Iran US Tension: ईरान की दो टूक: बातचीत से सुलझाएंगे संकट, लेकिन दुश्मनों के आगे नहीं झुकेंगे; होर्मुज पर भी रखी शर्त

Iran US Tension: ईरान की दो टूक: बातचीत से सुलझाएंगे संकट, लेकिन दुश्मनों के आगे नहीं झुकेंगे; होर्मुज पर भी रखी शर्त

Iran US War Latest News: मध्य पूर्व में अभी माहौल काफी तनावपूर्ण है, लेकिन ईरान ने अपनी रणनीति बिल्कुल साफ कर दी है। वो बातचीत के जरिए संकट का हल चाहता है, मगर अपने राष्ट्रीय हितों और शर्तों पर कोई समझौता नहीं करने वाला। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने खुलेआम अमेरिका पर आर्थिक दबाव बढ़ाने, और व्यापार रोकने की कोशिशों का आरोप लगाया। उन्होंने जनता का सहयोग मांगा और ऐलान किया कि विरोधियों की साजिशें नाकाम करेंगे। ये भी दिख रहा है कि कूटनीतिक कोशिशें तेज हुई हैं, जिससे इलाके में शांति की कुछ उम्मीद जग रही है।

Iran Peace Talks: ईरान ने बातचीत के लिए बढ़ाया हाथ, लेकिन आत्मसमर्पण से किया इनकार

ईरान ने अमेरिका के साथ अपने विवाद सुलझाने के लिए कूटनीतिक रास्ता खुला रखा है। लेकिन आत्मसमर्पण का सवाल ही नहीं उठता। तेहरान ने साफ कहा कि किसी सौदे के लिए दबाव स्वीकार नहीं करेंगे। राष्ट्रपति पेजेशकियन का कहना है, उनकी सरकार बातचीत और सहयोग के जरिए बाहरी ताकतों की वजह से पैदा हुई समस्याओं का हल खोजेगी।

तेहरान में जब क्षेत्रीय गवर्नरों और महापौरों से मिले, तब पेजेशकियन ने बताया कि सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कूटनीतिक समाधान तलाशने के लिए सरकार को छूट दी है। उन्होंने ये भी कहा-युद्ध किसी के हित में नहीं है और विरोधी ताकतें ईरान को झुका नहीं सकतीं। अमेरिका पर उन्होंने सीमापार व्यापार बाधित करने का आरोप लगाया और दावा किया कि जनता के साथ मिलकर इन कोशिशों को नाकाम करेंगे। इससे साफ है कि ईरान, आर्थिक दबाव झेलते हुए भी अपनी नीति बदलने वाला नहीं है।

कतर-पाकिस्तान की मध्यस्थता से बढ़ी बातचीत

अब कतर और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता से बातचीत तेज हुई है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने बताया कि कतर और पाकिस्तान की मदद से संपर्क बढ़ा है। तुर्कमेनिस्तान यात्रा के बाद उन्होंने सरकारी एजेंसी IRNA को बताया, अलग-अलग पक्षों के बीच लगातार फोन पर बातचीत और संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है। प्रतिनिधिमंडलों की आवाजाही भी जारी है।

अराघची का कहना है कि ईरान कूटनीति और रक्षा दोनों के लिए तैयार है। अगर तेहरान की शर्तें मान ली जाएं, होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोलने का रास्ता निकल सकता है।

होर्मुज पर समझौता, परमाणु विवाद और प्रतिबंध अहम मुद्दे

बात सिर्फ होर्मुज की नहीं परमाणु विवाद और प्रतिबंध भी अहम मुद्दे हैं। 22 सितंबर को ईरान ने मध्यस्थों के जरिये अमेरिका के सामने सात दिनों का प्रस्ताव रखा था, ताकि संघर्ष रुके और समुद्री मार्ग फिर से खुल सके। विदेश मंत्री ने कहा, अगर अमेरिका भी तर्क और संवाद का रास्ता अपनाता है, तो बातचीत सकारात्मक हो सकती है। लेकिन साफ चेतावनी दी, कि अगर सैन्य कार्रवाई फिर शुरू हुई, तो जवाब और कड़ा होगा।

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के बाद टकराव बढ़ा था। ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों से जवाब दिया, और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत की। 8 अप्रैल को युद्धविराम हुआ, फिर 18 जून को युद्ध खत्म करने के लिए समझौता ज्ञापन पर दस्तखत किए गए।

शर्त थी कि परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों के भीतर बातचीत हो। टाइम लिमिट 17 अगस्त को खत्म हो गई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच अब तक पूरी सहमति नहीं बनी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *