किशनगंज में विदेशी अंशदान विनिमयन अधिनियम (FCRA) के तहत पंजीकृत NGO को मिलने वाली विदेशी फंडिंग की जांच अब और कड़ी कर दी गई है। जिला प्रशासन ने इन संस्थाओं की वित्तीय गतिविधियों की गहन पड़ताल के लिए आयकर विभाग और जीएसटी विभाग को अनुशंसा भेजी है। जिला स्तर पर गठित जांच टीम को कई संगठनों द्वारा पूरी वित्तीय जानकारी और लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं कराया गया था। इसके बाद जिलाधिकारी विशाल राज ने उच्च स्तरीय जांच का निर्णय लिया। अब संबंधित विभाग इन संस्थाओं के खातों, आय-व्यय, संपत्ति रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की गहन पड़ताल करेंगे। 13 संस्थानों में होगी जांच जांच के दायरे में कुल 13 संस्थाएं शामिल हैं। इनमें डाबर चैरिटेबल ट्रस्ट (पानीबाग), निशी वेलफेयर सोसाइटी (पश्चिमपाली), मिल्ली एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी (जनता हाट, कोचाधामन), रैपिड एक्शन फॉर वुमेन अचीवमेंट (राहत, कबीर चौक) और बेथल एजुकेशनल ट्रस्ट (मिलनपल्ली) प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त, 11 अन्य संस्थाओं की जांच भी जारी है। गठित टीम ने पहले ही इन संस्थानों को उनके बैंक खातों, वित्तीय दस्तावेजों और संपत्ति से जुड़े कागजात प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। हालांकि, कई संस्थाएं निर्धारित समय में ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सकीं। इस लापरवाही के बाद ही यह मामला आयकर और जीएसटी विभाग को सौंपा गया है। विदेशी फंडों के उपयोग का होगा जांच प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, किशनगंज एक सीमावर्ती जिला है, जिसके कारण यहां विदेशी फंडिंग और संभावित अवैध लेनदेन सुरक्षा एजेंसियों के लिए हमेशा चिंता का विषय रहे हैं। इसलिए यह जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आयकर विभाग यह आकलन करेगा कि विदेशी फंड का उपयोग किस उद्देश्य और किन मदों में किया गया है। यदि जांच के दौरान विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग या अनियमितताओं के ठोस साक्ष्य मिलते हैं, तो यह मामला केंद्रीय एजेंसियों को भी सौंपा जा सकता है। पहले वर्ष 2025-26 और 2026-27 के आय-व्यय का लेखा-जोखा मांगा गया था, लेकिन अब संस्थाओं को मिले विदेशी फंड के पूरे इतिहास की जांच की जाएगी। जिला प्रशासन की इस सख्ती से एनजीओ क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। किशनगंज में विदेशी अंशदान विनिमयन अधिनियम (FCRA) के तहत पंजीकृत NGO को मिलने वाली विदेशी फंडिंग की जांच अब और कड़ी कर दी गई है। जिला प्रशासन ने इन संस्थाओं की वित्तीय गतिविधियों की गहन पड़ताल के लिए आयकर विभाग और जीएसटी विभाग को अनुशंसा भेजी है। जिला स्तर पर गठित जांच टीम को कई संगठनों द्वारा पूरी वित्तीय जानकारी और लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं कराया गया था। इसके बाद जिलाधिकारी विशाल राज ने उच्च स्तरीय जांच का निर्णय लिया। अब संबंधित विभाग इन संस्थाओं के खातों, आय-व्यय, संपत्ति रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की गहन पड़ताल करेंगे। 13 संस्थानों में होगी जांच जांच के दायरे में कुल 13 संस्थाएं शामिल हैं। इनमें डाबर चैरिटेबल ट्रस्ट (पानीबाग), निशी वेलफेयर सोसाइटी (पश्चिमपाली), मिल्ली एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी (जनता हाट, कोचाधामन), रैपिड एक्शन फॉर वुमेन अचीवमेंट (राहत, कबीर चौक) और बेथल एजुकेशनल ट्रस्ट (मिलनपल्ली) प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त, 11 अन्य संस्थाओं की जांच भी जारी है। गठित टीम ने पहले ही इन संस्थानों को उनके बैंक खातों, वित्तीय दस्तावेजों और संपत्ति से जुड़े कागजात प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। हालांकि, कई संस्थाएं निर्धारित समय में ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सकीं। इस लापरवाही के बाद ही यह मामला आयकर और जीएसटी विभाग को सौंपा गया है। विदेशी फंडों के उपयोग का होगा जांच प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, किशनगंज एक सीमावर्ती जिला है, जिसके कारण यहां विदेशी फंडिंग और संभावित अवैध लेनदेन सुरक्षा एजेंसियों के लिए हमेशा चिंता का विषय रहे हैं। इसलिए यह जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आयकर विभाग यह आकलन करेगा कि विदेशी फंड का उपयोग किस उद्देश्य और किन मदों में किया गया है। यदि जांच के दौरान विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग या अनियमितताओं के ठोस साक्ष्य मिलते हैं, तो यह मामला केंद्रीय एजेंसियों को भी सौंपा जा सकता है। पहले वर्ष 2025-26 और 2026-27 के आय-व्यय का लेखा-जोखा मांगा गया था, लेकिन अब संस्थाओं को मिले विदेशी फंड के पूरे इतिहास की जांच की जाएगी। जिला प्रशासन की इस सख्ती से एनजीओ क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।


