Stuttering Awareness Day: हर साल अक्टूबर का महीना उन सभी लोगों के लिए बहुत खास होता है जो बोलते समय हकलाने या अटकने की समस्या का सामना करते हैं। International Stuttering Awareness Day Online Conference (अंतर्राष्ट्रीय हकलाना जागरूकता दिवस ऑनलाइन कांफ्रेंस) के अनुसार, दुनिया भर में इसको लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करने और लोगों को जागरूक करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय हकलाना जागरूकता दिवस मनाया जाता है। इस बार की थीम यह समझाने पर जोर देती है कि हकलाने का अनुभव हर इंसान के लिए एक जैसा नहीं होता। किसी के लिए यह बहुत मामूली बात हो सकती है, तो किसी के लिए दूसरों के सामने अपनी बात रखना बहुत बड़ा चैलेंज बन जाता है। आइए जानते हैं कि इसके पीछे के कारण क्या है और इसको कैसे कम किया जा सकता है।
क्या हकलाना सिर्फ बोलने में होने वाली एक रुकावट है?
द स्टटरिंग फाउंडेशन के अनुसार, अक्सर लोग सोचते हैं कि हकलाना सिर्फ एक शारीरिक समस्या या बोलने में होने वाली हिचकिचाहट है। लेकिन सच यह है कि इसका असर इंसान के मन और उसके आत्मविश्वास पर बहुत गहरा पड़ता है। जब कोई व्यक्ति बोलते समय अटकता है, तो उसे समाज के ताने या मजाक का डर सताने लगता है।
- अलग-अलग अनुभव।
- बात छिपाने की कोशिश।
- खुद को स्वीकार करना।
हकलाने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?
हकलाना किसी की लापरवाही या जानबूझकर की गई गलती नहीं होती। इसकी शुरुआत बचपन से ही हो सकती है और इसके पीछे कई वजहें काम करती हैं:
- परिवार और जेनेटिक्स– अगर परिवार में पहले किसी को हकलाने की समस्या रही है, तो बच्चों में भी इसके होने की गुंजाइश बढ़ जाती है।
- दिमाग और बोलने का तालमेल- जब दिमाग से मिलने वाले सिग्नल और मुंह की मांसपेशियों (जैसे जीभ और होंठ) के बीच तालमेल थोड़ा बिगड़ जाता है, तो शब्द अटकने लगते हैं।
- घबराहट और दिमागी तनाव– किसी अजनबी से बात करते वक्त, स्टेज पर बोलते समय या किसी इंटरव्यू के दौरान ज्यादा नर्वस होने से हकलाहट और बढ़ जाती है।
- बचपन का माहौल- अगर बचपन में बच्चे पर साफ और तेज बोलने का बहुत ज्यादा दबाव डाला जाए, तो उसका आत्मविश्वास डगमगा सकता है।
बातचीत में अपना आत्मविश्वास कैसे बढ़ाएं?
हकलाने की वजह से अपनी आवाज को दबाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। थोड़ी सी समझ और सही आदतों से आप अपनी बात बहुत आसानी से रख सकते हैं:
- आराम से और धीरे बोलें- बात करते समय कभी भी जल्दबाजी न करें। वाक्यों के बीच में थोड़ा रुकें, इससे दिमाग को शब्द चुनने का समय मिल जाता है।
- गहरी सांस लें- जब भी लगे कि आप अटक रहे हैं या घबराहट हो रही है, तो एक-दो लंबी और गहरी सांस लें। इससे शरीर और दिमाग दोनों शांत होते हैं।
- विशेषज्ञ से सलाह लें- अगर समस्या ज्यादा है तो स्पीच थेरेपिस्ट से जरूर मिलें। वे बोलने के ऐसे आसान तरीके बताते हैं जिनसे बातचीत में रवानी आती है।
- खुलकर बात करें- अपने दोस्तों और घर वालों को अपनी समस्या के बारे में खुलकर बताएं। जब आप खुद को लेकर सहज हो जाएंगे, तो दूसरों का डर भी खत्म हो जाएगा।
हकलाना किसी इंसान की काबिलियत या समझदारी को कम नहीं करता। समाज में जरूरत इस बात की है कि हम किसी के अटकने पर उसका मजाक उड़ाने के बजाय उसे सब्र से सुनें। जब हम एक-दूसरे की कमियों को स्वीकार करके उन्हें बोलने का पूरा मौका देंगे, तभी हर इंसान बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी बात रख पाएगा।

