8th Pay Commission: सरकारी नौकरी करने वालों के लिए एक बड़ी खबर आई है। नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी यानी NCJCM ने 8वें वेतन आयोग के सामने एक जोरदार प्रस्ताव रखा है। मांग है कि ग्रुप C कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 69,000 रुपये की जाए और साथ में फिटमेंट फैक्टर 3.83 रखने की बात भी कही गई है, जो 7वें वेतन आयोग के 2.57 से काफी ज्यादा है।
अब सवाल उठता है कि ये 69,000 रुपये का आंकड़ा आया कहां से? NCJCM की टीम ने एक पांच सदस्यीय परिवार के रोजमर्रा के खर्चों का पूरा हिसाब-किताब लगाया और उसके आधार पर यह संख्या तय की है।
देखिए कैसे आया 69,000 रुपये का आंकड़ा:
- खाने-पीने का कुल खर्च- 24,443 रुपये
- अन्य खाद्य सामग्री- 2,444 रुपये
- कपड़े और साबुन-सर्फ- 5,690 रुपये
- मकान किराया- 2,443 रुपये
- बिजली, पानी, गैस- 7,004 रुपये
- कौशल विकास- 10,506 रुपये
- सामाजिक व अन्य खर्च- 13,132 रुपये
- टेक्नोलॉजी खर्च- 3,283 रुपये
- कुल खर्च- 68,947 रुपये
क्यों हो रही सैलरी बढ़ाने की मांग?
दस साल में एक बार वेतन आयोग बनता है, यह परंपरा रही है। लेकिन इस बार जरूरत पहले से ज्यादा महसूस हो रही थी। पिछले एक दशक में खाना, दवाई, बच्चों की पढ़ाई और मकान सब कुछ महंगा हो गया। जो तनख्वाह पहले काफी लगती थी, वो अब कम पड़ने लगी है। महंगाई ने आम सरकारी कर्मचारी की कमर तोड़ दी है।
इसके अलावा नौकरियां बदल गई हैं। आज के दौर में डिजिटल काम, AI और नई तकनीक की जानकारी भी चाहिए। जब काम बढ़ा, जिम्मेदारी बढ़ी, तो तनख्वाह में भी इजाफा होना चाहिए। यही तर्क कर्मचारी संगठनों का है। NCJCM जैसे संगठन लंबे समय से यही कहते आ रहे हैं कि वेतन ढांचा जमीनी हकीकत से मेल खाना चाहिए, ना कि सिर्फ कागजों पर अच्छा दिखना चाहिए।
कर्मचारियों के लिए क्या मायने रखता है यह प्रस्ताव?
अगर यह प्रस्ताव मान लिया जाए तो निचले पायदान के सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह में अच्छा-खासा उछाल आएगा। खासकर वे लोग जो लंबे समय से कम वेतन पर काम कर रहे हैं, उनके लिए यह राहत की खबर होगी। 3.83 का फिटमेंट फैक्टर इस बात का इशारा है कि यूनियनें महंगाई, जीवनस्तर और आधुनिक जरूरतों को गंभीरता से ले रही हैं।
लेकिन जमीन पर उतरकर देखें तो अभी सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। यह अभी सिर्फ कर्मचारी पक्ष का प्रस्ताव है। असली फैसला 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और उसके बाद सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा। फिर भी लाखों कर्मचारी और पेंशनभोगी आठवें वेतन आयोग पर नजर गड़ाए बैठे हैं। उम्मीद है कि इस बार उनकी बात सुनी जाएगी।


