वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है और वार्ता का अगला दौर पांच अक्टूबर से शुरू होगा। गोयल ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘अगले 90 दिन भारत-कनाडा संबंधों के लिए बहुत महत्वपूर्ण अवधि होने जा रहे हैं।’’
दोनों देशों के बीच सीईपीए वार्ता का चौथा दौर 18 सितंबर को नयी दिल्ली में संपन्न हुआ। दोनों देश इस साल के अंत तक बातचीत पूरी करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं, जिसके चलते वार्ता की गति तेज की गई है।
गोयल ने कहा, ‘‘दोनों पक्षों ने बातचीत को तेजी से आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इसी के तहत हमारा दल पांच अक्टूबर को पांचवें दौर की वार्ता के लिए जाएगा।’’
कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू पिछले सप्ताह गोयल के साथ बातचीत के लिए मुंबई आए थे। भारत से कनाडा को होने वाले प्रमुख निर्यात में दवाएं, लौह एवं इस्पात, समुद्री उत्पाद, सूती परिधान, इलेक्ट्रॉनिक सामान और रसायन शामिल हैं।
वहीं, कनाडा से भारत मुख्य रूप से दालें, मोती और कोयला, उर्वरक, कागज और कच्चे तेल का आयात करता है। भारत के कनाडा को सेवा निर्यात में दूरसंचार, कंप्यूटर एवं सूचना सेवाओं तथा अन्य कारोबारी सेवाओं की प्रमुख हिस्सेदारी है। भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते के बारे में गोयल ने कहा कि इसके आने वाले महीनों में लागू होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि यूरोपीय संसद अगले करीब तीन महीनों में समझौते का अनुमोदन कर सकती है और इसके बाद अगले छह-सात महीनों में यह लागू हो सकता है। भारत-चिली व्यापार समझौते के बारे में गोयल ने कहा कि वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने हाल में चिली का दौरा कर बातचीत की प्रगति की समीक्षा की है। उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि आने वाले कुछ महीनों में हमें कुछ अच्छी खबर सुनने को मिलेगी।’’
अमेरिकी शुल्क को लेकर सरकार की वैकल्पिक योजना के बारे में पूछे जाने पर गोयल ने कहा, ‘‘अभी विवरण आ रहे हैं।
एक बार हमने उनका अध्ययन कर लिया और उचित समय पर हम आपसे इस बारे में चर्चा करेंगे।’’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर को रूस और ईरान पर प्रतिबंध संबंधी अधिनियम’ पर हस्ताक्षर किए थे। यह कानून राष्ट्रपति को रूस और ईरान से तेल एवं गैस खरीदने वाले देशों, जिनमें चीन और भारत भी शामिल हैं, पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार देता है। निर्यातकों ने इस कानून को लेकर गंभीर चिंता जताई है और कहा है कि अमेरिका द्वारा भारतीय सामान पर ऊंचा शुल्क लगाए जाने से व्यापारिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं।
आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा है कि नया अमेरिकी कानून भारत को 100 प्रतिशत तक शुल्क के सीधे जोखिम में डालता है और इसका इस्तेमाल भारत पर रूसी तेल की खरीद कम करने तथा असमान द्विपक्षीय व्यापार समझौता स्वीकार करने का दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है। आर्थिक शोध संस्थान के अनुसार, जुलाई, 2026 में रूस ने भारत को 7.27 अरब डॉलर मूल्य का कच्चा तेल निर्यात किया, जो भारत के कुल 14.21 अरब डॉलर के कच्चे तेल आयात का 51.1 प्रतिशत था। भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते पर गोयल ने कहा कि इसके आने वाले महीनों में प्रभावी होने की उम्मीद है।

