भारत ने ‘नेकलेस ऑफ डायमंड्स’ रणनीति से हिंद-प्रशांत महासागर में बनाया दबदबा, जानें चीन का कैसे बन गया बड़ा दुश्मन?

भारत ने ‘नेकलेस ऑफ डायमंड्स’ रणनीति से हिंद-प्रशांत महासागर में बनाया दबदबा, जानें चीन का कैसे बन गया बड़ा दुश्मन?

भारत अब हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा का अहम खिलाड़ी बन चुका है। चीन की बढ़ती समुद्री घुसपैठ के खिलाफ भारत का ‘नेकलेस ऑफ डायमंड्स’ रणनीति और अन्य कदम अब सबसे प्रभावी जवाब साबित हो रहे हैं।

एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि क्वाड के बाकी देशों में भारत जैसी भौगोलिक स्थिति और रणनीतिक ताकत किसी में नहीं है। चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति असल में भारत को घेरने की चाल है।

13 बंदरगाहों पर चीन का कब्जा

ग्वादर, हम्बनटोटा, क्यौकप्यू और चटगांव जैसे बंदरगाह भारत को चारों तरफ से घेर रहे हैं। 2008 से अब तक चीन ने हिंद महासागर में 45 से ज्यादा नौसैनिक मिशन भेजे हैं और कम से कम 13 बंदरगाहों पर उसका कब्जा है। लेकिन भारत चुप नहीं बैठा।

‘नेकलेस ऑफ डायमंड्स’ के तहत भारत ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और जापान के साथ लॉजिस्टिक समझौते कर चुका है। सेशेल्स में नौसैनिक अड्डा बनाया गया है।

साथ ही फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल बेचने का सौदा 2024 से शुरू हो गया। ये कदम चीन की समुद्री दादागिरी के खिलाफ सबसे ठोस जवाब माने जा रहे हैं।

सागर से महासागर तक भारत की अपनी राह

भारत ने इस क्षेत्र में सुरक्षा और विकास की अपनी नीति पहले बनाई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में मॉरीशस से SAGAR (सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन) की घोषणा की थी।

ये अमेरिका की FOIP नीति से दो साल पहले की बात है। इस नीति में पड़ोसी देशों के साथ विश्वास, समुद्री नियमों का सम्मान और शांतिपूर्ण विवाद समाधान पर जोर है।

भारतीय नौसेना की भूमिका

भारतीय नौसेना ने SAGAR को जमीन पर उतारा। गल्फ ऑफ एडेन में समुद्री डाकुओं से लड़ाई, मानवीय मदद, और कोविड काल में मॉरीशस, मालदीव, मेडागास्कर जैसे देशों को दवाइयां पहुंचाईं। श्रीलंका से बांग्लादेश तक तटीय निगरानी रडार लगाए गए।

मार्च 2025 में भारत ने इसे और आगे बढ़ाते हुए MAHASAGAR (म्यूचुअल एंड होलिस्टिक एडवांसमेंट फॉर सिक्योरिटी एंड ग्रोथ एक्रॉस रीजन्स) शुरू किया। इसे चीन की बेल्ट एंड रोड पहल का विकल्प बताया जा रहा है।

अफ्रीका-भारत की नौसैनिक एक्सरसाइज AIKEYME में 10 अफ्रीकी देश शामिल हुए। IOS SAGAR मिशन के तहत अफ्रीकी और दक्षिण एशियाई नौसेनाओं के साथ संयुक्त गश्त भी की गई।

भारत क्यों है FOIP का सबसे भरोसेमंद साथी?

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अमेरिका के साथ औपचारिक सैन्य गठबंधन में नहीं जा रहा है। यही वजह है कि वैश्विक दक्षिण के कई देश FOIP को पश्चिमी देशों की चीन-विरोधी साजिश नहीं मान रहे हैं।

भारत अपनी शर्तों पर शामिल हो रहा है, जिससे ASEAN, अफ्रीका और दक्षिण एशिया के देशों को भरोसा हो रहा है कि ये कोई नया शीत युद्ध नहीं है।

भारत की ये स्वतंत्र भूमिका पूरे क्षेत्र में FOIP को ज्यादा स्वीकार्य बना रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की भौगोलिक स्थिति और रणनीतिक पहुंच इसे क्षेत्र की सुरक्षा का सबसे करीबी और विश्वसनीय खिलाड़ी बनाती है।

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