Iran War: ईरान को यूरोप की सीधी चेतावनी, कहा- हॉर्मुज में हमले बंद करो और परमाणु सहयोग पर बात शुरू करो

Iran War: ईरान को यूरोप की सीधी चेतावनी, कहा- हॉर्मुज में हमले बंद करो और परमाणु सहयोग पर बात शुरू करो

Iran War Latest Update: यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने ईरान को सीधा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों पर हमले बंद करो और हॉर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह मुक्त करो।

यह बातचीत ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ हुई। कोस्टा ने इसे साफ और गंभीर चर्चा बताया। उन्होंने जोर दिया कि क्षेत्र में शांति सिर्फ बातचीत से ही संभव है। कोई और रास्ता नहीं।

हॉर्मुज को लेकर यूरोप चिंतित

बता दें कि हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल व्यापार का महत्वपूर्ण रास्ता है। यहां अगर आवाजाही रुकती है तो पूरी दुनिया के तेल बाजार पर असर पड़ता है। यूरोपीय संघ इसी वजह से चिंतित है। कोस्टा ने साफ कहा कि ईरान को इस जलमार्ग में पूरी आजादी बहाल करनी होगी।

साथ ही उन्होंने ईरान से पड़ोसी देशों पर हमले तुरंत रोकने की अपील की। क्षेत्र में तनाव बढ़ने से कई देश प्रभावित हो रहे हैं। यूरोपीय नेता मानते हैं कि इन हमलों से स्थिति और बिगड़ सकती है।

परमाणु मुद्दे पर क्या कहा?

परमाणु मुद्दे पर भी कोस्टा ने बात रखी। उन्होंने ईरान से अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी आईएईए के साथ दोबारा सहयोग शुरू करने को कहा। यूरोपीय संघ कूटनीतिक कोशिशों का समर्थन करने को तैयार है।

कोस्टा के अनुसार, संवाद ही एकमात्र रास्ता है जिससे क्षेत्र में टिकाऊ शांति आ सकती है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ सभी चल रही कूटनीतिक कोशिशों का साथ देगा।

खाड़ी देशों में पहले से ज्यादा तनाव

ईरान पर दबाव बढ़ाने वाली यह अपील ऐसे समय आई है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव पहले से ज्यादा है। तेल की सप्लाई प्रभावित होने का डर दुनिया भर में महसूस किया जा रहा है।

यूरोपीय नेता चाहते हैं कि ईरान जिम्मेदारी भरा रुख अपनाए। बातचीत में कोस्टा ने यह भी स्पष्ट किया कि संघर्ष सुलझाने का सबसे अच्छा तरीका बातचीत ही है। उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति को कहा कि क्षेत्र की स्थिरता सबके हित में है।

यूरोपीय संघ अब कूटनीति के जरिए स्थिति सुधारने की कोशिश में लगा है। कोस्टा के इस बयान से साफ है कि यूरोप ईरान से ठोस कदम की उम्मीद कर रहा है। हॉर्मुज की सुरक्षा, पड़ोसी देशों पर हमले बंद होना और परमाणु सहयोग फिर से शुरू होना इन तीन मुद्दों पर जोर दिया गया है।

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