याहू को सबसे अधिक टक्कर देने वाले नेता हैं, गादी आइजनकोट।

गादी इजरायली सेना में प्रमुख रह चुके हैं। उन्होंने पिछले ही साल अपनी पार्टी “यशर पार्टी” बनाई है। सेना में उनका लंबा करियर और राजनीति में नया चेहरा होना उनकी ताकत माना जा रहा है। गाजा युद्ध के शुरुआती महीनों में उनके सैनिक बेटे की मौत हो गई थी। वे नेतन्याहू की युद्ध कैबिनेट में थे, लेकिन युद्ध से निपटने के तरीके पर असहमति जताते हुए 2024 में इस्तीफा दे दिया। उनका चुनाव अभियान 7 अक्टूबर की विफलताओं की जवाबदेही तय करने की मांग करता है। इनके अलावा कुछ अन्य चेहरे भी मैदान में हैं। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और एविग्दोर लीबरमैन हैं। दोनों धुर दक्षिणपंथी नेता माने जाते हैं। इजरायल की आंतरिक व बाह्य सुरक्षा को लेकर सख्त हैं। वहीं पूर्व जनरल यायर गोलन का झुकाव वामपंथ की ओर है।

इस बार इजरायल में प्रमुख चुनावी मुद्दे कौन-कौन से हैं?

इस पूरे चुनावी अभियान में सुरक्षा का मुद्दा बेहद हावी रहा है। बेंजामिन नेतन्याहू के विरोधी 7 अक्टूबर को हमास के हमले में सुरक्षा चूक पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। इस हमले में 1,200 लोग मारे गए थे और 251 लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले जाया गया था। हालांकि, नेतन्याहू इस चुनाव में खुद को “मिस्टर सिक्योरिटी” बता रहे हैं और 2023 के बाद मिली कामयाबी को गिना रहे हैं।

इस चुनाव में क्या है अरब पार्टियों की भूमिका ?

इसराइल की करीब एक-पांचवीं आबादी अरब है, और उनमें से कई खुद को इजरायल के फfलिस्तीनी नागरिक कहते हैं। दो अरब पार्टी गुट चुनाव लड़ रहे हैं और सत्ता का संतुलन तय कर सकते हैं। लेकिन एक को छोड़कर बाकी सभी प्रमुख यहूदी पार्टियों ने उनके साथ काम करने से इनकार कर दिया है।

इजरायल के चुनाव में क्या है अहम मुद्दे ?

इजरायली सैन्य सेवा में अति-रूढ़िवादी पुरुषों को लंबे समय से सेना से छूट मिलती रही है। यह मुद्दा अभी गरमाया हुआ है। न्यायिक सुधार को लेकर नेतन्याहू सरकार ने कई फैसले लिए, जो विवादों में रहे हैं। उनके आलोचकों का कहना है कि इससे अदालतों की स्वतंत्रता कमजोर होगी और लोकतंत्र को खतरा होगा। खाने-पीने और मकान की कीमतें लगातार बढ़ी हैं।

इजरायल में चुनावी नतीजे कब जारी किए जाएंगे?

इजरायली टीवी चैनल मतदान वाले दिन यानी आज एग्जिट पोल जारी करेंगे। हालांकि, एग्जिट पोल नतीजों से अलग भी सकते हैं। प्रारंभिक नतीजे कल यानी बुधवार को आएंगे। आधिकारिक नतीजे 4 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। इसके बाद राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग पार्टी नेताओं से बात करेंगे और उस नेता को सरकार बनाने का न्योता देंगे जिसके सफल होने की संभावना उन्हें सबसे ज्यादा लगेगी। इस प्रक्रिया में एक महीने से ज्यादा लग सकता है। वह नेता विफल रहे तो हर्ज़ोग किसी दूसरे को मौका दे सकते हैं। अगर वह भी नाकाम रहा, तो नेसेट सदस्य राष्ट्रपति से तीसरे नेता को मौका देने का अनुरोध कर सकते हैं, और उसके भी विफल होने पर नए चुनाव कराए जाएंगे। 2019 से 2022 के बीच इसराइल में पांच बार चुनाव हो चुके हैं, क्योंकि पार्टियां बार-बार मिलकर काम नहीं कर पाईं।

इजरायल के चुनाव से फिलिस्तीन पर क्या असर पड़ेगा?

इस चुनाव का सीधा असर फिलिस्तीनी नागरिकों पर भी पड़ेगा। गाजा में संघर्षविराम को एक साल हो चुका है। फिर भी इजरायल के हमले आए दिन होते रहते हैं। आधे से अधिक इलाके पर इजरायल का पूरा कंट्रोल है। हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 7 अक्टूबर 2023 के बाद से गाज़ा में 74,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। वेस्ट बैंक में भी इजरायलियों ने वहां के फिलिस्तीनी नागरिकों पर हमले किए है।

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