IPO subscription decline: शेयर बाजार में जारी उठापटक और आइपीओ की सुस्त लिस्टिंग ने छोटे निवेशकों का भरोसा डगमगा दिया है। रिटेल निवेशक धीरे-धीरे आईपीओ से दूरी बना रहे है। वर्ष 2026 की पहली तिमाही में मेनबोर्ड में आए 18 में से 10 यानी करीब 60% आइपीओ ऐसे रहे जिनमें रिटेल कैटेगरी पूरी तरह सब्सक्राइब ही नहीं हो पाई। क्लीन मैक्स एनवायरो के आइपीओ में रिटेल हिस्सा सिर्फ 0.06 गुणा ही भरा। इसी तरह साई पैरेंटेरल्स और पॉवरिका का आइपीओ 0.15 गुणा से भी कम सब्सक्राइब हुआ। यह 2024-2025 के उस दौर के बिल्कुल उलट है जब निवेशकों में शेयर खरीदने की होड़ मची रहती थी। यह बदलाव साफ संकेत देता है कि अब निवेशक आंख बंद करके पैसा नहीं लगा रहे, बल्कि हर इश्यू को परख रहे हैं। इस साल आइपीओ के रिटेल सब्सक्रिप्शन में 65% से ज्यादा की गिरावट आई है।
भारतीय बाजार में 31 मार्च तक हुई 18 लिस्टिंग में से 12 शेयर अपने आइपीओ की कीमत (इश्यू प्राइस से नीचे खुले। वहीं 9 आइपीओ तो अभी भी अपने इश्यू प्राइस से नीचे ट्रेड कर रहे हैं और 6 ने जीरो रिटर्न दिया है, केवल 4 आइपीओ ने ही निवेशकों को डबल डिजिट में रिटर्न दिया है। कमजोर लिस्टिंग और बाजार में जारी कमजोरी के कारण 3,840 करोड़ जुटाने की तैयारी कर रहीं 5 ज्वैलरी कंपनियों ने अपने आइपीओ को फिलहाल टाल दिया है। इन कंपनियों को सेबी से मंजूरी भी मिल चुकी थी, लेकिन बाजार की अनिश्चितता और निवेशकों की कमजोर रुचि के कारण लॉन्च आगे बढ़ा दिया गया।
इन ज्वैलर्स ने टाला अपना आइपीओ
बाजार में कम हो रहे रुझानों के कारण कई ज्वैलर्स ने अपने आईपीओ को टाल दिया है। इसमें ललिता ज्वैलर्स, ऑगमोंट एंटरप्राइजेज, प्रायोरिटी ज्वैलर्स, शंकेस ज्वैलर्स, सुनील गोल्ड शामिल हैं।
| आईपीओ (IPO) | इश्यू साइज (₹ करोड़) | रिटेल सब्सक्रिप्शन (गुणा) |
|---|---|---|
| क्लीन मैक्स | 3,080 | 0.06 |
| साई पैरेंटेरल्स | 402 | 0.12 |
| पॉवरिका | 1,100 | 0.15 |
| सेडेमैक मेका. | 1,087 | 0.19 |
| राजपूताना स्टेनलेस | 255 | 0.24 |
| सेंट्रल माइन प्लानिंग | 1,841 | 0.31 |
| ओम्निटेक इंजी. | 583 | 0.33 |
| जीएसपी क्रॉपसाइंस | 400 | 0.40 |
| इनोविजन | 319 | 0.59 |
| आय फाइनेंस | 1,010 | 0.77 |
ऊंचे वैल्यूएशन के कारण निवेशक अब सतर्क
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समय छोटे निवेशक नए इश्यू में पैसा लगाने से बच रहे हैं और बड़ी संस्थागत भागीदारी भी सीमित है। इसके अलावा प्रमोटरों की ऊंची वैल्यूएशन उम्मीदें और निवेशकों की सतर्कता के बीच अंतर भी देरी की बड़ी वजह बना है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार सेकेंडरी बाजार स्थिर हो जाएं और विदेशी निवेश वापस आने लगे, तो मार्केट में हलचल बढ़ जाएगी। इतने बड़े बैकलॉग को देखते हुए जैसे ही बाजार का माहौल अनुकूल होगा. आइपीओ लॉन्चिंग बढ़ सकती है।
इसलिए 2026 में कम हुआ क्रेज
- अधिकतर हालिया आईपीओ – को उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया नहीं मिली। 50% आइपीओ जो इस साल लॉन्च हुए अपने इश्यू प्राइस से भी नीचे कर रहे ट्रेड, औसत लिस्टिंग गेन 3%
- निवेशक अब जोखिम लेने से कतरा रहे हैं। खासकर वहां, जहां कंपनियों की कीमत वैल्यूएशन उनकी असल कमाई के मुकाबले बहुत ज्यादा लग रही है।
- कंपनियों को अब आक्रामक प्राइसिंग से बचना होगा। अगर फंडामेंटल मजबूत नहीं हुए तो निवेशक ऐसे इश्यू से दूरी बनाते रहेंगे।


