Rajasthan youth killed in Iran-Israel War: पश्चिमी एशिया में जारी ईरान-इजरायल युद्ध अब भारतीय परिवारों के लिए मातम की खबर लेकर आ रहा है। ओमान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खासब पोर्ट पर खड़े एक कमर्शियल जहाज ‘एमवी स्काईलाइट’ पर हुए भीषण मिसाइल हमले में राजस्थान के नागौर जिले के निवासी दलीप सिंह की मौत हो गई है।
बता दें कि बुधवार सुबह शिपिंग कंपनी ने आधिकारिक तौर पर इस दुखद घटना की पुष्टि की, जिसके बाद से पूरे नागौर में शोक की लहर दौड़ गई है।
22 जनवरी को ही संभाली थी ड्यूटी
खींवताना गांव के रहने वाले कान सिंह के पुत्र दलीप सिंह (24) ने इसी साल 22 जनवरी 2026 को मर्चेंट नेवी में अपनी ड्यूटी जॉइन की थी। वे एक ऑयल/केमिकल टैंकर पर क्रू मेंबर के रूप में तैनात थे। परिजनों ने बताया कि दलीप से उनकी आखिरी बात 28 फरवरी को हुई थी, तब सब कुछ सामान्य था। लेकिन 1 मार्च की सुबह हुए हमले ने सब कुछ बदल दिया।

दलीप अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए सात समंदर पार गए थे। उनके साथ उनके ही पड़ोसी गांव बामणा के सुनील कुमार भी उसी जहाज पर थे, जिनकी शिफ्ट खत्म होने के बाद दलीप ने कार्यभार संभाला था।
कैसे हुआ हमला? मौत की खौफनाक दास्तां
घटना 1 मार्च की सुबह की है, जब पलाऊ के झंडे वाला तेल टैंकर ‘एमवी स्काईलाइट’ ओमान के तट के निकट खड़ा था। ओमान के मैरीटाइम सिक्योरिटी सेंटर के अनुसार, जहाज पर ईरान की ओर से दागी गई मिसाइल या बारूद से लदी ड्रोन बोट से हमला हुआ। मिसाइल सीधे जहाज के अगले हिस्से पर गिरी, जहां दलीप सिंह ड्यूटी पर तैनात थे।
हमले के तुरंत बाद जहाज में भीषण विस्फोट हुआ और आग लग गई। जहाज बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस हमले में बिहार के रहने वाले कैप्टन आशीष का शव बरामद कर लिया गया है। लेकिन दलीप सिंह का शव अभी भी लापता है, जिसकी तलाश में ओमान की टीमें जुटी हुई हैं।
जहाज पर सवार थे 15 भारतीय
शिपिंग कंपनी ‘स्काईलाइट’ के अनुसार, हमले के समय जहाज पर 15 भारतीय और 5 ईरानी क्रू मेंबर्स सवार थे। हालांकि, राहत बचाव कार्य में 20 सदस्यों को बाहर निकाल लिया गया था, लेकिन तीन लोग लापता हो गए थे। अब उनमें से दो (आशीष और दलीप) की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना ‘डेथ जोन’
यह हमला ईरान द्वारा इजरायल और अमेरिका के खिलाफ चलाए जा रहे ‘प्रतिशोध अभियान’ का हिस्सा माना जा रहा है। खासब पोर्ट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ पर स्थित है, जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। यह घटना युद्ध की उस भयावहता को दर्शाती है, जहां दो देशों की जंग में दूर-दराज के गांवों से रोजी-रोटी कमाने निकले युवाओं को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।
ग्रामीणों की सरकार से मांग
दलीप सिंह की मौत की खबर जैसे ही नागौर के खींवताना गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया। दलीप अपने पीछे एक साधारण परिवार छोड़ गए हैं, जिनकी वे एकमात्र उम्मीद थे।
ग्रामीणों और परिजनों ने भारत सरकार से मांग की है कि दलीप सिंह का शव जल्द से जल्द भारत लाने के प्रयास किए जाएं। युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंसे अन्य राजस्थानी और भारतीय युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।


