अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच ताइवान को लेकर बातचीत की अटकलें तेज हैं। इस खबर को लेकर दुनिया भर में बवाल मचा है।
इस बीच, एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर ट्रंप चीनी राष्ट्रपति के सामने ताइवान को लेकर कमजोर पड़ने देते हैं तो अमेरिका को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
यूरोपियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में साफ चेतावनी दी गई है कि ताइवान को लेकर कोई समझौता अमेरिका की विश्वसनीयता, उसके सहयोगी देशों और अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।
ताइवान सिर्फ एक द्वीप नहीं, अमेरिका की एशिया नीति का केंद्र
ताइवान अमेरिका के लिए एशिया में रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में इसे ‘लिटमस टेस्ट’ यानी परीक्षा की कसौटी बताया गया है।
अगर अमेरिका ताइवान की सुरक्षा या उसकी अंतरराष्ट्रीय हैसियत पर कोई समझौता करता है तो जापान, दक्षिण कोरिया और फिलीपींस जैसे अहम सहयोगी देश अमेरिका के सुरक्षा वादों पर सवाल उठा सकते हैं।
ऐसा होने से चीन का हौसला बढ़ेगा और पूरा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र अस्थिर हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ताइवान को कमजोर करने का मतलब है कि चीन को एशिया में और ज्यादा ताकत मिल जाएगी।
सेमीकंडक्टर का सबसे बड़ा केंद्र है ताइवान
ताइवान सिर्फ लोकतंत्र ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर उत्पादक भी है। पूरी दुनिया के चिप्स का बड़ा हिस्सा यहीं बनता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर अमेरिका ताइवान पर अपनी पकड़ ढीली करता है तो चीन को इन चिप्स पर काबू मिल सकता है।
इससे अमेरिका की तकनीकी ताकत कमजोर होगी और ट्रंप की अपनी आर्थिक योजनाएं भी प्रभावित होंगी। ट्रंप की सरकार तकनीकी क्षेत्र में चीन से आगे रहने पर जोर दे रही है। ऐसे में ताइवान जैसे रणनीतिक जगह को छोड़ना उनके लिए खुद की नीति के खिलाफ होगा।
ट्रंप के लिए घरेलू और वैश्विक परेशानी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ताइवान पर कोई समझौता ट्रंप की छवि को नुकसान पहुंचाएगा। अमेरिका में दोनों पार्टियां ताइवान का समर्थन करती हैं। अगर ट्रंप इस मुद्दे पर पीछे हटे तो उनके विरोधी उन्हें कमजोर साबित करने के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल करेंगे।
इसके अलावा वैश्विक स्तर पर भी अमेरिका की विश्वसनीयता गिरेगी। जो देश अमेरिका पर भरोसा करते हैं वे सोचेंगे कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका उन्हें भी छोड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान लोकतंत्र और स्वतंत्रता का प्रतीक है। अगर अमेरिका इसे ‘बेच’ देता है तो दुनिया भर में आजादी की बात करने का उसका नैतिक अधिकार भी चला जाएगा।


