अमेरिका की धमकी पर ईरान का पलटवार – ‘अगर अमेरिका नहीं माना तो होर्मुज स्ट्रेट में उनके जहाज़ों को डुबो देंगे’

अमेरिका की धमकी पर ईरान का पलटवार – ‘अगर अमेरिका नहीं माना तो होर्मुज स्ट्रेट में उनके जहाज़ों को डुबो देंगे’

अमेरिका (United States of America) और ईरान (Iran) के बीच 8 अप्रैल को 2 हफ्ते का सीज़फायर लागू हुआ था, जो 21 अप्रैल को खत्म हो जाएगा। सीज़फायर के बाद फिर से युद्ध शुरू न हो, इसके लिए कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान (Pakistan) के इस्लामाबाद (Islamabad) में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच पहले दौर की शांति-वार्ता हुई, जो विफल रही। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने हाल ही में कहा है कि आने वाले दो दिन में दोनों देशों के बीच पाकिस्तान में फिर से शांति-वार्ता हो सकती है। आज पाकिस्तान और ईरान के बीच इस विषय में बातचीत होगी। इस दौरान होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में अमेरिका की नाकेबंदी जारी है और अब उन्होंने पानी में पुलिसिंग की भी चेतावनी दे दी है।

अमेरिका की धमकी पर ईरान का पलटवार

अमेरिका की धमकी पर ईरान ने पलटवार किया है। ईरान ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में पुलिसिंग या कंट्रोल करने की कोशिश की, तो अमेरिका के जहाज़ों को होर्मुज स्ट्रेट में डुबो दिया जाएगा। आईआरजीसी (IRGC) के सीनियर अफसर और ईरान में सैन्य मामलों के सलाहकार मोहसिन रेज़ाई (Mohsen Rezaee) ने साफ कर दिया है कि अगर अमेरिका ने ऐसा कुछ भी किया तो ईरान अपनी मिसाइल से अमेरिकी जहाज़ पर हमला कर देगा जिससे वो होर्मुज स्ट्रेट में डूब जाएंगे।

ट्रंप की ‘होर्मुज नाकेबंदी’ फ्लॉप!

ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि उनकी नेवी किसी भी देश के जहाज को होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रने नहीं दिया जाएगा, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट में ट्रैकिंग से पता चला है कि अभी भी कई जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुज़र रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये जहाज ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट के मुख्य रास्ते के वैकल्पिक रास्तों के तौर पर तैयार किए गए मार्गों से ईरान की अनुमति लेते हुए होते हुए निकल रहे हैं।

ईरान से सीज़फायर नहीं बढ़ेगा आगे

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा है कि वह ईरान के साथ चल रहे सीज़फायर को आगे बढ़ाने पर विचार नहीं कर रहे हैं। ट्रंप ने इंटरव्यू के दौरान कहा, “मैं सीज़फायर आगे बढ़ाने के बारे में सोच भी नहीं रहा हूं। मुझे लगता है कि यह ज़रूरी नहीं होगा। मेरा मानना है कि ईरान के साथ स्थायी समझौता बेहतर विकल्प है, जिससे ईरान फिर से पहले जैसा बन सकता है। बातचीत के ज़रिए स्थायी शांति संभव है।”

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